[ अजय कुमार ]
चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी है। सूची के अनुसार, मतदाताओं की कुल संख्या 6 करोड़ 44 लाख 52 हजार 609 है। इसके अतिरिक्त, सूची में यह भी उल्लेख है कि 60 लाख 6 हजार 675 मतदाताओं के नाम विचाराधीन हैं।
चोरी छिपे भाजपा को मदद
तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर बीजेपी की चोरी छिपे मदद करने का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि बीजेपी अन्य राज्यों से वोटरों की पश्चिम बंगाल में घुसपैठ करा रही है। पार्टी का आरोप है कि सोमवार 30 मार्च को फॉर्म 6 के ज़रिए करीब 30 हज़ार फर्जी मतदाताओं को बंगाल का वोटर बनाया गया है।
विडियो साझा किया
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो साझा किए, जिन्हें पार्टी ने चुनावी धांधली के सबूत के रूप में पेश किया है। इन वीडियो में कथित तौर पर बड़ी संख्या में ‘फॉर्म-6’ (मतदाता सूची में नाम जोड़ने वाला फॉर्म) के ढेर दिखाए गए हैं, जिन्हें भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में जमा किया।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि बड़ी संख्या में फॉर्म 6 सीईओ दफ्तर के कर्मचारियों को सौंपा जा रहा है।
https://x.com/i/status/2038597174448247259

दिनदहाडे चुनाव चोरी : ममता बैनर्जी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी ने इन वीडियो को “दिनदहाड़े चुनावी चोरी” का प्रमाण बताया है। अभिषेक बनर्जी ने कहा, “जो हम देख रहे हैं, वह बेहद चिंताजनक है। यह बंगाल के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों में हस्तक्षेप की सुनियोजित कोशिश लगती है, जिसमें भाजपा केंद्र में है और चुनाव आयोग मूकदर्शक बना हुआ है।” इसके बाद अभिषेक बनर्जी ने पार्टी प्रतिनिधिमंडल के साथ कोलकाता स्थित सीईओ कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने इसे “जनादेश चोरी करने की साजिश” करार दिया।
सवालों का जवाब नहीं
टीएमसी काफी दिनों से चुनाव आयोग के सामने इस मामले को उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि आयोग ने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के जरिए बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए कई वास्तविक वोटरों के नाम हटा दिए। उसने तमाम सबूत भी चुनाव आयोग को सौंपे। लेकिन आयोग आंखें मूंदे बैठा रहा। इसलिए पार्टी ने अब वीडियो सबूत पेश करना शुरू कर दिया है।
चुनावी प्रक्रिया हैक्ड
अभिषेक बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, “पश्चिम बंगाल के जनादेश को चोरी करने की कोशिश दिनदहाड़े पकड़ी गई है। ठीक इसी तरह उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा में जीत हासिल की, दिल्ली के चुनावों को हाईजैक किया। अब वे बंगाल में भी यही करना चाहते हैं। लोगों को यह जानने का अधिकार है कि उनके वोटों के साथ क्या हो रहा है। यह छोटा मुद्दा नहीं है, बल्कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों के मूल सिद्धांत के खिलाफ है।”
गुपचुप नाम जोड़ा जा रहा है
कई जिलों से मिली विश्वसनीय रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि संदिग्ध तरीके से बड़ी संख्या में फॉर्म-6 आवेदन जमा किए जा रहे हैं। “ये सामान्य जोड़ नहीं हैं। गंभीर आशंका है कि इनमें से कई उन व्यक्तियों से जुड़े हो सकते हैं जिनका बंगाल से कोई वास्तविक संबंध नहीं है। वे यहां न रहते हैं, न काम करते हैं और न ही राज्य में उनकी कोई हिस्सेदारी है।”
वीडियो सबूत पेश करते हुए अभिषेक बनर्जी ने लिखा है- “यह वीडियो इन चिंताओं को और बढ़ाता है। इसमें हजारों ऐसे फॉर्मों को प्रोसेस होते दिखाया गया है, जिससे इस अभियान के पैमाने और मंशा पर वैध सवाल उठते हैं।”
बल्क में फार्म-6 जमा किये गये
अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन और मतदान तारीखों की घोषणा के बाद चुनाव आयोग नियम विरुद्ध मतदाता सूची में हेरफेर किया जा रहा है।
टीएमसी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बिना किसी वैधानिक प्रावधान या कानूनी आधार के हजारों फॉर्म-6 आवेदनों को बल्क में स्वीकार कर लिया। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर दिल्ली से “कंट्रोल” करने का आरोप लगाया।
बीजेपी आईटी सेल चीफ का खेल
टीएमसी ने आगे कहा, “बीजेपी का घृणित आईटी सेल चीफ अमित मालवीय यहां गंदा काम कर रहा है और चुनाव आयोग खुशी-खुशी साथ दे रहा है, बंगाल में निष्पक्ष चुनावों में सक्रिय रूप से धांधली कर रहा है। यह दिन के उजाले में चुनावी चोरी है, लेकिन बंगाल जागरूक है।” चुनाव आयोग के लिए टीएमसी ने ‘वैनिश कमीशन’ यानी गायब कमीशन शब्द इस्तेमाल किया।
बंगाल के सीईओ पर सवाल
अभिषेक बनर्जी ने सीईओ वेस्ट बंगाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि सीईओ कार्यालय में फॉर्म-6 जमा करने की कोई वैधता नहीं है। नियमों के अनुसार :
- फॉर्म-6 केवल मतदाता खुद ऑनलाइन /ऑफलाइन या ब्लॉक लेवल एजेंट (बीएलए) द्वारा अधिकतम 50 फॉर्म तक ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को जमा कर सकता है। सीईओ कार्यालय इसमें कहां फिट बैठता है?
- अपील ट्रिब्यूनल में जाती है, जहां कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायाधीश सुनवाई करता है, न कि सीईओ।
- अगर कोई नाम हटाया गया हो तो अपील के लिए मौजूदा इपिक नंबर का इस्तेमाल होता है, फॉर्म-6 क्यों?
उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 जमा करने की कहानी संदिग्ध है और इसमें गड़बड़ी की बू आ रही है।
जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश
यह आरोप 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले उठे हैं, जिसमें राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। टीएमसी का कहना है कि बीजेपी बंगाल की जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश कर रही है। टीएमसी के इन आरोपों पर 12 घंटे बाद भी चुनाव आयोग प्रतिक्रिया नहीं दे पाया है।