[ अजय कुमार ]
डीडी न्यूज़ के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने राहुल गांधी को सावरकर की चप्पल की धूल बताया
नई दिल्ली:
सार्वजनिक प्रसारक दूरदर्शन के चैनल डीडी न्यूज के एक एंकर के बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि एंकर अशोक श्रीवास्तव ने लाइव कार्यक्रम के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की।
राहुल गांधी सावरकर के पैरों के धूल बराबर भी नहीं…

link : https://x.com/i/status/2043402150546657456
सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप के मुताबिक, एंकर ने राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर की चप्पल के तलवे में चिपकी धूल बताते हुए विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। इस बयान को लेकर राजनीतिक और मीडिया हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
कड़ी आपत्तियां…
देश विदेश के तमाम पत्रकारों ने भी इस मुद्दे पर कड़ी टिप्पणी करते हुए सार्वजनिक प्रसारक की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। वहीं, सोशल मीडिया पर अशोक के इस बयान की आलोचना की और इसे करदाताओं के पैसे से चलने वाले संस्थान के लिए अनुचित बताया।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर सार्वजनिक प्रसारकों की निष्पक्षता, संपादकीय स्वतंत्रता और आचार संहिता को लेकर बहस छेड़ दी है।
शब्दों का नीचतापूर्वक उपयोग
सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप के मुताबिक, एंकर ने राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर की चप्पल के तलवे में चिपकी धूल बताते हुए विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। इस बयान को लेकर राजनीतिक और मीडिया हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
तमाम पत्रकारों ने भी इस मुद्दे पर कड़ी टिप्पणी करते हुए सार्वजनिक प्रसारक की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। वहीं, सोशल मीडिया पर अशोक के इस बयान की आलोचना की और इसे करदाताओं के पैसे से चलने वाले संस्थान के लिए अनुचित बताया।
निष्पक्षता पर बड़ा सवाल
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर सार्वजनिक प्रसारकों की निष्पक्षता, संपादकीय स्वतंत्रता और आचार संहिता को लेकर बहस छेड़ दी है।
जिस दूरदर्शन की सौम्य सरला माहेश्वरी जी को हाल ही में हमने अश्रुपूरित विदाई दी, उसका एंकर अपना ब्लड प्रेशर बढ़ाते हुए जोर-जोर से चिल्ला कर कह रहा है।
दूरदर्शन, देश के नागरिकों से उगाहे गये टैक्स से चलता है किसी दल, विचारधारा या अन्य स्त्रोत से नहीं।
संघी एंकर सजाये गये
इसमें इतने सुयोग्य संघी एंकरों को सजाया गया है कि रेडियो रवांडा भी शर्म से डूब मरा है। जब कोई अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी इस मामले को आंकलन करेगी, तो देशी सियारों का झुंड रोनाधोना करने लगेगा कि सोरोस के प्रभाव से उनके इतिहास पर पैबंद लगाया जा रहा है।