[ अजय कुमार ]
यहां हमारे विचार नहीं है, प्रदेश के 33 जिलों निष्ठावान भाजपा कार्यकर्ताओं की भावना है, जिसमें अधिकांश लोग वर्तमान में प्रदेश भाजपा के द्वारा चलाए जा रहे, पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण वर्ग, जो जिला से लेकर मंडल स्तर तक चल रहा है, उसमें उपस्थित होने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के विचार हैं और यह विचार कार्यक्रम स्थल से बाहर निकालने के बाद प्रकट किये जा रहे हैं।
21वीं-सदी.इन की सर्वे रिपोर्ट, अमित शाह को प्रेषित
- 67 पृष्ठों की जमीनी हकीकत
- भाजपा नेताओं के साथ ब्यूरोकेट्स के नामों का भी उल्लेख
- प्रदेश सरकार नाकाबिल
- ब्यूरोकेट्स सरकार पर हावी
- फील्ड के अधिकारी नहीं सुन रहे सांसद विधायक की बात
- मूल व निष्ठावान भाजपा कार्यकर्ता पार्टी से दूरी बना लिए
- दलबदलू और दलाल किस्म के व्यक्ति पद प्रतिष्ठा से सुशोभित
- राज्य सरकार उधार लेकर कर रही है भ्रष्टाचार
- विकास कार्य कागजों और मीडिया में : जमीन पर नदारद
प्रशिक्षण में व्यस्त-मस्त
एक ओर जहां जनता समस्याओं से जूझ रही है, और भाजपा नेता मंडल से लेकर जिला तक प्रशिक्षण वर्ग में मस्त हैं, यही एकमात्र दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यकर्ताओं को देवतुल्य कहते हैं, जिनकी मेहनत से मतदाताओं को मतदान केंद्र में ले जाकर कमल पर बटन दबाए हैं और तभी सरकार बनती है…
कार्यकर्ताओं की अलग उलझन
लेकिन कार्यकर्ता जनता का समस्या तो दूर, अपनी स्वयं के उलझनों को सुलझा नहीं पा रहे हैं, जिलों और मंडलों में प्रशासन हावी हो चुका है, यहां तक की कटु सत्य यह भी है कि विधायक और सांसद की बात भी प्रशासन नहीं सुन रही हैं, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का आमजन से स्पष्ट कहना है कि रायपुर जाकर मंत्री और मुख्यमंत्री से शिकायत करें…
ताकतवर ब्यूरोकेट्स हावी
जमीनी ब्यूरोक्रेट्स सीधे, मंत्रालय में पदस्थ ताकतवर अधिकारियों के संपर्क में है, जहां से उन्हें संरक्षण मिल रहा हैं और राजधानी में संरक्षण देने वाले प्रभावशाली अधिकारी का कहना है कि हम बैठे हैं चिंता मत करो। भाजपा संगठन अधिकांश विधायकों की टिकट 2028 में काट दी जायेगी, ऐसा मंथन भी चल रहा है…
असली भाजपाई चेहरा नदारद
बस्तर और सरगुजा संभाग में स्थिति यह निर्मित हो चुकी है कि ब्यूरोक्रेट्स मंत्रियों की बात भी नहीं सुन रहे हैं, बस्तर का अंतिम जिला सुकमा, इसका जीता जागता उदाहरण है, वहां तो भ्रष्टाचार पूरे वातावरण में आच्छादित है और विकास शून्य है, सिर्फ समाचार पत्रों और विज्ञापन में विकास कर रहा है, बात-बात पर सड़क पर चक्का जाम करने वाले नेता और वे सारे चेहरे नदारत हैं जनता उन्हें खोज रही है…
गृह मंत्रालय को रिपोर्ट मिल चुकी
केन्द्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक सरकारी खुफिया एजेंसी और 21वी-सदी की सर्वे रिपोर्टिंग, 93-94 प्रतिशत एक समान है….
छत्तीसगढ़ सरकार का 2 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद इंटेलिजेंट ब्यूरो नई दिल्ली ने छत्तीसगढ़ के 90 विधानसभा क्षेत्रों की जनता की भावनाओं औए सरकार के कार्यों का सर्वे किया, तत्पश्चात जो रिपोर्ट नई दिल्ली प्रेषित की गयी, उससे दिल्ली भाजपा भी चिंतित है, लेकिन चूंकि पांच राज्यों में चुनाव है और खासकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जिन्हें इंटेलिजेंट ब्यूरो के डायरेक्टर सीधे रिपोर्टिंग करते हैं, उन्हें अपनी रिपोर्ट सौंप चुके हैं। रिपोर्ट नोटिंग में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बस्तर और सरगुजा संभाग में भाजपा की स्थिति उपस्थिति कमजोर हो चुकी है और मैदानी इलाके में भी संतोषजनक स्थिति नहीं है….
दो प्रजाति : जिन्हें मालूम होता है कि चुनाव में किसकी सरकार बनेगी
सरकार रहेगी या जाएगी, सबसे पहले दो प्रकार के प्रजाति के लोगों को इसकी जानकारी और संकेत मिलते हैं, उनके व्यवहार से जनता यह समझने लगती है कि सरकार रहेगी या नहीं रहेगी। पहली प्रजाति जमीन पर मेहनत करने वाले नेतागण है और दूसरी प्रजाति ब्यूरोक्रेट्स, कारपोरेट जगत, उद्योगपति होते हैं छत्तीसगढ़ में उनके भी रुझान भी सरकार के लिए संतोषजनक नहीं है।
मंत्रालय, पुलिस मुख्यालय, अरण्य भवन में भी गुटबाजी चरम सीमा पर पहुंच चुकी हैं, भाजपा की सरकार आने के बाद भी कांग्रेस सरकार में आतंक मचाने वाले अधिकारी को आखिर संरक्षण कौन रहा है और वह पद प्रतिष्ठा पाकर लाभान्वित एवं सुरक्षित कैसे हैं ? इस बात की गंभीरता और बारीकी से अध्ययन किया गया, खासकर वे अधिकारी जिनका ईमान जिंदा है, उन्हें प्रताड़ना का शिकार, पावरफुल अधिकारियों द्वारा बनाया जा रहा है और उनपर नजर भी रखी जा रही है।
विपक्ष को कैसे मालूम होता है
कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पीसीसी के अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष को सरकार की आंतरिक जानकारी कैसे प्राप्त हो रही है, छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन व सरकार को इस पर भी मंथन करना चाहिए कि उनके बीच जयचंद कौन है और हरीराम नाई कौन है ?
भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता पूरे प्रदेश में हताश-निराश और चिंतित हैं, क्योंकि इन्होंने ही जनसंघ के पौधे को वटवृक्ष बनाने में तन-मन-धन और समर्पण लगाया है, आज उन्हें पीड़ा हो रही है।
दलाल किस्म के लोगों की चर्चा पूरे प्रदेश में है, जो सरकार सहित निगम, मंडल, आयोग, प्राधिकरण और संगठन में स्थान बना चुके हैं जिन्होंने कभी जमीन पर संघर्ष किया ही नहीं। पुलिस के डंडे खाये नहीं, वह तो सिर्फ सरकार के दामाद बनकर आ गए और मलाई खाने लगे। इस पर भी गंभीरता से केन्द्रीय नेतृत्व को विचार करना चाहिए और उनकी छंटनी कर, पांच राज्यों के चुनाव के बाद बाहर फेंकना होगा।
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद दिखेगा रंग और ढंग
केंद्रीय भाजपा कार्यालय नई दिल्ली और विशेष रूप से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बंगले में गंभीर मंथन प्रारंभिक रूप से शुरू हो चुका है और पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद जैसा कि सूत्र बता रहे हैं, छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन और सरकार में परिवर्तन होना लगभग सुनिश्चित है और होना भी चाहिए। जमीन स्तर पर संगठन की वस्तुस्थिति की जानकारी रखने वाले लोगों को महत्वपूर्ण स्थान मिलना चाहिए, भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं की तमन्ना है।