विकास मुसीबत में : नुकसान हकीकत में

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[ अजय कुमार ]

नेशनल हाईवे और समस्त विभागों-एजेंसियों में निर्माण कार्य धीमी हो जाने के बाद, राज्यों की निर्माण विभागों पर भी पश्चिम एशिया संघर्ष का असर देखने मिल रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य में भी सरकारी निर्माण कार्यों पर संकट के बादल छा गये हैं, डामर और टाइल्स की किल्लत और आवश्यक निर्माण वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से निर्माण कार्य ठप्प होने के कगार पर आ चुका है…

  • निर्माण सामग्रियों की बढ़ती कीमतें
  • लागत राशि में वृद्धि
  • ठेकेदार हलाकान परेशान
  • निर्माण कार्य की गति धीमी हुई
  • बढ़ेगी बेरोजगारी
  • कीमतों पर नियंत्रण नहीं
  • पिछले दो सालों से भुगतान में कमी

रायपुर :
छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसो. ने 10 अप्रैल को बुलाई प्रदेश के ठेकेदारों की बैठक
ईरान-अमेरिका/इजराइल युद्ध का असर सबसे अधिक सरकारी निर्माण कार्यों पर पड़ता हुआ दिख रहा है। टेंडर स्वीकृति के बाद से निर्माण सामग्रियों का रेट तेजी से बढ़ने के कारण, निर्माण कार्य ठप्प होने के कगार पर है।
निर्माण सामग्रियों की कमी : कीमतों में वृद्धि
क्योंकि डामर और टाइल्स की किल्लत छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा है, ऐसे में प्रदेशभर के ठेकेदार पीडब्ल्यूडी और पीएम सड़क योजना से बनने वाले सड़कों का काम बंद करने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि डामर क्रूड ऑयल से बनती है, जिसकी कीमत 50 हजार टन से अब 84 हजार टन तक पहुंच गई है, वहीं गैस की कमी के कारण टाइल्स को लेकर भी किल्लत की ​स्थिति है। ऐसे में दोहरी मार पड़ने से छत्तीसग़ढ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने 10 अप्रैल को अपनी कोर कमेटी की बैठक में निर्माण बंद कर देने का बड़ा ऐलान कर सकता है।
विकास कार्य ठप्प
इस समय राजधानी सहित प्रदेश में अरबों रुपए के निर्माण कार्य चल रहे हैं, गर्मी के मौसम में ही सबसे अ​धिक डामरीकरण के कार्य होते हैं, वहीं सरकारी भवनों का काम भी प्रभावित हो रहा है, इस व्यवहारिक संकट से बेरोजगारी बढ़ना भी निश्चित है।
25 प्रतिशत से अधिक मूल्यों में बढोतरी
जबकि टेंडर स्वीकृति के दौरान निर्माण सामग्रियों के रेट सामान्य थी, लेकिन प्रत्येक निर्माण वस्तुओं में 20 से 25 प्रतिशत तक तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में निर्माण कार्य कराना संभव नहीं हो पा रहा है। सड़कों का डामरीकरण ठप्प होने के कगार पर है।
उत्पादन उद्योग संकट में
चूंकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर काफी प्रभावित हुआ है। लोहे की कीमत बढ़ने से ओवरब्रिज और अंडरब्रिज का निर्माण पूरा कराने में दिक्कत है। इसका सीधा असर निर्माण कार्यों को निर्धारित समय पर पूरा कराने के साथ ही ठेकेदारों के आ​र्थिक ​स्थिति पर पड़ रहा है, इन परिस्थितियों में सभी निर्माण कार्यों की निविदाएं, जो स्वीकृत की जा चुकी हैं, उन सभी का रेट रिवाइज करने की आवश्यकता हैं, इस संबंध में राज्य शासन से गुहार लगाने की तैयारी की जा रही है।
कोर कमेटी की बैठक में होगा फैसला


छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला के अनुसार सरकारी निर्माण कार्यों के टेंडर दरों की अपेक्षा सामग्रियों के रेट 25 प्रतिशत तक बढ़े हैं। सड़क बनाने वाले ठेकेदारों को डामर का स्टॉक नहीं मिल रहा है। ऐसी ​स्थिति में एसोसिएशन की कोर कमेटी की बैठक 10 अप्रैल को आहूत किया है, जिसमें प्रदेशभर से ठेकेदार शामिल होंगे। बैठक में सुझावों और विस्तृत चर्चा करने के बाद उचित और आवश्यक निर्णय सर्वसम्मति से लिया जायेगा।
कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी एक नजर में…
स्टील – ₹5500 (पहले)
₹6500 (अब)

सीमेंट – ₹260/ बैग (पहले)
₹290/बैग (अब)

डामर – ₹50,000/टन (पहले)
₹84,000/टन (अब)

एल्यूमीनियम – ₹320/प्रति किलो (पहले )
₹435/किलो (अब)

गिट्टी – ₹22/फीट (पहले)
₹40-42/फीट (अब)


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