[ अजय कुमार ]
नई दिल्ली :
प्राइवेट पेट्रोलियम कंपनी, शैल पेट्रोलियम कंपनी और नायरा पेट्रोलियम कंपनी ने डीजल और पेट्रोल के मूल्य बढ़ा दिए, कारण बताया जा रहा है कि अमेरिका/ इजरायल-ईरान/ युद्ध।
देश की अंडरटेकिंग पेट्रोलियम कंपनियां जो भारत सरकार के अधीन है, के नई दिल्ली सूत्र बता रहे हैं जिसके अनुसार उन्हें नुकसान की भरपाई के लिए सीमा शुल्क ₹13 से घटाकर ₹3 कर दिया गया अर्थात ₹10 छूट दी गई है।
यह छूट पर्याप्त नहीं है …
पेट्रोलियम कंपनी का कहना है कि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण, सरकारी तेल कंपनियों (आईओसी, बीपीसीएल, एचपीसीएल) को पेट्रोल पर लगभग ₹24 और डीजल पर ₹30 प्रति लीटर का अंडर-रिकवरी या नुकसान हो रहा है। इस घाटे के बावजूद, ईंधन की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है।
चुनाव के कारण रुका हुआ है महंगाई

पांच राज्यों के चुनाव हो रहे हैं और अंतिम मतदान तिथि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में है, नई दिल्ली के पेट्रोलियम कंपनियों के सूत्र बता रहे हैं या तो उसी दिन रात्रि को या उसी के आसपास एक-दो दिन में उपरोक्त कंपनियां जो भारत सरकार के उपक्रम है, डीजल और पेट्रोल की रेट में बढ़ोतरी कर देगी।
‘रिटेल चेन’ मार्टस् पहले ही सूचित कर रहे हैं
वर्तमान में आप डी मार्ट, शुभम, किशोर मार्ट या अन्य ऐसी छोटी-छोटी जो मार्ट है वहां उनका स्पष्ट कहना है कि आज जो समान है वह पुराने मूल्य पर और पुराने एमआरपी पर हम आज आपको दे रहे हैं।
हमने जिन सामग्रियों का आर्डर दिया है, लगभग सभी सामानों में एमआरपी रेट बढ़ाकर आ रहा है,
आने वाले समय में हम बढ़े हुए मूल्य और एमआरपी पर ही आपको सामान दे पाएंगे, इसका मतलब
स्पष्ट है कि देश में महंगाई तेजी से बढ़ाने वाली है चाहे खाने का तेल का मामला हो या अनाज हो सभी के मूल्य बढ़ाने वाले हैं।
मिट्टी तेल : पुनः बाजार में
इसका मतलब ?
वर्षों से बंद योजना पर सरकार ने एक संकेत दे दिया है, उसे पुनः चालू किया गया है, वह यह कि पेट्रोल पंप में ढाई हजार लीटर मिट्टी तेल आम जनता को वितरित करने के लिए कोटा फिक्स कर दिया गया है, इसका मतलब यह है कि मिट्टी तेल जो एक बार फिर गोदाम से पेट्रोल पंप में पहुंच चुका है, तो विचार और मंथन जनता को करना है कि आगे क्या स्थिति निर्मित हो सकती है।
घरेलू एलपीजी के ₹60 बढ़ चुके हैं, संभावना है कि अगर उपरोक्त तीनों राष्ट्रों के बीच टकराव की स्थिति बनी रही तो घरेलू एलपीजी में भी मूल्य में बढ़ोतरी हो सकती है और आगे चलकर अनुपलब्धता का संकट खड़ा हो सकता है।
स्टाॅक है : भारत सरकार
किन्तु सरकार पर विश्वास नहीं
ऐसा एक अनुमान लगाया जा रहा है, हालांकि भारत सरकार का स्पष्ट कहना है कि हमारे पास स्टॉक पर्याप्त मात्रा में है, घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। किन्तु भारतीय जनता पिछले कष्टप्रद अनुभवों के चलते सरकार पर विश्वास नहीं कर पा रही है, और विश्वास करने का कोई कारण भी नहीं है, क्योंकि नेताओं और अधिकारियों के बयानों में भिन्नताएं हैं।
सारी दुनिया आयेगी महंगाई के दायरे में
डोनाल्ड ट्रम्प, इस व्यक्ति के पागलपन में दुनिया सुख चैन खो बैठी है, ट्रम्प तो सत्ता परिवर्तन के साथ अपने व्यवसाय में व्यस्त हो जायेगा, लेकिन आने वाले कुछ वर्षों तक ऐसी स्थिति से, सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के अन्य राष्ट्र भी चपेट में आ जाएंगे और दुनिया को महंगाई की मार का सामना करना पड़ेगा।
विरोध अब सरकार का नहीं बल्कि महंगाई का…
संभ्रांत और शिक्षित भारतीयों का अनुरोध है कि अब महंगाई का विरोध करिए, केंद्र सरकार और राज्य सरकार का विरोध मत करिए। क्योंकि यह जो अंतरराष्ट्रीय समस्या पैदा हुई है, जिसे अन्य राष्ट्रों के साथ भारत को भी सामना करना है और संघर्ष हमें महंगाई से करना है सरकार का विरोध नहीं, क्योंकि पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य वृद्धि से मालभाड़े में वृद्धि सुनिश्चित है, परिणामस्वरूप महंगाई की मार सारी दुनिया को झेलनी ही पड़ेगी, देश की जनता को, संकट दिवस 29 अप्रैल का इंतजार है।