दोनों सदनों में भाषण-भाषण चलता रहा : किन्तु समाधान अस्पष्ट…

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[ बालमुकुंद शर्मा ]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा संसद के दोनों सदनो में दिए गए भाषण में वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों की तुलना कोरोना काल से की। मोदी के इस भाषण ने करोड़ों भारतीयों की नींद उड़ा दी है, कि क्या दुनिया में हालात आपदा की ओर बढ़ हैं।

प्रधानमंत्री ने 23 और 24 मार्च 2026 को लोकसभा और राज्यसभा में पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध संकट पर भाषण दिया, जिसे “चिंताजनक” और “गंभीर” बताया गया है। उनके इस संबोधन ने नागरिकों के बीच हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि उन्होंने वर्तमान वैश्विक स्थिति की तुलना कोविड-19 महामारी के समय से की है।
उर्जा संकट पर बोले प्रधानमंत्री
पीएम मोदी ने ईरान-अमेरिका/इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चेतावनी दी कि इसके वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर और लंबे समय तक चलने वाले प्रभाव हो सकते हैं।

उन्होंने देशवासियों को सलाह दी कि जैसे भारत ने कोरोना महामारी के दौरान धैर्य और एकजुटता दिखाई थी, वैसे ही अब फिर से लंबी चुनौतियों के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
लॉकडाउन की अफवाहें
पीएम द्वारा महामारी का जिक्र करने के बाद सोशल मीडिया पर “लॉकडाउन” जैसे शब्दों की सर्च में भारी बढ़ोतरी देखी गई और जनता में घबराहट का माहौल बना।

भारत अपनी जरूरत का .60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे देश के कई हिस्सों में गैस सिलेंडर की किल्लत और कीमतों में वृद्धि की आशंका जताई गई है।
जमाखोरी कालाबाजारी पर नजर रखेंगी राज्य सरकारें
सरकार ने राज्यों को जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं ताकि आम जनता को और अधिक परेशानी न हो।

युद्ध के आर्थिक प्रभाव को कम करने और ईंधन, उर्वरक व अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 7 उच्च-स्तरीय समूहों का गठन किया गया है।
रिजर्व ईधन व उर्जा श्रोतों की जानकारी दिये
पीएम ने आश्वासन दिया कि भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व है और भारत अब 27 के बजाय 41 देशों से तेल आयात कर रहा है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।
युद्धग्रस्त देशों से भारतीयों की वापसी का ब्यौरा दिया
खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
शांति और एकजुटता की अपील
हालात चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन सरकार इसे “आपदा” में बदलने से रोकने के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर काम कर रही है। पीएम मोदी ने नागरिकों से घबराने के बजाय “सतर्क और एकजुट” रहने की अपील की है।

वर्तमान स्थिति तो पेट्रोल डीजल गैस और आर्थिक का मामला प्रतीत होता है, दोनों परिस्थितियों में फर्क है आखिर देश की 147 करोड़ जनता को मानसिक रूप से कैसे तैयार रहना चाहिए, प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए था।
सर्वदलीय बैठक में स्पष्ट जवाब नहीं
कल 25 मार्च 2026 को संध्या 4 बजे को सर्वदलीय बैठक आमंत्रित की गई थी उसमें कांग्रेस सांसद तारीक अनवर और आप के सांसद संजय सिंह ने कुछ विषय उठाए, जिसका जवाब अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय रक्षा मंत्री ने संतोषजनक नहीं दिया इस पर सर्वदली बैठक में उपस्थित विपक्ष के नेताओं ने विरोध भी दर्ज करवाया और उनकी मांग थी कि जैसा कि सरकार बता रही है कि देश में गंभीर स्थिति निर्मित हो सकती है वह कितने महीने के लिए होगी सरकार स्पष्ट नहीं कर रही है और कौन-कौन सी परेशानी से जनता को सामना करना पड़ेगा उसकी भी जानकारी नहीं दे रही है यह गलत है।

विपक्षी दलों ने कहा कि सरकार को चाहिए कि लोकसभा में नियम 129 और राज्यसभा में नियम 176 के तहत विस्तार से चर्चा करवानी चाहिए जिस पर सरकार ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया बैठक समाप्त हो गई बैठक 45 मिनट तक चली।
सवालों पर सवालिया प्रश्न चिन्ह बरकरार
सवाल यह है कि ईरान से आने वाला ईंधन और गैस और पेट्रोल और डीजल जैसा कि केंद्र सरकार ने बताया कि तीन जहाज पहुंच चुके हैं लेकिन उसमें कितनी मात्रा में गैस है और वह कितने दिन देश में चल पाएगी देश के पास गैस का कितना स्टॉक है उसे सरकार को स्पष्ट करना चाहिए, जबकि सरकार का दूसरी ओर कहना है कि हमारे तेल जहाज अभी भी फंसे हुए हैं।
देश को प्रतिदिन कितना ईंधन/उर्जा चाहिए ?
देश में पेट्रोल डीजल और गैस की प्रतिदिन की खपत प्रति महीने कितनी खपत है? आज हमारे पास स्टॉक कितना है जिसे नियमित रूप से सप्लाई होता रहे! सरकार को स्पष्ट करना चाहिए था।

मोदी ने दोनों सदनों में बताया कि पहले भारत डीजल पेट्रोल और गैस 27 देश से खरीदते थे अब 41 देशों से खरीदना प्रारंभ कर दिया है।
भावी संकट पर मास्टर प्लान नहीं
देश में किस-किस मामले में आर्थिक परेशानियों का सामना जनता को करना पड़ेगा, इसका भी एक मास्टर प्लान केंद्र सरकार को लोकसभा और राज्यसभा के पटल पर रखना चाहिए, जिससे देश को जानकारी हो सके।

केंद्र सरकार ने गैस सिलेंडर की बुकिंग 35 एवं 45 दिन कर दिया है और 14 किलो गैस सिलेंडर की जगह 10 किलो गैस में सिलेंडर रहेगा, यह भी घोषणा कर दी है तो आने वाले समय में देश की जनता को गंभीर रूप से गैस सिलेंडर का भी सामना करना पड़ेगा, ऐसा स्पष्ट प्रतीत होता है।

केन्द्र सरकार जब स्पष्ट करेगी, तो जनता भी मानसिक रूप से तैयार रहेगी, वैसे भी देश की जनता, पहले नोटबंदी, जीएसटी और कोविड-19 काल में ढेरों परेशानियां झेल चुकी है, सामाजिक और आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक इन सब परेशानियों का कारण सरकार के अलोकतांत्रिक निर्णयों के फलस्वरूप हुआ।


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