[ अजय कुमार ]
अमेरिका-इजराइल और ईरान दो हफ़्ते के संघर्ष-विराम पर सहमत
ट्रंप ने अपनी धमकियाँ वापस लीं
सूत्रों का कहना है कि चीन भी ईरान की ओर से युद्ध में शामिल होने वाला था
मार्च के अंत में ही चीन से युद्ध हथियार ईरान पहुंचा
तेहरान [ईरान (एपी)] :
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार देर रात ईरान पर विनाशकारी हमले करने की अपनी धमकियों से कदम पीछे खींच लिए, क्योंकि अमेरिका और ईरान दो हफ़्ते के युद्धविराम पर सहमत हो गए, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना भी शामिल है।
शांति के लिए अमेरिका आगे आया
ट्रंप ने युद्ध को शांत करने की दिशा में तब कदम बढ़ाया, जब तेहरान के लिए उनके द्वारा तय की गई समय सीमा में दो घंटे से भी कम समय बचा था। इस समय सीमा के तहत तेहरान को या तो किसी समझौते के आगे झुकना था या फिर अपने पुलों और बिजली संयंत्रों पर ऐसे हमलों का सामना करना था, जिनका मकसद ईरानी “सभ्यता” को नष्ट करना था।
शांति की अपील में चीन पाकिस्तान की भूमिका
ट्रम्प धमकी की समय सीमा समाप्त होने के दो घंटे पहले चीन के विदेश मंत्री की ईरानी राष्ट्रपति से बात हुई, वहीं आधा घंटे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने डोनाल्ड ट्रम्प से बात की, तत्पश्चात ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि उसने सीज़फ़ायर मान लिया है और शुक्रवार 10 अप्रैल से पाकिस्तान में वह अमरीका के साथ बातचीत करेगा।
सीजफायर का समय निश्चित नहीं
न तो ईरान और न ही अमरीका ने यह बताया कि सीज़फ़ायर कब से शुरू होगा और बुधवार तड़के इसराइल, ईरान और पूरे खाड़ी क्षेत्र में हमले हुए।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार तड़के कहा कि इसराइल ने ईरान के साथ अमरीका के सीज़फ़ायर का समर्थन किया है, लेकिन इस समझौते में लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ लड़ाई शामिल नहीं है।
इजराइल भौंचक्क और मजबूर
उनके कार्यालय से एक बयान में कहा कि इज़राइल ने ट्रंप के उस फ़ैसले का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने ईरान द्वारा तुरंत होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने और अमेरिका, इज़राइल तथा इस क्षेत्र के देशों पर सभी हमले रोकने की शर्त पर हवाई हमले रोकने का निर्णय लिया था।
उनके कार्यालय ने यह भी कहा कि इज़राइल अमेरिका के उन प्रयासों का भी समर्थन करता है, जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान अब कोई परमाणु या मिसाइल संबंधी ख़तरा न बने।
ईरान ने कहा : हमारी बड़ी जीत
ईरान ने उसकी 10-सूत्रीय मांग पर बातचीत को अमेरिका द्वारा स्वीकार किए जाने को अपनी बड़ी जीत बताया है, ईरान की सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का बयान प्रकाशित किया है, इसमें कहा गया है कि ईरान ने एक महान जीत हासिल की और अपराधी अमेरिका को अपनी ’10 सूत्रीय योजना को स्वीकार करने के लिए मजबूर’ कर दिया। इसके साथ ही 10 सूत्रीय मांगों की जानकारी भी दी गई है, जिसके आधार पर ईरान ने बातचीत की मांग की है।
ईरान की 10 सूत्रीय मांग –
01- अमेरिका भविष्य में दोबारा हमला न करने की गारंटी देगा
02- होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण जारी रहेगा
03- ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को स्वीकार किया जाए
04- सभी प्राथमिक प्रतिबंधों को हटाना
05- सभी द्वितीयत प्रतिबंधों को हटाना
06- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना
07- अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को खत्म करना
08- ईरान को पहुंचाए गए नुकसान के लिए मुआवजे का भुगतान
09- क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी
10- लेबनान में इस्लामी प्रतिरोध (हिजबुल्लाह) समेत सभी मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति।
अब दुनिया की निगाहें, शुक्रवार 10 अप्रैल को इस्लामाबाद पाकिस्तान पर टिकी हुई है, जहां दोनों देशों के बीच प्रथम चरण की बातचीत होने वाली है।