मुझ पर मेहरबानी करो, मेरे नाम से योजनाएं और प्रशिक्षण देना बंद करो, 2014 के बाद अब पार्टी में बड़े-बड़े नेताओं का नया स्वरूप सामने आ चुका है, उनको आदर्श बनाकर उनके नाम पर प्रशिक्षण देवें और मुझे बदनाम करना बंद करो, शायद ऊपर ईश्वर के महल से यही आवाज स्वर्गीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की यही आवाज आ रही है।
जो पुतले जलाये : वही पद-प्रतिष्ठा पाये
जिन व्यक्तियों ने डीडी उपाध्याय, अटलजी का पुतला जलाया, उनकी मूर्तियों पर पेशाब किये, वह आज भाजपा के प्रभावशाली नेता बने हुए है, कुछ लोग तो प्रदेश के प्रशिक्षण प्रभारी भी बन चुके हैं, जैसा की समाचार पत्रों में आ रहा है।
देवतुल्य और निष्ठावान भाजपा कार्यकर्ताओं में गंभीर नाराजगी है लेकिन प्रदेश नेतृत्व सुनने को तैयार नहीं है, पता नहीं क्या जड़ी-बूटी खिलाया गया है प्रतिदिन समाचार पत्रों के पृष्ठों में लेख उल्लेख हो रहा है, सिर्फ 28 महीनों में छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार समुद्र में तैरने लगा है और सुर्खियां बनने लगा है। प्रदेश की जनता आश्चर्यचकित तो नहीं किन्तु चिंतित जरुर हैं।
छग राज्य : बजट सत्र में गजब का माहौल
प्रमाण यह बता रहे हैं कि यह बजट सत्र जो 20 मार्च को समाप्त हुआ, छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार भाजपा और कांग्रेस के विधायकों के द्वारा विधानसभा में जो प्रश्न लगाये गये और उसका जवाब प्रमाणित रूप से देने की जगह, लगभग अधिकांश मंत्री भ्रष्टाचारियों को बचाने में ही लगे रहे। इतना ही नहीं मुस्कुराते भी रहे, लेकिन प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व क्यों इसे संज्ञान में नहीं ले रहा है। सरकार की छवि तेजी से खराब हो रही है अभी तो 32 महीने और बाकी है, आगे क्या होगा, रामजी जानें….
प्रशासन निरंकुश…
जनता की समस्याओं और जनहित कार्यों पर मंडल स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक, संगठन व नेतृत्व कोई ध्यान नहीं दे रहा है, प्रदेश की जनता में हार्दिक नाराजगी है, जिला स्तर के अधिकारी निरंकुश हो गए हैं। वह यहां तक की स्थानीय विधायकों की बात भी नहीं सुन रहे हैं, संसद सदस्यों की बात तो अलग है, उन्हें तो कोई मानते ही नहीं और अधिकारी यह समझ चुके हैं कि विधायक और सांसद की बात सरकार नहीं सुनती…
भ्रष्ट अधिकारी बन रहे भाजपा नेता
भ्रष्टाचार में लिप्त रहे वे समस्त अधिकारी जो सफलतापूर्वक जांच में दूषित पाए गए थे, जिसे जांच समितियों ने दोषी पाकर, अनुशंसा के साथ 2004 से 2018 के बीच सरकार के पास भेजा था और लेकिन सरकार ने कैबिनेट में उन्हें क्लीन चिट दे दिया और वह सेवानिवृत होने के बाद सफलतापूर्वक भाजपा का सदस्यता ही ग्रहण नहीं किया बल्कि अब तो बड़े-बड़े पदों पर पहुंच चुके हैं, कुछ तो प्रदेश का समिति के सदस्य भी बन चुके हैं और कुछ लोगों ने विधानसभा क्षेत्र चिह्नित कर वहां कार्य भी प्रारंभ कर लिया है।
2028 विधानसभा चुनाव में भ्रष्ट बनेंगे माननीय
अब तो चर्चा यह भी है कि 2028 के विधानसभा चुनाव में 15 से 20 उन कांग्रेसियों और उन चिन्हित भ्रष्ट अधिकारियों को पार्टी की टिकट भी मिल जाएगी, क्योंकि पार्टी की जो चयन समिति है जो 2014 के बाद स्थापित हुई है, के स्वसंचालित, स्वयंनिर्देशित सिद्धांतों के अनुसार जीतने वाले प्रत्याशी को टिकट दिया जाएगा। इसका मतलब 1980 से लेकर 2013 तक और 2014 से लेकर आजतक तक की भाजपा में जीतने योग्य प्रत्याशियों की संख्या कम हो गई है, इसलिए तो छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि अधिकांश प्रदेशों में, जिसमें हाल ही में चुनाव हो रहे पश्चिम बंगाल और असम में दलबदलू कांग्रेसियों और भ्रष्ट लोगों को भी टिकट दे दिया गया है, भविष्य में छत्तीसगढ़ में भी इस सिद्धांत की पुनरावृत्ति किउ जाएगी।
मूल भाजपाई कुंठाग्रस्त
वरिष्ठतम भाजपा कार्यकर्ता, कार्यकर्ता ही रहेंगे, कार्यकर्ता यही सोच सोच कर बहुत कुंठित हो रहे हैं कि आखिर पार्टी किस दिशा पर जा रही है।
अभी समय है यदि जनता की समस्याओं की आवाज प्रशासन और शासन के पास, संगठन के माध्यम से नहीं पहुंचेगी और उसका निराकरण नहीं होगा, तो 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में विपरीत परिणाम आने से कोई रोक नहीं सकता। यह आम जनता और भाजपा के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं में ही चर्चा का विषय बन चुका हो। समय रहते यदि प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष लंबे समय तक छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी रहे हैं, उन्हें संज्ञान में लेना होगा।
विधायक की शिकायत
किसी वरिष्ठ विधायक की नई दिल्ली में शिकायत करने से कुछ नहीं होगा, शिकायत कर आत्म संतुष्टि जरूर प्राप्त कर लेंगे, लेकिन चिंता इस बात की करनी होगी कि उस विधायक ने, जो प्रश्न लगाया, उसमें गलत क्या था? क्या विभाग में भ्रष्टाचार नहीं हुआ? बात यही होनी चाहिए, भ्रष्टाचार रोकने के लिए मंत्रीगणों का अंकुश नहीं है, प्रतीत होता है कि ये मंत्रीगण भी उन्हीं भ्रष्टस्वामी के मुरीद हो चुके हैं और महसूस कर रहे हैं कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ा जा सकता, मंत्रिपरिषद से कोई नहीं निकलवा सकता, कब तक निर्वाचित विधायकों के मुंह को बंद करने का प्रयास किया जायेगा।