विश्वगुरु को कोई फोन नहीं करता

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नई दिल्ली :
नरेन्द्र मोदी को विश्वगुरु कौन कहता है, पिछले 12 सालों में लगभग 52 देशों की 59 यात्रायें कर चुके प्रधानसेवक के प्रधानमंत्रित्व काल में, अब भारत की हालत यह हो गई है कि भारत को कोई पूछ तक नहीं रहा है। नरेन्द्र मोदी की देश नीति के साथ-साथ विदेश नीति भी असफलताओं की गाथा चीख चीख कर बता रहा है कि देश असुरक्षित हाथों में है।
विदेश मंत्री को दूसरे देशों को फोन करना पड़ा
यूएस-इजराइल विरुद्ध ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने आस-पास के आधे दर्जन मुल्कों को फ़ोन किया और बिड़गते हालातों के साथ-साथ सहयोग वग़ैरह की बातचीत की। लेकिन भारत को फोन नहीं किया। विदेश मंत्री जयशंकर को ख़ुद फ़ोन करना पड़ा। ख़ुद ही उठे और दनादन कई देशों को फ़ोन घुमा दिया। कहां से कहां पहुंच गई है हमारे देश की विदेश नीति!
मोदी का विदेश दौरा और…
सत्ता में आने के बाद मोदी ने पहला विदेशी दौरा भूटान का किया था, तो लगा था कि एशिया पर ज्यादा ज़ोर देने वाले है। लेकिन कुछ ही साल बाद इतिहास में पहली बार भूटान ने भारत से कह दिया कि वह अपनी विदेश नीति ख़ुद तय करेगा। भूटान और नेपाल भी नहीं संभाल पाया, जोकि आज़ादी के बाद से अब तक भारत के न सिर्फ़ मज़बूत सहयोगी रहे हैं, बल्कि भारत से निर्देश पाकर नीतियां तय करते रहे हैं। दक्षिण एशिया में चारों तरफ़ भारत के सिर्फ़ पंगे ही पंगे हैं। पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण हर तरफ़ से भारत को टेढ़ी नजर से देखा जा रहा है।
तथाकथित फ्राॅड जेम्स बॉन्ड और चुनावी बकबकी
एक और फ़्रॉड है देशी जेम्स बॉन्ड। बातें पब्लिक डोमेन तक में आ गई थी कि ईरान पर हमला होने वाला है, लेकिन मोदी को किसी ने नहीं कहा कि इज़रायल मत जाओ। जेम्स बॉन्ड का यह सस्ता वर्ज़न सिर्फ़ बॉलीवुड से सांठ-गांठ कर अपनी छवि चमकाने के लिए फ़िल्में बनवाता है! मेडल लेकर और हीं-हीं-खीं-खीं करके मोदी लौट आते हैं और चुनावी सभा संबोधित करने तमिलनाडु और पुडुचेरी भाग गए। ठीक वैसे ही, जैसे पहलगाम के बाद बिहार भागे थे।
इरान का चारबहार और नाच-गाना
चारबहार में भारत के सहयोग के बने टर्मिनल के बग़ल में धमाका हुआ, लेकिन भारत कोई मज़बूत स्टैंड नहीं ले सका। एप्सटीन के कहने पर इज़रायल में नाचने-गाने का शुरू हुआ सिलसिला, 2026 में भी जारी रहा और नतीजा यह दिख रहा है कि पश्चिम एशिया से भारत लगभग अप्रासंगिक हो गया है। वैसे भी चाबहार के अलावा और कोई वॉल्यूम इसका है नहीं। ले-देकर जो भी संबंध है उनमें ईरान और इज़रायल के साथ ही सबसे ज़्यादा आपसी सहयोग है।
मूर्ख सलाहकार
सलाहकार ऐसे हैं कि युद्ध से ठीक पहले मोदी को इज़रायल भेज दिया। यही है विश्वगुरु, जिसको कोई फ़ोन तक नहीं करता।


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