[ अजय कुमार ]
प्रधानमंत्री मोदी अपने चुनावी रोड शो में अक्सर वाहन के फुटरेस्ट में खड़े हो जाते हैं। जो मोटर वाहन अधिनियमों के तहत गलत या अधिनियम का उलंघन माना जाता है, इन नियमों के तहत देश में कई राजनीतिज्ञों को अदालती कार्यवाहियों का सामना करना पड़ चुका है। जबकि प्रधानमंत्री को ऐसे कार्य करने चाहिए, जिससे वे जनता का आदर्श बन सकें।
लेकिन भारत में नियम तोड़ने के लिए ही बनाये जाते हैं, अदालतों में लंबित मामलों की संख्या उपरोक्त शब्दों को साबित करते हैं।
अधिनियम
मोटर वाहनों पर यात्रा करने या लटकने पर मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 228 (1) के तहत 3 महीने तक की कैद या 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक का जुर्माना (क्षेत्र के अनुसार) लगाया जा सकता है।
(इसी प्रकार ट्रेन में फुटबोर्ड पर खड़े होना या लटकना, रेलवे अधिनियम की धारा 156 के तहत निषेध है, पकड़े जाने पर 1,000 रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है।)
निर्वाचन आयोग की गलतियां
वर्षों पहले चुनाव आयोग ने की…

भारत में राष्ट्रीय प्रतीक चिन्हों का दुरुपयोग किया या फिर संवैधानिक अधिनियमों को अनदेखा कर, 1980 में भाजपा को कमल के फूल, चुनाव चिन्ह के रुप मान्यता दी थी, चूंकि कमल, राष्ट्रीय प्रतीक चिन्हों से एक है और राष्ट्रीय फूल का दर्जा प्राप्त है।
हाथी : राष्ट्रीय पशु
इसी प्रकार हाथी, राष्ट्रीय पशु के रूप में उल्लेखित है और साथ ही अशोक स्तंभ में अंकित, चार अन्य पशुओं शेर, हाथी, बैल और घोड़ा में से एक है।
इसे असम गण परिषद को चुनाव आयोग द्वारा ‘हाथी’ चुनाव चिन्ह उनके गठन के समय यानी 1985 में ही प्रदान किया गया था।
इसके अतिरिक्त बहुजन समाज पार्टी को ‘हाथी’ चुनाव चिन्ह औपचारिक रूप से 1990 के दशक की शुरुआत (विशेषकर 1993 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदान किया।
पैरों से रौंदे जाते हैं राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह
चूंकि ये सभी चुनाव चिन्ह कागजों और कपड़ों में छाप कर सड़कों में रौंदे जाते हैं और भारत के राजकीय प्रतीक (अनुचित उपयोग निषेध) अधिनियम, 2005, के तहत एक गंभीर अपराध है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर 2 साल तक की कैद, 5,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों की सजा हो सकती है।
अनुचित उपयोग निषेध अधिनियम, 2005 के तहत सरकारी संबंधों का झूठा आभास देने या व्यावसायिक लाभ या चुनावी फायदा के लिए प्रतीक के उपयोग पर 2 वर्ष तक की जेल और ₹5,000 जुर्माना है।
पहले प्रतीक अधिनियम, 1950 में अनुचित उपयोग के लिए जुर्माना ₹500 तक सीमित हो सकता है।
प्रस्तावित कानून पर मोदी सरकार दंड में वृद्धि (5 लाख तक जुर्माना) पर विचार कर रही है, क्योंकि वर्तमान जुर्माना बहुत कम है।
राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान, जैसे उन्हें नष्ट करना या गलत तरीके से प्रदर्शित करना, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के अंतर्गत भी दंडनीय है।