[ अजय कुमार ]
स्वतंत्र भारत के मीडिया इतिहास में कल शुक्रवार की शाम, एक अत्यंत दुखद और काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई। दिल्ली के प्रतिष्ठित, 09 रफी मार्ग, स्थित समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) के परिसर को दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के भारी अमले ने बिना किसी पूर्व नोटिस के जबरन खाली करा लिया। दशकों से संचालित इस ऐतिहासिक संस्थान में हुई इस अचानक कार्रवाई से न केवल पूरा मीडिया जगत स्तब्ध है, बल्कि देश-दुनिया में एजेंसी की सेवाएं भी पूरी तरह ठप हो गई हैं।
गजब की दादागिरी
प्रत्यक्षदर्शियों और वहां मौजूद पत्रकारों के अनुसार, शुक्रवार देर शाम करीब 300 जवानों, उच्च अधिकारियों और कुछ वकीलों के साथ सरकारी दस्ता अचानक परिसर में दाखिल हुआ। उस समय न्यूजरूम में खबरों के प्रेषण का काम चरम पर था। अधिकारियों ने पत्रकारों और कर्मचारियों पर तुरंत सीटें छोड़ने का दबाव बनाया। जब प्रबंधन और पत्रकारों ने लिखित आदेश या बेदखली का नोटिस मांगा, तो अधिकारियों ने कथित तौर पर बल प्रयोग की धमकी दी।
शहरी विकास मंत्रालय का अजब निर्णय
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय ने शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जमीन आवंटन रद्द करने के फैसले को उचित ठहराया था, लेकिन इस आदेश की प्रति मिलने या प्रबंधन को संभलने का मौका दिए बिना ही यह कार्रवाई कर दी गई। आरोप है कि महिला कर्मचारियों सहित कई पत्रकारों को उनकी सीटों से जबरन घसीटकर और धक्का देकर बाहर निकाला गया।
पुलिस की घेराबंदी
पुलिस ने मुख्य गेट पर कब्जा कर लिया, जिससे फील्ड में गए पत्रकार अपना व्यक्तिगत सामान और मोबाइल तक वापस नहीं ले पाए। इस कार्रवाई से यूएनआई की अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू सेवाओं के 500 से अधिक ग्राहकों को खबरों का प्रेषण रुक गया है, जिससे सैकड़ों कर्मचारियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
जमीन पर उद्योगपति की नजर
अंदरूनी सूत्रों के अनुसार 09 रफी मार्ग पर स्थित यूएनआई के कार्यालय की जमीन पर एक उद्योगपति (कौन?… लिखने-बताने की जरुरत नहीं) की नजर है, उसी उद्योगपति की इच्छानुसार शहरी विकास मंत्रालय ने यूएनआई की जगह को खाली करने का आदेश पहले ही दे चुका था।