[ बालमुकुंद शर्मा ]
आज 31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य में आधिकारिक रुप से नक्सल उन्मूलन हो गया, वैसे तो नक्सल समस्या सरगुजा संभाग में भी थी, लेकिन सबसे पहले इस संभाग में नक्सली नियंत्रित कर लिये गये ।
1967 में शुरू होकर 2026 तक…
आज के छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग, राज्य विभाजन से पहले मध्य प्रदेश में में एक जिला था, यहां 1967 में लाल आतंक या नक्सली समस्या की शुरुआत हुई थी। बताया जाता है कि 1967 में अब के बस्तर संभाग के कांकेर जिले में पखांजूर क्षेत्र से नक्सलियों का प्रवेश हुआ था, धीरे-धीरे दक्षिण बस्तर में अपना प्रभाव बढ़ाते हुये, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा जिलों में ऐसी-ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया गया, जिससे बस्तर संभाग हिल उठा और यह नेशनल प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सुर्खियों में बनी रही।
जब नक्सली वारदातें मीडिया में हेडलाइन्स बनती रही
जब नक्सली वारदातें मीडिया में हेडलाइन्स बने, तब देश को पता चला कि छत्तीसगढ़ ( तब का मध्य प्रदेश ) के बस्तर संभाग में लाल आतंक पूरी ताकत के साथ प्रवेश हो चुका है।
इसे समाप्त करने के लिए अविभाजित मध्य प्रदेश की सरकार और 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद अपने-अपने स्तर पर राज्य सरकारें करने लगी।
केन्द्रीय गृहमंत्री की इच्छाशक्ति…
लेकिन यदि सच कहा जाए तो नक्सल उन्मूलन के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की इच्छा शक्ति दिखाई दिया, जिन्होंने छत्तीसगढ़, उड़ीसा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, झारखंड और आंध्र प्रदेश के खासकर मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों से कई दौर बैठकें की और गंभीर जमीनी हकीकत की चर्चा करने के बाद एक समय सीमा तय की और इच्छा व्यक्त करते हुये कहा कि देश के सर पर लाल आतंक का जो कलंक लगा हुआ है, उसे हर हालातों में 31 मार्च 2026 तक समाप्त करना है।
गृहमंत्री के आव्हान पर सभी राज्य सरकारें और खास कर उस राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, गृह सचिव के साथ-साथ, सेंट्रल इंटेलीजेंस ब्यूरो और सेंट्रल फोर्स को विश्वास में लेकर अपने कदम आगे बढ़ाये, सभी राज्य सरकारों में अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति को पूरा करने के लिए और देश में लगे कलंक को समाप्त करने के लिए जमीनी स्तर पर अपना काम प्रारंभ किया।
आज वह दिन आ भी गया, जिसका सभी राज्यों की जनता और खासकर बस्तर संभाग की जनता बेसब्री से इंतजार कर रहे थे कि अब बस्तर का विकास राज्य और केंद्र सरकार के माध्यम से होने जा रहा है।
31 मार्च 2026 का स्वागत है…
नक्सल उन्मूलन के शुभ समाचार को पूरे तथ्यों और प्रमाण के साथ कल 30 मार्च 2026 को अमित शाह ने संसद के भीतर अपने भाषण में विस्तार से बताया और कहा कि सभी राज्यों के साथ छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में अब लाल आतंक समाप्त हो चुका है, लोकसभा में सभी सदस्यों ने इसका स्वागत किया।

आज नक्सल उन्मूलन के लिए निर्धारित समय सीमा की अंतिम दिन है, आज 31 मार्च को पूरा बस्तर संभाग और छत्तीसगढ़ सौभाग्य का दिन मान रही है और अब मैदानी इलाकों के चुनावी राजनीति में कांग्रेस और भाजपा अपने-अपने विचार जरूर रखते रहे, लेकिन बस्तर के आदिवासी और बस्तरवासी की भावनाओं और उनके जल जंगल जमीन और खनिज व कोयला जो विकास के रास्ते खोलेंगे।
विकास की चुनौतियां…
छत्तीसगढ़वासी दिल खोलकर एक साथ मैदान में आए और सरकार को सहयोग करें एवं बस्तर संभाग विकास की नई सीढ़ियां चढ़ना प्रारंभ करें, बस्तरवासियों से लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती होगी कि बस्तर संभाग के 7 जिलों और 32 विकासखंडों के आदिवासियों के हित में और उन्हें विश्वास में लेकर विकास की योजनाएं बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में बैठकर सरकार को करनी चाहिए और जमीन पर क्रियान्वित होते हुए भी दिखना चाहिए। यह नया रायपुर के मंत्रालय में बैठकर संभव नहीं है।
अब भ्रष्टाचार को नमस्कार कहें, विकास का चमत्कार करें
लेकिन राज्य सरकार और केंद्र सरकार का सैकड़ो करोड़ रुपए का बजट, जो पहले विकास के नाम पर बस्तर संभाग में दिया गया, वह तो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है, लेकिन अब 31 मार्च 2026 के बाद बदली परिस्थितियों में नई रणनीति और विकास की योजनाओं को जमीन पर लागू करने के लिए, नये वित्तीय वर्ष जो कल 01 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होगी, वह राशि भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए।
ईमानदार व कर्मठ अधिकारियों की पदस्थापना हो
राज्य सरकार को भी चाहिए कि नया रायपुर के मंत्रालय में ऐसे कर्मठ अधिकारियों को चिन्हित करें, जिनका भ्रष्टाचार से दूर-दूर तक कोई संबंध ना हो, ऐसे अधिकारियों को विकासखंड से लेकर जिला तक उनकी नियुक्ति करें और सरकार की इच्छाशक्ति के अनुसार बस्तर संभाग के सर्वांगीण विकास की गाथा लिखने में सफल हो सकें।
जनप्रतिनिधी ध्यान लगायें…
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के पंचायत से लेकर विधानसभा होते हुए संसद तक का प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतिनिधि भी इस पर बारीकी से नजर रखें और ऐसे भ्रष्टाचारियों को बिल्कुल संरक्षण ना दें। क्योंकि उन्हें वही मतदाता वोट देते हैं जो उनके समाज के हैं और उनके मतदान से और वोट से वह राजधानी रायपुर और नई दिल्ली पहुंचते हैं, उनकी भी सबसे बड़ी जवाबदारी है कि अपने परिवार के सदस्यों के लिए जो विकास की सैकड़ो करोड़ों रुपए आयेगी, वह भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ें।
एक बार फिर छत्तीसगढ़ के वर्तमान भाजपा की राज्य सरकार और केंद्र की एनडीए की सरकार और खासकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इसके लिए बधाई के पात्र हैं कि उनकी इच्छा शक्ति ने बस्तर संभाग को लाल आतंक से मुक्ति दिलाई।
जनसाधारण के हिमायती रहें : पुन: नयी क़यामत ना हो
भविष्य में ऐसा कोई कार्य बस्तर संभाग में नहीं होना चाहिए, जिससे आदिवासियों में आक्रोश भड़के और लाल आतंक को वापस जमीन पर मजबूत करने का मौका मिले।
इस बात को विशेष रूप से राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बू्रोक्रेट्स और निर्वाचित जनप्रतिनिधि को सामंजस्य बनाकर, बस्तर संभाग जो वास्तव में छत्तीसगढ़ का मूल निवासियों का स्थान है उनके सर्वांगीण विकास हो सके। अब सभी उस समय का इंतजार कर रहे हैं, आशा है इसमें निराशा हाथ नहीं लगेगी।