[ अजय कुमार ]
महिला आरक्षण बिल 2026 : केंद्र सरकार
केंद्र सरकार संसद के मौजूदा बजट सत्र में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने के लिए दो अहम विधेयक लाने की तैयारी में है, जिनमें एक संवैधानिक संशोधन भी शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार अगले लोकसभा चुनाव और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत सीटों पर आरक्षण दिया जाएगा। इस कदम को प्रधानमंत्री के महिला सशक्तिकरण एजेंडे की दिशा में बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पांच राज्यों में चुनावी प्रक्रिया जारी है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संसोधन
2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जो संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था, उसमें यह प्रावधान था कि यह नई जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा, अब सूत्रों का कहना है कि सरकार इस हफ्ते नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम बिल में संशोधन लेकर आएगी, यह संशोधन इसलिए लाया जा रहा है, जिससे 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिला आरक्षण लागू किया जा सके।
लोकसभा सीटें बढाकर 816 करने का प्रस्ताव
सरकार की योजना के तहत लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है, यानी करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी। इसमें जो अतिरिक्त 273 सीटें जुड़ेंगी, उन्हीं बढ़ी हुई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा, ताकि मौजूदा सांसदों की सीटें प्रभावित न हों। इसके साथ ही लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा भी बढ़कर 409 हो जाएगा।
पांच दशकों बाद आया प्रस्ताव
करीब 5 दशकों में पहली बार लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया है, हालांकि, इस बदलाव का असर राज्यसभा या राज्यों की विधान परिषदों पर नहीं पड़ेगा। सरकार इसके लिए परिसीमन और संविधान संशोधन से जुड़े दो अलग-अलग बिल लाने जा रही है, जिन्हें पारित करने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी।
अब 2011 की जनगणना के मुताबिक परिसीमन
सूत्रों के मुताबिक, सरकार अब 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने पर विचार कर रही है, ताकि महिलाओं का आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव तक लागू किया जा सके। नए जनगणना डेटा का इंतजार करने से प्रक्रिया में देरी हो सकती है। प्रस्ताव के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार और केरल जैसे राज्यों में सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होगी।
अजा-अजजा का समीकरण
अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी बढ़ेगी और उनमें भी महिलाओं को आरक्षण मिलेगा। हालांकि, इस विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को विपक्ष का समर्थन हासिल करना होगा, क्योंकि दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। विपक्षी दलों ने महिलाओं के आरक्षण के भीतर ओबीसी कोटा शामिल करने की मांग उठाई है, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।