07032025
रायपुर :
वैसे तो रायपुर नगर निगम ही नहीं प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत की आर्थिक स्थिति जर्जर हो चुकी है, जैसे राज्य सरकार की मुफ्त में घोषणा की गई योजनाओं में राशि वितरण करने के कारण वित्तीय व्यवस्था बद से बदतर स्थिति में है। लेकिन…..?
राजधानी रायपुर नगर निगम के सभी जोन के अधिकारियों को महात्मा गांधी सदन अर्थात नगर निगम मुख्यालय से निर्देश जारी हुआ है कि हर हालत में प्रॉपर्टी टैक्स वसूला जाए।
राजस्व अधिकारियों का अत्या/भ्रष्टा-चार
लेकिन यह क्या इस पर किसी की नजर भी है कि प्रॉपर्टी टैक्स वसूली के नाम पर राजस्व अधिकारियों के द्वारा कितना अत्याचार और दुर्व्यवहार किया जा रहा है।
जिनके खाली प्लाट के मामले उच्च न्यायालय बिलासपुर में विचाराधीन है उनसे भी प्रॉपर्टी टैक्स देने के लिए दबाव डाला जा रहा है, जबकि सभी आवश्यक दस्तावेज जोन कार्यालयों में राजस्व अधिकारियों के पास लोगों ने जमा कर दिया है। फिर भी उनका दबाव है कि पैसा तो आपको पटाना पड़ेगा और ऊपर से एक बड़ी रकम ‘गांधी₹जी की’ आपको देना ही होगा, यह रकम ऊपर से नीचे तक वितरित की जाती है।
जाईये और कीजिये शिकायत
निकाय के राजस्व अधिकारियों का साफ-साफ कहना है कि आपको जहां शिकायत करना हो, करें। आपको महापौर, नगर निगम के सभापति, सभी जोन अध्यक्षों, पार्षदों या फिर आप नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव अथवा मंत्रालयीन अधिकारियों को भी शिकायत कर दीजिए। हमारा कुछ नहीं होने वाला, ‘गांधी₹जी’ तो लगेगा ही। निगमवासियों द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने के बाद अलग से यह हालत हो चुकी है रायपुर नगर निगम की…
काहे का ट्रिपल इंजन की सरकार
ऐसा कहा जाता है कि एक भिखारी, दूसरे भिखारी को मानवता और संवेदनशीलता के आचार व्यवहार में भीख दे देता है,
किन्तु…
क्या रायपुर नगर निगम में ट्रिपल इंजन की सरकार है, ऐसा जनसाधारण क्यों मानें और क्या भाजपा की ही प्रदेश सरकार का नियंत्रण नगरीय निकायों पर से, समाप्त हो चुका है या फिर निगरानी नहीं हो रही है, क्या भाजपा सरकार में प्रशासनिक क्षमता ही नहीं है, जनता में त्राहि त्राहि मची हुई है, कहीं कोई सुनने को तैयार नहीं…
बता दूं कि रायपुर शहर के चारों विधायक और लोकसभा सांसद भी भारतीय जनता पार्टी से ही हैं।
मोबाइल में नहीं : ऑफिस आकर बात करें
मोबाइल से राजस्व अधिकारी बात नहीं करना चाहते, उनका कहना है कि कार्यालय में आकर बात कीजिए और जब कार्यालय जाकर बात की जाती है तो खुलकर कहा जाता है कि इतना एक्स्ट्रा गांधी₹जी लगेगा…आप अगर शिकायत करेंगे, तो आपके पास प्रमाण क्या है कि हमने पैसा मांगा है।
आगे वह यह भी बोलते हैं कि आपकी सुनेगा कौन? आम जनता तो परेशान है लेकिन भाजपा के पुराने और सक्रिय नेताओं के साथ भी ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, इस सरकार को संज्ञान में लेना चाहिए। रायपुर नगर निगम के निर्वाचित महापौर, सभापति और पार्षदों को भी इसे संज्ञान में लेना चाहिए। 2028 के विधानसभा चुनाव को मात्र 33 महीने और बाकी है, गुजरे 27 महीनों में प्रदेश की जनता की आर्थिक और मन:स्तिथि क्षतिग्रस्त हो चुकी है।