भारत चीन सीमा विवाद

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[ अजय कुमार ]


भारत खारिज करता रहा… : चीन कब्जा करता रहा

नई दिल्ली :

कोरोना काल में चीन द्वारा भारतीय सीमाओं पर अतिक्रमण की खबरों के बाद, भले ही नरेन्द्र मोदी 19 जून 2020 कहा था कि न तो लद्दाख या अरुणाचल प्रदेश की सीमा में कोई घुसा है और न ही कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्ज़े में है। लेकिन प्रधानमंत्री के दावे खोखले साबित हुए।

अब भारत ने चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र के हिस्सों को ‘मनगढ़ंत नाम’ दिए जाने को खारिज कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए, जो संबंधों में नकारात्मकता लाते हैं और बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं।
भारत का फिर से… “खारिज”


भारत ने कल रविवार को एक बार फिर चीन की उन कोशिशों को खारिज कर दिया, जिनमें वह “भारत के क्षेत्र का हिस्सा रहे स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने” की कोशिश कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ऐसी कोशिशें
शरारतपूर्ण हैं और साथ ही यह भी जोड़ा कि ऐसे कदम द्विपक्षीय संबंधों में चल रही सामान्यीकरण की प्रक्रिया को बाधित करते हैं।
चीन का दावा झूठा : विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “झूठे दावे पेश करने और बेबुनियाद मनगढ़ंत बातें गढ़ने की चीन की ऐसी कोशिशें उस अकाट्य सच्चाई को नहीं बदल सकतीं कि ये स्थान और क्षेत्र, जिनमें अरुणाचल प्रदेश भी शामिल है, हमेशा से भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे।”
चीन निर्माण कर ही रहा है
पिछले साल भारत ने तब विरोध जताया था, जब चीन ने होटान (खोटान) प्रीफ़ेक्चर में हे’आन और हेकांग नाम की दो काउंटी बनाई थीं, भारत का कहना था कि इन इलाकों का कुछ हिस्सा भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में आता है। हे’आन में अक्साई चीन पठार का कुछ हिस्सा शामिल था, जो भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद की वजह से चर्चा में रहा है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, चीन ने अशांत शिनजियांग प्रांत में एक नई काउंटी बनाई है, जिसका नाम सेनलिंग है। सेनलिंग के बारे में घोषणा 26 मार्च को शिनजियांग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र की सरकार ने की थी, और फ़िलहाल इसके प्रशासनिक बँटवारे और ठीक-ठीक सीमाओं के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पीओके में भी चीनी नजर
सेनलिंग, काराकोरम पर्वतमाला के पास स्थित है, जो पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर और अफ़गानिस्तान के वखान कॉरिडोर के आस-पास के क्षेत्र में आता है। पीओके के इतने करीब सेनलिंग काउंटी बनाने का ज़ाहिरी मकसद शिनजियांग की सुरक्षा सुनिश्चित करना है; शिनजियांग इस समय उइघुर विद्रोह और ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट जैसे आतंकवादी समूहों से जूझ रहा है। यह क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर का शुरुआती बिंदु भी है, एक ऐसा प्रोजेक्ट जिसकी भारत ने आलोचना की है, क्योंकि यह पीओके पर भारत के संप्रभुता अधिकारों का उल्लंघन करता है।
राज्यपाल तो बता ही रहे हैं…
अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) के.टी. परनाइक ने दावा किया कि चीन भारत की सीमाओं पर एक लंबी अवधि की रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत वह सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर, दोहरे इस्तेमाल वाली बस्तियों और जगहों के नाम बदलकर ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल’ के पार के नैरेटिव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

राज्यपाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पूर्वोत्तर राज्य की संवेदनशील सीमा पर प्रतिरोध, स्थिरता और स्थायी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए, सुरक्षा, विकास, कूटनीति और सामुदायिक सशक्तिकरण को ‘पूरे राष्ट्र के दृष्टिकोण के ज़रिए एक साथ आगे बढ़ना होगा।


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