[ अजय कुमार ]
न्यूयॉर्क टाइम्स बता रहा है
और
भारतीय विदेश मंत्रालय खारिज कर रहा है
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार एलन मस्क की भागीदारी इसलिए खास थी, क्योंकि राष्ट्राध्यक्षों के बीच होने वाली बातचीत में किसी आम नागरिक का शामिल होना बहुत कम देखने को मिलता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि एलेन मस्क के राष्ट्रपति के साथ संबंध फिर से बेहतर हो गए हैं।
मोदी-ट्रम्प के बीच एलेन मस्क
बीते मंगलवार को एलन मस्क ने राष्ट्रपति ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक फ़ोन कॉल में हिस्सा लिया। युद्ध जैसे संकट के समय, दो राष्ट्राध्यक्षों के बीच होने वाली बातचीत में किसी आम नागरिक का शामिल होना एक असामान्य बात है।
अमेरिकी अधिकारियों की पुष्टि : लेकिन…
दो अमेरिकी अधिकारियों ने मस्क के इस कॉल में शामिल होने की पुष्टि की है। इससे यह संकेत मिलता है कि दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति के राष्ट्रपति के साथ संबंध पुनः बेहतर हो गए हैं, पिछले वर्ष दोनों के बीच तब खटास आ गई थी, जब मस्क ने सरकार से अपना नाता तोड़ लिया था। उस समय उन्हें सरकारी कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने का काम सौंपा गया था।
अमेरिकी अधिकारियों ने अपना नाम गुप्त रखने का अनुरोध किया, क्योंकि उन्हें सार्वजनिक रूप से बोलने का अधिकार नहीं है।
मस्क बीच में क्यों ? : भारत के प्रति व्यवसायिक झुकाव
यह स्पष्ट नहीं है कि मस्क इस कॉल पर क्यों थे या उन्होंने कुछ बोला भी था या नहीं। उनकी कंपनियों को मध्य-पूर्व के देशों, जिनमें सऊदी अरब और कतर शामिल हैं, के सरकारी निवेश धन से भारी निवेश मिला है।
एलन मस्क लंबे समय से भारत में अपनी व्यावसायिक उपस्थिति बढ़ाने के इच्छुक रहे हैं। इसके अलावा, उनकी निजी रॉकेट कंपनी “स्पेस एक्स” इस साल के अंत में अपना ‘इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग’ लाने पर विचार कर रही है, लेकिन अगर वैश्विक आर्थिक हालात बिगड़ते हैं, तो यह योजना संकट में पड़ सकती है।
मोदी-ट्रम्प ने मध्यपूर्व एशिया में चल रहे तनाव के संबंध में बात किये
अमेरिकी और भारतीय अधिकारियों के अनुसार, दोनो राष्ट्राध्यक्षों की बातचीत मध्य-पूर्व में बढ़ते संकट और विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर ईरानी सेना के नियंत्रण के बारे में थी, यह जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल और गैस की शिपिंग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस जलडमरूमध्य से होने वाले अधिकांश समुद्री यातायात के रुक जाने के कारण दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं और बाज़ारों में उथल-पुथल मच गई है। कुछ एशियाई देश तो अब ईंधन की राशनिंग करने की कगार पर पहुँच गए हैं।
“हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का खुला, सुरक्षित और सुलभ बने रहना पूरी दुनिया के लिए ज़रूरी है। हम शांति और स्थिरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को लेकर एक-दूसरे के संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं”, मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा।
अमेरिकी-भारतीय सरकारों की पुष्टि नहीं
अमेरिका और भारत सरकार ने अपनी आधिकारिक रिपोर्टों या इंटरव्यू में मस्क के शामिल होने का ज़िक्र नहीं किया।
हालांकि उन्होंने ट्रंप को चुनाव जिताने में मदद की और पिछले साल संघीय नौकरशाही में कटौती करने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन मस्क के पास कोई सरकारी पद नहीं है। प्रशासन के शुरुआती महीनों में, उनके पास “विशेष सरकारी कर्मचारी” का ओहदा था। उस दौरान वे डिपार्टमेंट आफ गवर्नमेंट ईफीसिएंसी नाम के एक समूह की देखरेख कर रहे थे, जिसने संघीय कामकाज और खर्च में भारी कटौती करने की कोशिश की थी। इस वजह से मस्क और ट्रंप के अन्य वरिष्ठ सहयोगियों के बीच तनाव पैदा हो गया था।
मस्क का मीडिया को जवाब नहीं
मस्क ने इस हफ़्ते टिप्पणी के लिए बार-बार किए गए अनुरोधों का मीडिया को कोई जवाब नहीं दिया। व्हाइट हाउस ने मस्क के शामिल होने के मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी ट्रम्प और मोदी के बीच हुई टेलीफोनी बातचीत में किसी तीसरे सख्श की मौजूदगी की खबरों को खारिज कर दिया है। अब न्यूयॉर्क टाइम्स की खबरों पर आप विश्वास करें या ना करें, स्वयं तय करें।
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप की प्रधानमंत्री मोदी के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं, और यह एक सार्थक बातचीत थी।”