सरकारी हठ… टेंडर में लेनदेन हो चुका लेकिन… अब रेत ठेकेदार जाएं तो जाएं कहां… एनजीटी की क्लीयरेंस जरुरी

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रायपुर :
छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की लगभग 94 प्रतिशत रेत खदानों का ई-टेंडर करके बेच दिया है, लेकिन एक क्लीयरेंस का मामला फंस गया है, सरकार का कहना है कि यह काम जिन्होंने रेत खदानों का टेंडर भरा है, यह उनकी जिम्मेदारी है और वह जिम्मेदारी यह है कि एनजीटी ऑफिस (नया रायपुर) से ई-क्लीयरेंस लेकर आयें और यहां भी ऑनलाइन आवेदन होता है उसके बाद ही आप रेत खदान आप प्रारंभ कर सकते हैं…किन्तु ठेकेदारों का कहना है कि ई-टेंडर सरकार ने किया है वही क्लीयरेंस लाकर दे…
200 करोड़ की भेंट राशि लेकर, सरकार चुप…
सरकार का दो टूक जवाब कि ठेकेदारों को ही रेत उत्खनन के लिए एनजीटी से एनओसी लेना है, उसके बाद ही खदान प्रारंभ कर सकते हैं, इस तरह प्रदेश के रेत ठेकेदारों का सरकार के पास लगभग 200 करोड़ से ऊपर की भेंट राशि फंस चुकी है…
एनजीटी में 14 सदस्य हैं और यह बैठक महीने में एक बार होती है और इसमें ई-क्लीयरेंस के लिए आवेदन भी ऑनलाइन ही करना है, ई-क्लीयरेंस के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए ठेकेदार एनजीटी ऑफिस के चक्कर लगाकर परेशान है, ठेकेदारों का कहना है कि आवेदन कर दिया गया है, किन्तु बैठक कब होगी, इसका कोई संतोषप्रद जवाब एनजीटी ऑफिस से नहीं मिल रहा है और राज्य सरकार ने स्पष्ट रूप से हाथ खड़े कर दिए हैं…
मतलब अबतक सरकारी संरक्षण में ही अवैध उत्खनन हो रहा है
इससे स्पष्ट होता है कि जितनी भी रेत खदानें चल रही है, वह अवैध है और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं राज्य मार्गों में रात्रि में हजारों हाईवा/ट्रकें चल रही है, वह अवैध है, माना और समझा जाएगा…
बता दूं कि रेत और मूरम के साथ साथ, अन्य खनिजों का अवैध उत्खनन और परिवहन के हजारों मामले अब तक न्यायालयों और राजस्व न्यायालयों में लंबे समय से लंबित है, इन्हीं कारणों से खनिज माफियाओं के तेवर बुलंद हैं।


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