[ अजय कुमार ]
चुनावी दौर में एंबुलेंस और वीआईपी काफिले पर उठते सवाल
सांसद मनोज झा ने एक बयान देकर राजनीतिक माहौल में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में चुनाव होते हैं, वहां अक्सर यह देखने को मिलता है कि रास्ता डायवर्टेड होने के बावजूद भी एक नहीं बल्कि 2-2 एंबुलेंस प्रधानमंत्री के काफिले में प्रवेश कर जाती हैं। नरेंद्र मोदी के काफिले को एंबुलेंस के लिए रास्ता देने की घटनाएं अब बार-बार सामने आ रही हैं, एंबुलेंस को रास्ता देना अब बनावटी लगने लगा है,
भावनाओं से खिलवाड़
यह मुद्दा सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि आम जनता की भावनाओं और सिस्टम की पारदर्शिता से भी जुड़ा है। जहां एक ओर एंबुलेंस को रास्ता देना मानवीय संवेदनशीलता का प्रतीक है, वहीं बार-बार ऐसी घटनाओं पर सवाल उठना भी स्वाभाविक है।
क्या यह महज़ एक संयोग है
नवम्बर 2022 में हिमाचल प्रदेश में चुनाव के दौरान कांगड़ा के एक एम्बुलेंस ड्राइवर ने बताया था कि कुछ दिल्ली के अधिकारी, स्थानीय अधिकारियों के साथ उनसे मिले और निर्देश दिये कि कल प्रधानमंत्री का यहां रोड शो है, आपको एम्बुलेंस लेकर पीएम के काफिले को क्राॅस कर आगे निकलना है, उन्होंने मेरा मोबाइल नंबर लिये और किस समय कहां खड़े रहना है यह भी बताये। एम्बुलेंस ड्राइवर को एस्कार्टिंग वाहन में बैठे सुरक्षा अधिकारी निर्देशित कर रहे थे और सबकुछ प्लान के मुताबिक ही हुआ।
प्रोटोकॉल तोड़ना गलत, तो तुड़वाना भी गलत
प्रधानमंत्री के काफिले को हिमाचल प्रदेश में 2, बिहार में 3, महाराष्ट्र में 5, तेलंगाना में 2, मध्य प्रदेश में 3, उत्तर प्रदेश में 4 और वर्तमान में अबतक पश्चिम बंगाल में 2 बार एम्बुलेंस को पीएम काफिला से आगे निकलने की व्यवस्था की जा चुकी है।