इस्लामाबाद :
पाकिस्तान भले ही कटोरा लेकर दुनिया में भीख मांगता है, लेकिन सच्चाई कुछ अलग है कि इस देश की धरती के भीतर वो-वो है, जिसे पाने के लिए कई देश तरस रहे हैं, यह बात अलग है कि पाकिस्तान इसका उपयोग अपनी जनता की खुशी और बेहतरी के लिए कभी नहीं करता, एक रिपोर्ट मुताबिक प्राकृतिक गैस, कोयला, तांबा और सोने जैसे भरपूर संसाधनों के बावजूद बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे गरीब देश बना हुआ है।
जमीन छीन जाने का डर
मिल रही जानकारी के मुताबिक बलूचिस्तान की जनता चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (चाइना-पाक इकानाॅमिक काॅरीडोर) को विकास के अवसर के बजाय अपनी जमीन और हक छीनने की प्रक्रिया के रूप में देखते हैं।
असमानता और अलगाववाद
सेसक्यूब में प्रकाशित एक लेख के अनुसार बलूचिस्तान से निकाले गए संसाधनों से मिलने वाला राजस्व ज्यादातर पाकिस्तान केन्द्र सरकार और सेना से जुड़ी कंपनियों के पास जाता है, लेकिन इसका फायदा स्थानीय विकास पर खर्च नहीं किया जाता, इससे आर्थिक असमानता और राजनीतिक अलगाव गहराता जा रहा है।
बड़ा खजाना, फिर भी गरीब है बलोचिस्तान
अनुसंधान लेख में कहा गया है कि ग्वादर पोर्ट तकनीकी रूप से जरूर विकसित हुआ है, लेकिन आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को अब भी साफ पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और स्थाई रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, ग्वादर को बिना वास्तविक एकीकरण के जुड़ाव का उदाहरण बताया गया है, जो इस इलाके में पुराने असंतोषों को और बढ़ाता है, लेख के मुताबिक चाइना-पाक इकानाॅमिक काॅरीडोर को राष्ट्रीय विकास और आपसी जुड़ाव का जरिया बताया जाता है, हालांकि इस्लामाबाद के लिए यह आर्थिक पुनरुद्धार और भू-राजनीतिक हथियार है, जबकि चीन के लिए यह अरब सागर तक पहुंच और वैकल्पिक व्यापार मार्ग उपलब्ध कराता है। बलूचिस्तान को केवल एक ट्रांजिट कॉरिडोर बनाकर छोड़ दिया गया है, न कि एक अहम भागीदार के रूप में शामिल किया गया है।
पैसा है, पर जनता को नहीं मिलता
रिपोर्ट में कहा गया है कि फैसले केंद्र में लिए जाते हैं और स्थानीय लोगों से बेहद कम सलाह-मशविरा किया जाता है, परियोजनाओं से मिलने वाले अवसरों का फायदा ज्यादातर गैर-बलूच मजदूरों को मिलता है। बाहर से बड़ी संख्या में मजदूरों के आने और परियोजना क्षेत्रों में भारी सैन्य तैनाती से स्थानीय लोगों में जनसांख्यिकीय बदलाव और सांस्कृतिक पहचान खत्म होने का डर बढ़ा है, इसी कारण बलूचिस्तान में चीनी नागरिक और सीपीईसी से जुड़ी परियोजनाएं अक्सर उग्रवादी हमलों का निशाना बनती रही हैं, पाकिस्तान ने सीपीईसी की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा बल और निगरानी इकाइयां तैनात की हैं, लेकिन रिपोर्ट का कहना है कि इससे शासन की प्राथमिकताएं बिगड़ रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बलूचिस्तान का भविष्य और सीपीईसी की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि पाकिस्तान कितना समावेशी संघीय ढांचे की ओर बढ़ता है, जो क्षेत्रीय पहचान, स्थानीय शासन और लोगों की भागीदारी का सम्मान करे।
