रायपुर :
- छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों के देशी शराब पीने के शौकीनों या आदतन प्रदेशवासियों में गंभीर नाराजगी है।
आबकारी विभाग का आयकारी नीति पर प्रश्नचिन्ह…?
आबकारी विभाग एवं बेवरेज कॉरपोरेशन छत्तीसगढ़ की लापरवाही के कारण आज 16 अप्रैल 2026 को, अबतक छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में, किसी भी शासकीय शराब दुकान में देशी शराब नहीं है, का जवाब शासकीय शराब दुकानों में मिल रही है।
दुकानों में तनाव…
देशी शराब के शौकिनों और शासकीय शराब दुकान के कर्मचारियों के बीच, प्रतिदिन तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो चुकी है और हो रही है, राज्य के कई स्थानों में पुलिस बुलानी पड़ रही है।
अब … दोष किस पर लगाया जाये…
विभाग के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार आबकारी विभाग के जिद्दी सचिव की मंशा के कारण कांच की बोतल के स्थान पर प्लास्टिक बोतल में देशी शराब खरीदने, का जो निर्णय लिया गया उसे देशी शराब बनाने वाले कंपनियों में भी गंभीर नाराजगी है। क्योंकि उन्होंने अभी तक प्लास्टिक बोतल बनाने का प्लांट लगाया ही नहीं है और इस कारण से शराब सप्लाई करने में असमर्थ हैं…
नुकसान राजस्व का…
अब एक विभागीय उच्चाधिकारी के जिद में,
छत्तीसगढ़ सरकार के आबकारी राजस्व में जबरदस्त गिरावट की संभावना बन गई है, छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस राजस्व बढ़ोतरी की परिकल्पना की थी, उसमें लगभग पलीता लग चुका है…
प्लास्टिक की बोतलों में शराब का वैसा ही नुकसान, जैसे…
प्लास्टिक की बोतलों में शराब में प्लास्टिक के अतिसूक्ष्म कण समय के अनुसार घुलता है, जिससे मानव शरीर में वही नुकसान होता है जो प्लास्टिक बोतल की पानी पीते हैं, यह सामान्य ज्ञान की बात है, विज्ञान के विद्यार्थी अधिकारी से अनीतिगत नोटशिटिंग नहीं होनी चाहिए।
पर्यावरणीय नुकसान ज्यादा
प्लास्टिक की बोतलों में शराब से सबसे अधिक नुकसान पर्यावरणीय नुकसान ज्यादा होता है, अब यदि आबकारी में पर्यावरणीय अनुभवों को शामिल करना ही बेहतर निर्णय साबित होंगे
बालमुकुंद शर्मा : कांकेर/ रायपुर