रायपुर :
अब तो पहली बार के निर्वाचित विधायक और पुराने विधायक, जो 15 वर्ष तक मंत्री रह चुके थे और फिलहाल सिर्फ विधायक हैं, उनकी नाराजगी या गुस्सा, कल 12 मार्च को मुख्यमंत्री निवास में विधायकों की अचानक बुलाई गयी बैठक में दिखा, बैठक जो विधानसभा सत्र में, सदन के स्थगित होने के बाद आयोजित हुआ था।

संतोषजनक जवाब नहीं : सदन में झूठ ही झूठ
यह बैठक मुख्यमंत्री के द्वारा विधायक दल के सचिव के माध्यम से अचानक बुलाई गयी थी। सभी विधायकों में चर्चा यह था कि यह बैठक क्यों बुलाई गई है, जब बैठक प्रारंभ हुई, तो बताया गया कि विपक्ष विधानसभा में हावी है, मंत्री और सत्ता पक्ष के विधायक संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं, इस पर आप लोगों को विचार करना चाहिए। बस…फिर क्या था… विधायकों का गुस्सा फूट पड़ा।
सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराज विधायक
वरिष्ठ विधायक और नए निर्वाचित विधायकों ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि आखिर विधानसभा के अंदर हम प्रश्न लगते हैं और भ्रष्टाचार के जवाब मांगते हैं, विकास कार्य रुक गए हैं, उसकी जानकारी मांगते हैं, तो मंत्रीगण सिर्फ विधानसभा के अंदर अधिकारियों के द्वारा झूठ के साथ दिया गया जवाब को ही पढ़ दिया जाता है। आखिर विधानसभा में हमें यह झूठा जवाब क्यों दिया जा रहा है, जनता के बीच तेजी से सरकार की और संगठन की छवि खराब हो रही है, हम क्या जवाब दें।
जनता कार्यकर्ता को क्षेत्र में जवाब नहीं दे पा रहे हैं
यहां तक कहा गया कि मंडल से लेकर जिला तक जो बैठकें हो रही है, उसमें कार्यकर्ता भी पूछ रहे हैं कि यह सब क्या हो रहा है? प्रशासन पर सरकार का नियंत्रण इतनी जल्दी, मात्र 27 महीने में कैसे समाप्त हो रहा है, जमीन पर कोई विकास कार्य दिख नहीं रहा है, हम जनता को क्या जवाब दें? सिर्फ बैठक करने से कुछ नहीं होगा.
सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों पर भी गंभीर नाराजगी व्यक्ति यह की गई कि वह कम से कम 20 वर्ष से ज्यादा हो चुके हैं मंत्री पद पर हैं, लेकिन उनका जवाब भी संतोषजनक नहीं है। क्या मंत्रियों की कोई तैयारी नहीं है, वे पूरी तरह से अधिकारियों के भरोसे अपने विभाग को चला रहे हैं और सिर्फ विधानसभा में गलत जानकारी देकर संतुष्ट हो रहे हैं, भाजपा विधायकों में गंभीर नाराजगी झलक रही थी जैसा कि सूत्र बता रहे हैं।
समय पूर्व विधानसभा सत्र समाप्त होने के आसार
सूत्र तो अभी-अभी बता रहे हैं कि इस नाराजगी को ध्यान में रखते हुए और विपक्ष के द्वारा विधानसभा के अंदर सरकार पर जबरदस्त दबाव बनाने की कारण विधानसभा का बजट सत्र जो 20 मार्च तक चलना है, वह 17 या 18 मार्च को ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी जाएगी।
मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा दांव पर
बैठक में यहां तक कहा गया कि आखिर सरकार की और मुख्यमंत्री की छवि को विधानसभा के अंदर और विधानसभा के बाहर भ्रष्ट्र अधिकारी बदनाम करने में लगे हुए हैं, भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गया है, सरकार को इस पर नियंत्रण करना चाहिए, सिर्फ मुख्यमंत्री के ईमानदार छवि पर 2028 में चुनाव मैदान में जाकर जीत हासिल करना संभव नहीं है, मंत्रियों पर भी गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं, इसमें कितनी सच्चाई है मुख्यमंत्री महोदय को संज्ञान में लेकर, सरकार पर अपनी पकड़ मजबूत रखना चाहिए और अपनी साफ-सुथरी छवि को बरकरार रखते हुए जवाबदेह भी होना चाहिए।
कल लोकसभा में अध्यक्ष नाराज हुये थे

बता दूं कि कल ही लोकसभा में अध्यक्ष ओमप्रकाश बिड़ला ने सदन में कहा कि सदस्यों को सदन में कुछ भी नहीं बोलना चाहिए, शायद इन्हीं व्यक्तव्यों को सुनने या पढ़ने के बाद मुख्यमंत्री ने विधायक दल की अचानक बैठक बुलाई।