[ अजय कुमार ]
नई दिल्ली :
ईरान युद्ध से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भारत सरकार ने ऑटो उद्योग से उत्पादन को अनुकूलित करने को कहा।
भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने और उनके निर्माण को बढ़ावा देने (फेम इंडिया योजना) की ओर कदम बढ़ाने, निर्देशित किया है।
सरकारी मेमो
एक सरकारी मेमो के अनुसार, भारत ने वाहन निर्माताओं और पार्ट्स सप्लायर्स से कहा है कि वे उत्पादन शेड्यूल को और सख्त करें, ताकि ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से तेल और गैस के आयात में आई रुकावट से पैदा होने वाले संभावित संकट के बीच ईंधन की बचत की जा सके।
एडवाईजरी जारी
25 मार्च की एडवाइज़री के मुताबिक, भारी उद्योग मंत्रालय ने कंपनियों से यह भी आग्रह किया है कि वे अपने फ़ैक्टरी ऑपरेशन्स को तेल-आधारित ईंधन से बिजली पर शिफ़्ट करें, और साथ ही, कमी और बढ़ती कीमतों को देखते हुए रिसायकल किए गए एल्युमीनियम या वैकल्पिक सामग्रियों का इस्तेमाल करें।
भारत के लिए, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस इंपोर्टर्स में से एक है, यह एडवाइज़री इस बात पर ज़ोर देती है कि सरकार को इस संघर्ष और इसकी वजह से एनर्जी के बहाव, सप्लाई चेन और कच्चे माल की उपलब्धता में आ रही रुकावटों को लेकर कितनी ज़्यादा चिंता है।
भारी उद्योग मंत्रालय ने नहीं दिया जवाब
भारत के भारी उद्योग मंत्रालय ने टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोध पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।
मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि दिनोंदिन प्रदूषण काफी तेजी से बढ़ते जा रहा है, जिसको लेकर सरकार सतर्क हो रही है और कई कड़े नियम भी इसको रोकने के लिए बना रही है, भारत सरकार ने अब उन वाहन निर्माता कंपनियों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है जो वाहन उत्सर्जन नियमों को अनदेखी करते हैं, केंद्र सरकार ने एक नया ड्राफ्ट कानून पेश किया है, जिसके तहत उत्सर्जन मानकों का पालन न करने पर कार कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकेगा, ये नियम “एनर्जी कंजर्वेशन (कम्प्लायंस एनफोर्समेंट) रूल्स, 2025” के तहत आएगा, वाहन निर्माताओं को याद दिलाया गया है।
घरेलू गैस सप्लाई चेन पर ध्यान
सरकार ने पहले ही उद्योगों के मुकाबले घरों के लिए गैस के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी है, उद्योगों को उनकी औसत ज़रूरत का सिर्फ़ लगभग 80 प्रतिशत ही मिल पाता है।
भारत की जानी-मानी कार बनाने वाली कंपनियों जैसे मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा को पार्ट्स सप्लाई करने वाले कुछ सप्लायर्स पहले से ही अपने ऑपरेशन्स चलाने के लिए गैस की कमी की शिकायत कर रहे हैं। यह ऐसे समय में हो रहा है जब गाड़ियों की बिक्री ज़ोरों पर है।
जबकि मंत्रालय चाहता है कि इस सेक्टर में और ज़्यादा प्रयास किए जाएं।
तेल छोड़़… बिजली की ओर
मंत्रालय ने अपने नोट में कहा, “जहां भी तकनीकी रूप से संभव हो, तेल-आधारित ईंधनों से बिजली की ओर बदलाव करने पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा उत्पादन के शेड्यूल को इस तरह से बेहतर बनाया जा सकता है, जिससे बेकार पड़े रहने या स्टैंडबाय मोड में होने पर ईंधन की खपत कम से कम हो।”
मांग का दबाव कम हो
सरकार चाहती है कि कंपनियां जहां संभव हो वहां रिसायकल्ड एल्यूमीनियम का उपयोग करें और पैकेजिंग और अन्य गैर-जरूरी अनुप्रयोगों के लिए वैकल्पिक सामग्रियों के उपयोग की संभावना तलाशें, ताकि कमी के बीच “मांग के दबाव” को कम किया जा सके।
एक कार निर्माता कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि फ़ैक्टरी में कितना बदलाव किया जा सकता है, सरकारी निर्देशों के विरुद्ध यह लड़ाई लंबे समय तक चलेगी और इसके लिए सभी कि तैयार रहना चाहिए।