राॅयटर्स के अनुसार, अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच भारत और यूरोपियन यूनियन ने ऐतिहासिक व्यापार समझौते के लिए बातचीत पूरी कर ली है।
अमेरिका से त्रस्त दुनिया
इसकी घोषणा आज मंगलवार को की जाएगी, दक्षिण एशियाई देश के ट्रेड सेक्रेटरी ने सोमवार को यह बात कही। दोनों पक्षों ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताया है, क्योंकि यूरोपियन यूनियन, अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंधों का सामना कर रहे हैं।
27 देशों के साथ होगी डील
यह डील 27 यूरोपीय देशों के समूह और भारत के बीच सामानों के फ्री ट्रेड का रास्ता खोलती है, जो मिलकर दुनिया के कुल सकल घरेलू उत्पाद का एक चौथाई हिस्सा और 2 अरब उपभोक्ताओं का बाज़ार बनाते हैं।
भारतीय दृष्टिकोण
भारत के ट्रेड सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने कहा, “यह यूरोपियन यूनियन के साथ बेहतर इकोनॉमिक इंटीग्रेशन के लिए एक संतुलित एवं दूरदर्शी डील होगी। यह डील दोनों पक्षों के बीच ट्रेड और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देगी।” मार्च 2025 तक फाइनेंशियल ईयर में दोनों पक्षों के बीच ट्रेड 136.5 डॉलर बिलियन रहा।
ट्रेड डील्स की बाढ़
इस मामले की जानकारी रखने वाले एक भारतीय सरकारी अधिकारी ने बताया कि कानूनी जांच के बाद औपचारिक समझौता होगा, जिसमें पांच से छह महीने समय लगने की उम्मीद है, अधिकारी ने आगे उम्मीद जतायी कि यह डील एक साल के अंदर लागू हो जाएगी।
कुछ देशों से हो चुका है डील
यह समझौता यूरोपियन यूनियन द्वारा दक्षिण अमेरिकी ब्लॉक मर्कोसुर (दक्षिण अमेरिका का व्यापारिक और आर्थिक ब्लॉक) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ दिनों बाद हुआ है, पिछले साल इंडोनेशिया, मैक्सिको और स्विट्जरलैंड के साथ हुए समझौते हो चुके हैं। इसी अवधि के दौरान, नई दिल्ली ने ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ समझौतों को अंतिम रूप दिया।
ट्रम्प बना खलनायक
इन समझौतों की बाढ़, अमेरिका के खिलाफ बचाव के लिए वैश्विक प्रयासों को दिखाती है, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने का प्रयास और यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकियां बढ़ती जा रही है। इन सारे डील्स की बाढ़ इस बात पर ज़ोर देती है कि दुनिया भर में अमेरिका से बचाव के लिए कोशिशें हो रही हैं, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की कोशिश और यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकियां पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे गठबंधनों की परीक्षा ले रही हैं।
लगभग दो दशकों तक रुक-रुक कर चली बातचीत के बाद, इस डील से भारत अपना विशाल और सुरक्षित बाज़ार, जो दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार है, अपने सबसे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर यूरोपियन यूनियन के साथ फ्री ट्रेड के लिए खोलेगा।
पिछले साल फास्ट-ट्रैक बातचीत पर सहमति बनी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन के पिछले साल फास्ट-ट्रैक बातचीत पर सहमत होने के बाद भारत और यूरोपियन यूनियन ने डील को फाइनल करने की कोशिश की थी।
नौ साल के ब्रेक के बाद 2022 में फिर से शुरू हुई दोनों तरफ की बातचीत ने तब तेज़ी पकड़ी, जब ट्रंप ने कई ट्रेडिंग पार्टनर्स पर इंपोर्ट टैरिफ लगाया, जिसमें भारत से आने वाले सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ भी शामिल था, जब दोनों सरकारों के बीच बातचीत में गड़बड़ी के बाद पिछले साल भारत – अमेरिका ट्रेड डील टूट गई थी।
भारत कम करेगा टैरिफ
यूरोपियन यूनियन और भारत दोनों आखिरी समय में कारों और स्टील ट्रेड को लेकर मोलभाव कर रहे थे, जो विवाद के आखिरी मुद्दों में से थे। यूरोपियन यूनियन ने भारत से अपनी कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी में भारी कटौती की मांग की थी, जो 100 प्रतिशत से ज़्यादा हो सकती है, जबकि भारत स्वयं एक बड़ा स्टील प्रोड्यूसर है – यूरोपियन यूनियन अपने स्टील एक्सपोर्ट पर ट्रेड पाबंदियों को कम करने का दबाव डाल रहा था।
रॉयटर्स की रिपोर्टिंग के अनुसार भारत इस डील के तहत यूरोपियन यूनियन से इंपोर्ट की जाने वाली कारों पर टैरिफ को 110 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करने की योजना बना रहा था।
कृषि उत्पादों पर बात नहीं
बातचीत में कुछ कृषि और डेयरी उत्पादों को शामिल नहीं किया गया, क्योंकि नई दिल्ली लाखों छोटे किसानों की रक्षा करने की ज़रूरत पर ज़ोर देती है।