- बालमुकुंद शर्मा
सवाल से भागने वाले नेताओं के व्यवहार से बवाल
2020 से 2023 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव तक, छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में अलग-अलग बैठक ली और आंकलन किया, तब सभी भाजपा नेताओं पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा हुआ था सभी बोल रहे थे कि कार्यकर्ता बहुत निराश हैं, खासकर 2013 से 2018 तक भाजपा सरकार में जो कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हुई, ब्यूरोक्रेट्स सरकार को अपने नियंत्रण में ले चुका था, भ्रष्टाचार चरम सीमा पर था, कार्यकर्ताओं की कहीं सुनवाई नहीं हो रही थी, मंत्री अपने में मस्त थे और उसका परिणाम यह हुआ कि 2018 में भाजपा की सरकार सत्ता से हट गयी । सभी की बातें सुनने के बाद रणनीति बनायी गयी और जिला पदाधिकारी को निर्देश दिया कि वह निगेटिव बातें ना करें, जनता के बीच भी पार्टी के छवि ठीक नहीं है, तो धीरे-धीरे उसे दूर करने का प्रयास किया जाएगा और विधानसभा चुनाव के परिणाम भी 2023 में भाजपा के पक्ष में आए।
भाजपा नेताओं के दौरों का दौर
अभी कुछ दिनों पूर्व इन भाजपा नेता ने जिलों के दौरे पुनः प्रारंभ किया और राजधानी रायपुर में भी जिला पदाधिकारियों की बैठक लिए और उन्हें बताया कि 25 महीने हो गए भाजपा की सरकार बने, हमारे पास जितने लोग आते हैं, सभी निराश हैं, निगेटिव बातें कर रहे हैं कि सरकार ठीक नहीं चल रही है। भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, ब्यूरोक्रेट फिर हावी हो चुका है, मंत्री गंभीर भ्रष्टाचार में लिप्त हो गए हैं, कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही है। कार्यालय में जो मंत्रियों का कार्यक्रम होता था उसे फिर शुरू किया गया है, लेकिन वहां आवेदन देने से भी काम नहीं हो रहे हैं। ऐसे में 2028 में परिणाम अनुकूल नहीं आ सकते, नेता बोले कि आप लोगों को फिर पुनः एक बार कह रहा हूं कि जिले के पदाधिकारी हमारे पास आकर वही 2018 से पहले वाली बातें कहने लगे हैं, लेकिन उनसे फिर से अपील करता हूं कि वह निगेटिव बात करना बंद करें, संगठन से जितना हो सके, नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है और सबके सहयोग से पुनः 2028 में फिर छत्तीसगढ़ में सरकार बनाएंगे। लेकिन कार्यकर्ता, पदाधिकारी निराश ना हो।
कार्यकर्ताओं में निराशा
उपरोक्त वर्तमान सामयिक बातों से स्पष्ट होता है कि प्रदेश भाजपा कार्यालय में जनता, कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की भावना की बातें, बड़े नेताओं के पास पहुंच जरूर रही है, लेकिन वरिष्ठ नेतागण हताश-निराश भाजपाईयों की समस्याओं का निराकरण नहीं कर पा रहे हैं और वह बड़ा नेता अभी भी आशावान है कि वे 2028 में पुनः सरकार बनाएंगे।
रेडलाइन में बस्तर-सरगुजा
लेकिन बस्तर और सरगुजा संभाग रेड लाइन में आ चुका है, यह शायद प्रदेश भाजपा कार्यालय को समझ नहीं आ रहा है, बस्तर संभाग के 12 विधानसभा में से 8 विधानसभा भाजपा के पास है, लेकिन स्थितियां-परिस्थितियां जर्जर होते जा रही है, निर्वाचित जनप्रतिनिधि रेत चोरी और खनिज के ट्रांसपोर्टिंग के साथ भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। जनता कार्यकर्ता खुली आंखों से देख रही है, कि भ्रष्टाचार कोढ़ की तरह फैल चुका है अगर नियंत्रित नहीं किया गया, तो परिणाम उल्टा हो जाएगा और होगा भी।
सरगुजा संभाग में ज्यादा नाराजगी
ठीक उसी तरीके से छत्तीसगढ़ के वर्तमान भाजपा सरकार लगभग सरगुजा संभाग से चल रही है और सरगुजा संभाग की सभी 14 विधानसभा सीट भाजपा के पास है, लेकिन वहां सरकार और संगठन में जबरदस्त गुटबाजी चल रही है, जिनका गांव और वार्ड में जन आधार नहीं है उन्हें जिले और प्रदेश में पदाधिकारी बना दिया गया है, मंत्री भ्रष्टाचार में खुलेआम लिप्त है यह चर्चा न केवल सरगुजा संभाग बल्कि पूरे प्रदेश में हो रही है।
व्यापारियों के दल में पावरफुल दलाल
दलाल ही पावरफुल है, सक्रिय है, सही माना जाये तो ये दलाल प्रवृत्ति के लोग ही सरकार चला रहे हैं, अब तो छत्तीसगढ़ में एक लाख का आर्डर लेने वाले दलालों के साथ साथ एक लाख करोड़ का दलाल भी कदम रख चुका है। यदि राज्य सरकार कुछ नियंत्रण नहीं कर पाएगी, तो 2028 में कांग्रेस नहीं जीतेगी, लेकिन भाजपा चुनाव जरूर हार जाएगी, सीधा लाभ कांग्रेस को मिलेगी। हालांकि कांग्रेस भी मानसिक रूप से विचलित है, वहां भी गुटबाजी चरण सीमा पर है, लेकिन अंततः सीधा लाभ कांग्रेस को ही मिलना लगभग तय है।