भारत में लोकतंत्र या परलोकतंत्र या डरलोकतंत्र या छद्मलोकतंत्र

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[ अजय कुमार ]

  • भाजपा की झूठाधारित तंत्र ने वोट चोरी के बाद अब सीट चोरी भी करने लगा है…
  • लोकतंत्र चूल्हे में और झूठतंत्र का बोलबाला

मध्यप्रदेश में कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का कांग्रेस नेताओं ने विरोध किया है, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कल मंगलवार रात दिल्ली में चुनाव आयोग दफ्तर के सामने धरने पर बैठे रहे। इस दौरान सचिन पायलट, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश भी साथ मौजूद रहे।

समय दिया और ऑफिस बंद कर दिये
भूपेश बघेल ने बताया कि 5:30 बजे मध्यप्रदेश के रिटर्निंग ऑफिसर ने सुनवाई का समय दिया था। उसी समय ऑफिस बंद हो गया। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के निर्णय के खिलाफ हम आवेदन कहां देंगे।

भूपेश बघेल ने कहा कि शाम को जब हम भारत निर्वाचन आयोग पहुंचे तो यहां भी दफ्तर बंद हो चुका था, इसके बाद जब हम सब धरने पर बैठे, तब हमारा आवेदन क्लर्क ने लिया। हम आवेदन देंगे तब ही न्यायालय जाने का रास्ता खुलेगा।

झूठी शिकायत पर नामांकन रद्द किया
चुनाव आयोग के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार नामांकन रद्द किए जाने का कारण बताया गया है कि उन्होंने अपने हलफनामे में तेलंगाना के एक मामले की जानकारी छिपाई थी। लेकिन कांग्रेस ने इस दावे का खंडन किया है, मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी रद्द किए जाने के इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद विवेक तन्खा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, उन्होंने कहा, ‘अब वोट चोरी से नेक्स्ट लेवल पर सीट चोरी का सिलसिला शुरू हो गया है। मीनाक्षी जी का राज्य सभा का नामांकन निरस्त नहीं हुआ है। लोकतंत्र की हत्या हुई है। यह लोकतंत्र की हत्या के अलावा कुछ नहीं है।’

बीजेपी ने रद्द कराई उम्मीदवारी
बीजेपी नेताओं ने रिटर्निंग अधिकारी के पास औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी, बीजेपी का आरोप था कि मीनाक्षी नटराजन ने तेलंगाना के एक लंबित कोर्ट केस की जानकारी हलफनामे में नहीं दी। चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार को हलफनामे में सभी ज़रूरी जानकारियां देना अनिवार्य होता है। बीजेपी ने इसे गंभीर जानकारी छिपाने का मामला बताते हुए नामांकन रद्द करने की मांग की।

मीनाक्षी के खिलाफ कोई एफआईआर नहीं : कांग्रेस


कांग्रेस ने बीजेपी के आरोप को पूरी तरह खारिज किया है, पार्टी का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन पर कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं है, इसलिए उन्हें कुछ भी छिपाने की जरूरत नहीं थी। विवेक तन्खा ने कहा है कि ‘मीनाक्षी नटराजन जी के नॉमिनेशन के बारे में भ्रम फैलाया जा रहा है। कोई क्रिमिनल केस रजिस्टर्ड नहीं है। मात्र एक नोटिस आया है कि उनके और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ 10 करोड़ कंपनसेशन की कार्यवाही क्यों ना की जाए। इस नोटिस का मीनाक्षी जी के वकील ने जवाब दिया है, एफआईआर दर्ज नहीं है।’ कांग्रेस ने इस खंडन के साथ ही आरोप मढ़ दिया कि ‘अब वोट चोरी के बाद सीट चोरी शुरू’ हो गई है।

विधायक रवाना हुए तो आई उम्मीदवारी रद्द होने की ख़बर
नटराजन की उम्मीदवारी तब खारिज की गई है जब इससे पहले कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को कर्नाटक शिफ्ट कर दिया। इसका मक़सद था कि कोई क्रॉस वोटिंग न हो और पार्टी के विधायक एकजुट रहें। ऐसा इसलिए कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक हैं, लेकिन बीजेपी ने सीट जीतने की अपनी क्षमता से एक अधिक उम्मीदवार उतार दिया है।

विधायकों की क्या है संख्यात्मक स्थिति
मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं, लेकिन प्रभावी संख्या 229 है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 58 फर्स्ट प्रेफरेंस (पहली प्राथमिकता) वोट चाहिए। बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, इसलिए वह दो सीटें आसानी से जीत सकती है। बीजेपी ने दो उम्मीदवारों राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और राज्य इकाई के सचिव राजनेश अग्रवाल को पहले ही मैदान में उतार दिया था। लेकिन सोमवार को आखिरी दिन भाजपा ने चौंकाने वाले अंदाज में तीसरे उम्मीदवार के रूप में मध्य प्रदेश मत्स्य कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को भी नामांकन करा दिया। यह तीसरा उम्मीदवार भाजपा की तरफ से सरप्राइज था। पार्टी ने तीन दिन तक केंद्रीय नेतृत्व से बात करके यह फ़ैसला लिया।


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