[ अजय कुमार ]
विस्तृत जाँच जिससे ‘ब्लैक मनी एक्ट’ के तहत कुल टैक्स माँग का एक-तिहाई हिस्सा वसूला गया
नई दिल्ली :
पनामा पेपर्स लीक का दसवाँ साल
यह वह ज़बरदस्त वैश्विक ऑफ़शोर जाँच (देश की सीमा से बाहर जांच) थी, जिसे ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ सहित 100 से ज़्यादा मीडिया संस्थानों ने प्रकाशित किया था।
प्रकाशित नामों में 110 प्रसिद्ध हस्तियां (20 भारतीय), 82 सरकारी अधिकारी, 48 गैर सरकारी, 30 मीडिया के पत्रकार, 146 व्यवसायी और 7 अपराधियों के नाम उजागर हुआ था।
हजारों करोड़ जमा करवाया गया
लोकसभा को हाल ही में बताया गया कि 2015 में ‘ब्लैक मनी और टैक्स लगाने वाला कानून’ लागू होने के बाद, पिछले साल 31 दिसंबर तक कुल 41,257 करोड़ रुपये के टैक्स और जुर्माने की मांग की गई थी, इसमें से 33 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा ‘पनामा पेपर्स’ जांच से जुड़ा था।
04 अप्रैल 2016 से शुरू हुई रिपोर्टों की एक शृंखला के रूप में प्रकाशित किया था, संसद को इस टैक्स वसूली के बारे में मीडिया ने जानकारी देने का मौका मिला था।
जांच प्रक्रिया में दुनिया भर के पत्रकार…
इस जाँच में दुनिया भर के 370 से ज़्यादा पत्रकारों ने ‘इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ़ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स’ के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने पनामा की लॉ फर्म ‘मोसैक फोन्सेका’ के 1.15 करोड़ गुप्त दस्तावेज़ों की जाँच की और अमीर क्लाइंट्स के लिए बनाई गई कई अपारदर्शी ऑफ़शोर शेल कंपनियों से पर्दा उठाया।
भारत में, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा प्रकाशित रिपोर्टों के बाद दायर किए गए 426 मामलों के चलते, बाद में 13,800 करोड़ रुपये की राशि पर “टैक्स का आकलन” किया गया। इसके परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन खुलासों की जाँच के लिए एक ‘विशेष जाँच दल’ (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया, इन्हीं खुलासों के चलते आइसलैंड और पाकिस्तान में सरकारों को सत्ता से हटना पड़ा था।
पैराडाइज़ पेपर्स और पैंडोरा पेपर्स

पनामा पेपर्स के प्रकाशन के बाद, जल्द ही पैराडाइज़ पेपर्स (2017) और पैंडोरा पेपर्स (2021) सामने आए, इन मामलों में भी ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने एक बार फिर आईसीआईजे और दुनिया भर के पत्रकारों के साथ मिलकर काम किया। इसी साल 23 मार्च को लोकसभा को यह जानकारी दी गई कि इन तीनों वैश्विक मीडिया जांचों में सामने आई, अघोषित विदेशी संपत्तियों की जानकारी के आधार पर, 14,636 करोड़ रुपये की राशि “कर के दायरे में” लाई गई है।
कार्पोरेट रिकॉर्ड खंगाले गये
पैराडाइज़ पेपर्स ने छिपी हुई ऑफ़शोर वित्तीय गतिविधियों की एक कड़ी का खुलासा किया है, इस बार यह जानकारी 1.34 करोड़ कॉर्पोरेट रिकॉर्ड्स के एक विशाल भंडार से सामने आई है, जो मुख्य रूप से बरमूडा की फर्म ‘एपलबी’, सिंगापुर स्थित ‘एशियासिटी ट्रस्ट’ और 19 अलग-अलग क्षेत्रों की सरकारों द्वारा रखे गए कॉर्पोरेट रजिस्टरों से प्राप्त हुई है।
पैंडोरा पेपर्स ने 14 वैश्विक कॉर्पोरेट सेवा फर्मों से लीक हुई 11.9 मिलियन फाइलों को ट्रैक किया, इन फर्मों ने दुनिया भर के क्लाइंट्स के लिए सिंगापुर, न्यूज़ीलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों और ऐसे टैक्स क्षेत्रों में, जहाँ टैक्स के नियम अस्पष्ट हैं, लगभग 29,000 बनी-बनाई कंपनियाँ और निजी ट्रस्ट बनाए थे।
सरकार ने मल्टी एजेंसी ग्रुप बनाया…
हर जाँच के प्रकाशित होने के बाद, सरकार ने जाँच की निगरानी के लिए एक मल्टी एजेंसी ग्रुप बनाने की घोषणा की।
तीन ऑफ़शोर मीडिया खुलासों के परिणामस्वरूप जमा किए गए काले धन से जुड़ा डेटा, लोकसभा में तब पेश किया गया, जब ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने 25 फरवरी को इन आंकड़ों पर पहली बार रिपोर्ट दी थी, उसके एक महीने से भी ज़्यादा समय बीत चुका था। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा सूचना के अधिकार के ज़रिए हासिल किए गए अन्य संबंधित आंकड़े भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। 2025 के आखिर तक ‘ब्लैक मनी एक्ट’ के तहत दायर की गई 167 अभियोजन शिकायतों में से 46 मामले ‘पनामा पेपर्स’ से जुड़े थे, जो कुल मामलों का एक-तिहाई से भी ज़्यादा है।
पनामा पेपर लीक क्या है…
पनामा पेपर लीक
2016 में पनामा की लॉ फर्म ‘मोसैक फोन्सेका’ (Mossack Fonseca) से लीक हुए 1.15 करोड़ गोपनीय दस्तावेजों का एक बड़ा संग्रह है। यह खुलासा दुनियाभर के रसूखदार लोगों, राजनेताओं और मशहूर हस्तियों द्वारा टैक्स बचाने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के इस्तेमाल को उजागर करता है।
यह डेटा 1977 से 2015 तक का है, जिसे एक जर्मन अखबार के माध्यम से लीक किया गया।
बड़ी हस्तियों के नाम शामिल
इसमें 12 से अधिक मौजूदा या पूर्व विश्व नेताओं और सैकड़ों मशहूर हस्तियों के नाम शामिल थे।
पनामा पेपर्स में बच्चन परिवार, अडानी के भाई और अन्य प्रमुख भारतीय हस्तियों के नाम सामने आए थे।
इस खुलासे के बाद आइसलैंड के पीएम को इस्तीफा देना पड़ा था और दुनिया भर में टैक्स चोरी के मामलों में भारी वसूली हुई।
मोसैक फोन्सेका पेपर्स
वित्तीय गोपनीयता घोटाला
यह इतिहास का सबसे बड़ा डेटा लीक माना जाता है, जिसमें अवैध रूप से टैक्स चोरी कर विदेशों में संपत्ति छिपाने के सबूत मिले थे।
पनामा पेपर्स में भारतीय सूची
प्रमुख हस्तियां
- रविंद्र किशोर सिन्हा बिहार के राज्यसभा सांसद और भाजपा से संबंधित हैं।
- अनुराग केजरीवाल लोक सत्ता पार्टी की दिल्ली शाखा के पूर्व अध्यक्ष
- विजय माल्या पूर्व राज्यसभा सांसद और शराब कारोबारी
- अनिल वासुदेव सालगावंकर गोवा विधानसभा के पूर्व सदस्य
सहयोगी - राजेंद्र पाटिल व्यवसायी और कर्नाटक के मंत्री शमनुरू शिवशंकरप्पा के दामाद
- जहांगीर सोली सोराबजे बॉम्बे अस्पताल में सलाहकार चिकित्सक और पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी के पुत्र।
- हरीश साल्वे पूर्व सॉलिसिटर जनरल और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दिग्गज राजनीतिज्ञ एनकेपी साल्वे के पुत्र
बॉलीवुड हस्तियां - अमिताभ बच्चन बॉलीवुड अभिनेता
- ऐश्वर्या राय बच्चन भारतीय अभिनेत्री
भारतीय व्यवसायी - शिशिर बाजोरिया एसके बाजोरिया समूह के भारतीय प्रमोटर
- मोहन लाल लोहिया श्री प्रकाश लोहिया के पिता, जो इंडोरामा कॉर्पोरेशन के संस्थापक और अध्यक्ष हैं।
- विनोद अदानी व्यवसायी और गौतम अडानी के बड़े भाई
- रतन चड्ढा मेक्स क्लोथिंग के संस्थापक
- अब्दुल राशिद मीर कॉटेज इंडस्ट्रीज एक्सपोजिशन लिमिटेड (सीआईई) के संस्थापक और सीईओ
- अबासाहेब गरवारे परिवार महाराष्ट्रीयन उद्योगपति
- ओंकार कंवर अपोलो टायर्स के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक
- मल्लिका श्रीनिवासन टीएएफई – ट्रैक्टर्स एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड के सीईओ और इंदिरा शिवसैलम
- केपी सिंह दिल्ली स्थित डीएलएफ के संस्थापक
- ज़ावरे पूनावाला रॉयल वेस्टर्न इंडिया टर्फ क्लब (आरडब्ल्यूआईटीसी) की प्रबंध समिति के प्रमुख, अरबपति साइरस एस. पूनावाला के भाई।
अपराधी - इकबाल मिर्ची भारत के सबसे वांछित अपराधी दाऊद इब्राहिम का दाहिना हाथ