आबकारी राजस्व = शराब दुकान + चखना सेन्टर

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[ अजय कुमार ]

जब हम सरकारी राजस्व के मुख्य हिस्सेदार हैं, तो…

छत्तीसगढ़ में शराबीजनों का एक प्रश्न है, जिसका जवाब ना तो आबकारी विभाग के पास और ना ही पुलिस प्रशासन और माननीय न्यायालय के पास है!

शराबीजन पूछ रहे हैं कि राज्य सरकार शराब दुकानों के आसपास चखना सेन्टर खोल रखी है, जहां से शराब सेवन के बाद घर वापस जाते समय पुलिस मोटर वाहन एक्ट के तहत कार्यवाही क्यों करती है।

रायपुर :

छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह की सरकार ने 2017 में छत्तीसगढ़ आबकारी (संशोधन) अध्यादेश के माध्यम से सरकारी दुकानों (कॉर्पोरेशन) के जरिए स्वयं शराब बेचने का नियम बनाया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईवे के पास शराब दुकानों पर रोक लगाने के बाद 31 मार्च 2017 के बाद निजी ठेकों को हटाकर सरकारी नियंत्रण में बिक्री शुरू की गई थी, अब यह नियम लागू नहीं है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने आबकारी नीति के अंतर्गत देशी/विदेशी शराब दुकानों के अहातों (चखना सेंटर) में बिक्री और व्यवस्था के लिए समय-समय पर नियम संशोधित किए हैं, जो मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 के अंतर्गत आते हैं। इसके लिए नए नियम और दिशा-निर्देश अक्सर वार्षिक आबकारी नीति (जैसे छत्तीसगढ़ भांग नियम, 2021 या 2024-25 की नीति) के तहत जारी किए जाते हैं।
चखना सेन्टर भी आबकारी विभाग चलाती है


शराब दुकानों के अहातों का संचालन छत्तीसगढ़ स्टेट बेवरेज कॉर्पोरेशन और स्थानीय प्रशासन के नियमों के अधीन होता है।
हाल में ही नई आबकारी नीति के तहत अहातों में स्वच्छ पेयजल और अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, हालांकि इन नियमों का पालन राज्य में कहीं नहीं हो रहा है।

अहातों में डिस्पोजेबल ग्लास और पानी के पाऊच के उपयोग पर प्रतिबंध संबंधी नियम भी लागू हैं, लेकिन यही सामग्री मिलते हैं।
छत्तीसगढ़ में कितने शराब दुकान हैं
01 अप्रैल 2025 से लागू नई आबकारी नीति के तहत छत्तीसगढ़ में 67 नई शराब दुकानें खोली गई हैं, जिससे दुकानों की संख्या बढ़कर 741 हो गई है। ये दुकानें देसी और विदेशी दोनों तरह की शराब बेचती हैं और सरकार ने 2025-26 के लिए ₹12,500 करोड़ से अधिक के राजस्व का अनुमान लगाया है।

शराब की नई दुकान विभागीय उद्देश्यानुसार 30 किमी के दायरे में कोई दुकान न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँच बढ़ाना है।

अब शराब की बोतलों के साथ-साथ, 2026-27 (या जल्द ही) से प्रीमियम दुकानों का विस्तार किया जा रहा है
सरकारी आय का मुख्य श्रोत आबकारी विभाग
छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री राज्य सरकार के राजस्व का प्रमुख स्रोत है। 1 अप्रैल 2026 से नई आबकारी नीति के तहत शराब प्लास्टिक बोतलों में उपलब्ध होगी, जिसका उद्देश्य लागत कम करना है। और प्रीमियम ब्रांड सस्ते, जबकि बीयर व मिड-रेंज महंगी हो गई है। होली जैसे मौकों पर भारी बिक्री (128 करोड़ से अधिक : 03 मार्च 2026) देखी जाती है, जो राज्य में उच्च खपत को दर्शाती है।

कीमतों में बदलाव किया गया है प्रीमियम और विदेशी शराब की कीमतों में कमी आई है, जबकि देसी, बीयर और मिड-रेंज ब्रांडों पर टैक्स बढ़ाए गए हैं।
अध्ययनों के अनुसार, ग्रामीण महिलाएं शहरी महिलाओं की तुलना में शराब का सेवन अधिक करती हैं।
क्लब, ढाबों में शराब विक्रय
छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से नई आबकारी नीति लागू की है, जिसके तहत बार और क्लबों में शराब बिक्री को सुगम बनाने के लिए लाइसेंस फीस कम की गई है और नियम सरल किए गए हैं। नीति के अनुसार, अब सरकारी दुकानों में कांच की जगह प्लास्टिक बोतलों में शराब बेची जाएगी, साथ ही बियर व प्रीमियम ब्रांड की दरों में बदलाव किया गया है।

क्लब और बार का लाइसेंस आसानी से मिल सके, इसके लिए नियमों को सरल बनाया गया है और फीस में कटौती की गई है।
नवीनीकरण: बार/क्लब लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए जिला कलेक्टर की सिफारिश पर आबकारी आयुक्त द्वारा मंजूरी का प्रावधान है।
रेस्टोरेंट और बार के लिए शराब का स्टॉक उठाना अनिवार्य है कम बिक्री पर जुर्माना (विदेशी शराब पर ₹1140, बियर पर ₹160 तक) का प्रावधान है।
प्लास्टिक बोतलों में शराब
01 अप्रैल 2026 से शराब कांच के बजाय प्लास्टिक बोतलों में उपलब्ध कराई जा रही है ताकि परिवहन में टूट-फूट और नुकसान कम हो। नई नीति के तहत कुछ ब्रांड की कीमतें कम हुई हैं, जबकि बियर की कीमतों में हल्की वृद्धि (₹10-₹30) हुई है।
स्वास्थ्य विभाग का सर्वेक्षण
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 द्वारा, 2019 से 2021 के बीच सर्वे किया गया था, सर्वेक्षण में पाया गया कि 15 से 54 वर्ष की आयु के भारतीय जनसंख्या में 22.9% पुरुष और 0.7% महिलाएं शराब का सेवन करती हैं।
यह सर्वेक्षण पिछले एनेफेचेस-4 (2015-16) की तुलना में शराब के सेवन में गिरावट है, तब पुरुषों का प्रतिशत 29% था, जबकि महिलाओं के लिए, शराब के सेवन की दर एनएफएचएस-4 के समान ही रही है।
शराबियों की संख्या बढ़ी
भारत में शराब पीने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, करीब 18 करोड़ लोग देश में शराब का सेवन करते हैं, हर साल अरबों लीटर शराब की बिक्री इसी बढ़ती तादात का सबूत देती है।

अगर राज्य की बात करें तो छत्तीसगढ़ टॉप पर है, यहां लगभग 35.6% वयस्क आबादी शराब का सेवन करती है, यह आंकड़ा पूरे देश के औसत से कहीं ज्यादा है और यहां के सांस्कृतिक और सामाजिक परिवेश में शराब एक आम बात बन चुकी है। छत्तीसगढ़ के बाद अरुणाचल प्रदेश भी 50 प्रतिशत से अधिक पुरुष और 24 प्रतिशत महिला आबादी के साथ इस सूची में शीर्ष पर है।
शहरी शराबियों में कोलकाता प्रथम
2021 के एक विश्लेषण के मुताबिक कोलकाता में 32.9% लोग शराब पीते हैं यह शहर शराब की खपत के मामले में देश भर में सबसे आगे है, यहां की नाइटलाइफ से लेकर स्थानीय संस्कृति तक, शराब का चलन बहुत लोकप्रिय है।

शराब पीने के मामले में दिल्ली का नंबर दूसरा है यहां लगभग 31% वयस्क शराब का सेवन करते हैं, राजधानी की तेज-तर्रार जिंदगी, पार्टियों और सामाजिक आयोजनों में शराब आसानी से मिलती है। तीसरे शहर में चंडीगढ़ आता है जहां 29.1% लोग शराब पीते हैं। महाराष्ट्र के नासिक को ‘भारत की वाइन राजधानी’ कहा जाता है।
प्लास्टिक बोतल में शराब बिक्री और सेहत को नुकसान
छत्तीसगढ़ में 01 अप्रैल 2026 से सरकारी दुकानों पर कांच के बजाय प्लास्टिक (PET) बोतलों में शराब बिकेगी, जिसका उद्देश्य शराब की लागत कम करना और बिक्री आसान बनाना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ और स्वास्थ्य कार्यकर्ता इस फैसले का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि यह सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है, प्लास्टिक की बोतलों की शराब से लीवर, आंत और किडनी के साथ कैंसर जैसी बीमारियों को खुला आमंत्रण है और इसके कारण कांच उद्योग से जुड़े लोगों का रोजगार खतरे में पड़ सकता है।

सेहत के साथ पर्यावरण पर प्रभाव भी पड़ेगा, गर्म तापमान में रहने पर प्लास्टिक की बोतल से हानिकारक रसायन (जैसे एंटीमनी और थैलेट्स) शराब में घुलेंगे।
इन रसायनों से शरीर में हार्मोनल गड़बड़ी, कैंसर और लिवर डैमेज का खतरा बढ़ सकता है।

प्लास्टिक बोतलों में शराब जल्दी खराब हो सकती है और उसका स्वाद बदल सकता है, भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा बढ़ने से पर्यावरण पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
शराब पीकर गाड़ी चलाने का चालान


भारत में शराब पीकर वाहन चलाने पर मोटर वाहन अधिनियम, 2019 के तहत कड़ी सजा और भारी जुर्माना है। पहली बार पकड़े जाने पर ₹10,000 का जुर्माना या 6 महीने तक की जेल हो सकती है। दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹15,000 का जुर्माना या 2 साल तक की जेल हो सकती है। ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है और वाहन को जब्त किया जा सकता है।यदि नशे में दुर्घटना होती है, तो यह एक गंभीर आपराधिक मामला बन जाता है, जिसमें लंबी जेल हो सकती है।
कानूनी सीमा : यदि खून की जांच में प्रति 100 मिलीलीटर रक्त में अल्कोहल की मात्रा 30 मिलीग्राम से अधिक पाई जाती है, तो इसे कानूनन अपराध माना जाता है। पुलिस इस जांच के लिए ब्रीथ एनालाइज़र का उपयोग करती है।
शराब पीकर वाहन चलाना अपराध
भारत में शराब पीकर गाड़ी चलाना मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 185 के तहत एक दंडनीय अपराध है। धारा 202 के तहत बिना वारंट गिरफ्तारी और वाहन को जब्त किया जा सकता है।

एक अन्य कानूनी प्रावधान जिसमें आईपीसी धारा 510 के तहत नशे में सार्वजनिक स्थान पर दुर्व्यवहार करने पर दंड का प्रावधान है।
शराबियों के लिए बीमा कंपनियों के नियम


शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए दुर्घटना में मौत होने पर, बीमा नियम अत्यंत सख्त हैं। आमतौर पर, मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी, नशे में गाड़ी चलाने के कारण हुए नुकसान या मृत्यु को कवर नहीं करती है। हालांकि, टर्म लाइफ इंश्योरेंस में मौत के कारण पर निर्भर करता है, और थर्ड-पार्टी क्लेम में अदालत के फैसलों के आधार पर मुआवजा मिल सकता है।

यदि चालक के रक्त में अल्कोहल की मात्रा तय सीमा (0.03% या 30mg/100ml) से अधिक है, तो बीमा कंपनी पॉलिसी के ‘इन्फ्लुएंस ऑफ इनटॉक्सिकेंट’ क्लॉज के तहत क्लेम खारिज कर सकती है।

यदि शराब पीकर वाहन चलाने से दुर्घटना में किसी तीसरे व्यक्ति की मृत्यु हुई है, तो बीमा कंपनी मुआवजा दे सकती है, जिसे बाद में कंपनी मालिक से वसूल सकती है।

मालिक-चालक के लिए अनिवार्य व्यक्तिगत दुर्घटना कवर आमतौर पर नशे की हालत में हुई दुर्घटनाओं के लिए क्लेम को कवर नहीं करता है।


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