नई दिल्ली :
ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच युद्ध, एक भयानक मोड़ पर पहुंच गया है। युद्ध में अबतक हजारों लोगों की जान चली गई है, इसके बावजूद युद्ध विराम की संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है।
लड़ाई में भ्रामक खबरों की दौर
उधर युद्ध को लेकर भ्रामक खबरों का दौर शुरू हुआ हो गया है। उसी में से एक झूठी और निराधार खबर एक अमेरिकी चैनल में दिखाई गई कि ईरान पर हमले के लिए भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना कर रही है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी समाचार चैनल वन अमेरिका न्यूज (ओएएन) के इन दावों का खंडन किया है। मंत्रालय के आधिकारिक फैक्ट चेक हैंडल ने इन खबरों को ‘पूरी तरह से झूठा और निराधार’ बताया है।
फर्जी है खबर
मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि फर्जी खबरों से सावधान! अमेरिका स्थित चैनल ओएएन पर किए जा रहे ये दावे कि भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना कर रही है, पूरी तरह से झूठे और निराधार हैं। हम आपको ऐसे आधारहीन और मनगढ़ंत दावों से सावधान करते हैं।

अक्षांश देशांतर और समुद्री दूरी
4 मार्च 2026 को अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी ने श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास, गाले से लगभग 40 समुद्री मील दक्षिण में अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी युद्धपोत आइरिश डेना को टारपीडो से डुबो दिया। यह लोकेशन लगभग 5.5° N अक्षांश और 80.2° E देशांतर के आसपास है।
घटनास्थल जहां आइरिश डेना को नष्ट किया गया
श्रीलंका के गाले से 40 समुद्री मील दक्षिण (हिंद महासागर) दूरी और भारत के कन्याकुमारी से लगभग 200 समुद्री मील से भी आगे।
यह हमला उस समय हुआ जब ईरानी युद्धपोत भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित ‘एक्सरसाइज मिलन-2026’ में भाग लेने के बाद लौट रहा था।
इस हमले के परिणामस्वरूप 87 ईरानी नाविकों के मारे जाने की सूचना है। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की पहली घटना है जहां अमेरिकी पनडुब्बी ने सीधे किसी दुश्मन युद्धपोत को निशाना बनाया।