[ अजय कुमार ]
प्रधानमंत्री के ना खाऊंगा ना खाने दूंगा के डायलॉग के बाद भी भ्रष्टाचार रुक नहीं सकता और देश में परिवादवाद कोई आश्चर्य बात नहीं है, लेकिन जब सत्तारूढ़ व्यक्ति के ही परिवार को 146 सरकारी ठेके मिल जाए तो सवाल उठेगा ही, ऐसा ही एक मामला अरुणाचल प्रदेश से आया। यहां के तवांग जिले में 2012 से 2023 के बीच राज्य सरकार ने कुल 146 सरकारी कामों के ठेके दिए गए, जिनकी लागत कीमत 383.74 करोड़ रुपये है।
सारे ठेके मुख्यमंत्री के परिवार को…
सुप्रीम कोर्ट में दायर एक शपथपत्र के अनुसार, इनमें से कई ठेके, भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी चार कंपनियों को दिए गये, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण की डिमांड पर सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने अरुणाचल सरकार से दिसम्बर 2025 में विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने को कहा था, शपथपत्र से ही मुख्यमंत्री के परिवार को 146 सरकारी ठेका देने का खुलासा हुआ है, इस जानकारी से जज साहब भी हैरान रह गये।
पत्नी, भाई, भाभी की कंपनियां
अरुणाचल प्रदेश सरकार की ओर से दायर शपथपत्र के अनुसार, चार कंपनियों को ये ठेके मिले, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से दो मुख्यमंत्री पेमा खांडू की पत्नी सेरिंग डोल्मा की है, एक उनके भाई ताशी खांडू की और एक भाभी नीमा ड्रेमा की है।
दो सप्ताह के भीतर मामला दर्ज करने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट के युगल पीठ ने सीबीआई को दो सप्ताह के भीतर जांच शुरू करने के लिए निर्देशित किया है कि वह इस मामले में 16 सप्ताह में अपनी जांच रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आदेश के तहत राज्य में 01 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक सभी सार्वजनिक कार्यों, ठेकों और कार्य आदेशों के आवंटन और उनके कामों की जांच की जाए। जस्टिस नाथ ने आदेश सुनाते हुए कहा, ‘सीबीआई इस निर्णय की तारीख से दो सप्ताह में प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज करेगी और कानून के अनुसार आगे बढ़ेगी।’
परिवार को सारा काम एलाॅटेड
तवांग जिले में ही इन कंपनियों को 42 ठेके 209.6 करोड़, 13 ठेके 29.1 करोड़ और 91 ठेके 145.04 करोड़ रुपये के दिए गे और 59 ठेके बिना टेंडर के सीधे वर्क ऑर्डर के जरिए दिए गये। इनमें कम से कम 11 ठेकों की राशि 50 लाख रुपये की सीमा से ज्यादा थी, जो 2020 में तय की गई थी। इन ठेकों में काम सड़क, पुल, नालियां, बिजली लाइनें, भवन निर्माण, पर्यटन इन्फ्रास्ट्रक्चर, सामुदायिक भवन और कॉलेज निर्माण जैसे थे।