[ अजय कुमार ]
कोच्चि :
केरल हाई कोर्ट ने सुरेश गोपी की चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका को सुनवाई योग्य माना, यह अलग बात है कि अदालत में याचिका पर सुनवाई, अंत में फुस्स हो जायेगा या फिर 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद निर्णय आयेगा।
जीत को चुनौती…
याचिका स्वीकार करने का मतलब है कि त्रिशूर से गोपी की चुनावी जीत को चुनौती देने वाली याचिका पर अब उसके गुण-दोष के आधार पर सुनवाई हो सकती है।
“बार एंड बेंच” की रिपोर्ट के अनुसार, केरल हाई कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका को सुनवाई योग्य माना, जिसमें 2024 के लोकसभा चुनाव में त्रिशूर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुरेश गोपी की चुनावी जीत को चुनौती दी गई थी।
गुणदोषों पर होगा अदालत में बहस
इसका मतलब है कि अब इस याचिका पर उसके गुण-दोषों के आधार पर सुनवाई की जा सकती है।
जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने केंद्रीय मंत्री की शुरुआती आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने पिटीशन खारिज करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि वे “जरूर फेल हो जायेंगे” और चुनाव पिटीशन शुरू में ही “खारिज करने लायक नहीं है”।
चुनाव के दौरान सब्जी विक्रेताओं को छाता दिया गया था
हालांकि, कोर्ट ने सब्जी बेचने वालों को छाते बांटने से जुड़े एक आरोप को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह खास दावा ट्रायल का हिस्सा नहीं होगा।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने यह भी कहा कि गोपी पर “पिटीशन में बताए गए दूसरे करप्ट कामों के लिए” ट्रायल चलेगा।
त्रिसूर की मतदाता और नेता ने की याचिका दायर
यह याचिका बिनॉय ए.एस. ने दायर की थी, जो ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के नेता और त्रिशूर के एक वोटर हैं। उन्होंने मांग की कि ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ के प्रावधानों के तहत अभिनेता के चुनाव को अमान्य घोषित किया जाए।
आरोप…
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि गोपी, उनके एजेंट और उनके सहयोगियों ने “भ्रष्ट तरीकों” का इस्तेमाल किया, इनमें धार्मिक भावनाओं को भड़काना, चुनाव प्रचार सामग्री में धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करना और चुनाव प्रचार के दौरान वोटरों को प्रभावित करने के लिए पैसे या अन्य लाभ देने का वादा करना शामिल है।
भगवान राम और राधा-कृष्ण के साथ प्रचार
‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस याचिका में चुनावी प्रचार सामग्री का ज़िक्र है, इसमें ऐसे फ़्लेक्स बोर्ड शामिल हैं जिन पर गोपी की तस्वीर के साथ-साथ हिंदू देवी-देवताओं, कृष्ण और राधा और अयोध्या के राम मंदिर की तस्वीरें भी बनी हैं, और साथ ही धार्मिक भावनाओं को जगाने वाले संदेश भी लिखे हैं।
इसमें यह दावा भी किया गया है कि भाजपा के नेताओं ने अपने भाषणों में मतदाताओं से अपील की कि वे धार्मिक आधार पर अपना चुनावी फ़ैसला लें।