[ अजय कुमार ]
- ठेकेदारों का मुंह खुला
- सरकार का मुंह बंद
- निर्माण सामग्री 25 फीसदी तक महंगी
- निर्माण विभागों में चुप्पी
- मंत्रालय में भी चुप्पी
- भुगतान अटके
- मजदूर भटके
- निर्माण कार्य बंद
- कान्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन का फैसला
- नेता अधिकारी ज्ञापन लेने के लिये बैठेंगे
- समस्याओं का उद्यापन कब होगा?
- अल्लाह जाने क्या होगा आगे…!
रायपुर :
पश्चिम एशिया संघर्ष के असर से छत्तीसगढ़ में भूचाल आ चुका है, राज्य सरकार ने अकड़ दिखाकर धरती हिलाने की बात कही, तो राज्य ठेकेदारों ने भूकंप ही ला दिया। एक महीना कर्मचारियों को तनख्वाह मिलने में देर हो जाती है, तो कलमबंद हड़ताल हो जाता है और निर्माण कार्यों में अपना धन मन और तन लगाकर प्रदेश के विकास में असल और प्रथम भागीदार ठेकेदार, सरकार और सरकारी विभागों में चक्कर लगा-लगा कर, घिसे जूते चप्पलों को रिपेयरिंग कराने की स्थिति में नहीं है, दो सालों से अधिक समय हो चुका है, भुगतान के लिए प्रदेश के ठेकेदार भुगत रहे हैं।
रायपुर :
सरकारी निर्माण विभागों के ठेकेदारों के सामने निर्माण सामग्री 20 से 25 फीसदी तक महंगी हो जाने से दुविधा की स्थिति निर्मित हो गई है, उनका कहना है कि राज्य शासन द्वारा स्थितियों को देखते हुए रेट रिवाइज किए जाने पर ही निर्माण कार्य पूरे हो सकेंगे, वरना निर्माण ठप करने की नौबत आ गई है। छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन की कोर कमेटी की बैठक कल शुक्रवार को राजधानी में हुई, जिसमें प्रदेश भर के ठेकेदार और पदाधिकारी शामिल हुए।
ज्ञापन सौपने का निर्णय

इस दौरान विस्तार से चर्चा करने के पश्चात, निर्माण कार्य जारी रखने पर असमर्थता जताते हुए मुख्यमंत्री सहित निर्माण विभागीय के मंत्रियों, समस्त संबंधित सचिवों, प्रमुख अभियंता और मुख्य अभियंताओं को जल्द ज्ञापन सौंपने का फैसला लिया।
जीएसटी, राॅयल्टी और लेबर लाइसेंस के नियमों पर पहले का ही विवाद अबतक थमा ही नहीं है।
समस्याओं पर बिंदुवार चर्चा
कांट्रेक्टरर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला की अध्यक्षता में यह बैठक लगभग चार घंटे तक चली। इसमें सभी जिलों से आए कांट्रेक्टरों ने सड़क, ब्रिज और भवन निर्माण सामग्रियों में तेजी से हुई बढ़ोतरी पर बिंदुवार चर्चा करते हुए सुझाव रखा। सभी ने कहा कि जिन निर्माण कार्यों की निविदा स्वीकृत होकर वर्कआर्डर जारी हो चुके हैं, उन्हें पूरा कराना संभव नहीं हो पा रहा है। सिंचाई विभाग के नहर, बांध, स्टॉप डैम आदि जनहित के आवश्यक निर्माण कार्यो पर भी विराम लगा।
निर्माण सामग्रियों के दाम बढ़े
पश्चिमी देशों में युद्ध की वजह से डामर सहित लोहा, एल्युमिनियम, सीमेंट जैसी सामग्री सबसे अधिक महंगी हुई है, जो कि टेंडर शर्तों के अनुसार 20 से 25 फीसदी तक ज्यादा है। ऐसे में ठेकेदार कर्ज में डूब जाएंगे, फिर भी वह निर्माण पूरा नहीं हो पाएगा। इसलिए सभी ने एक सुर में राज्य सरकार के सामने टेंडर शर्तों में रेट रिवाइज किए जाने का प्रस्ताव पारित किया।
डामरीकरण का पीक सीजन
एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने जारी बयान में कहा कि कोर कमेटी की बैठक में सभी सरकारी निर्माण कार्यों के ठेकेदारों ने निर्माण पूरा कराने में असमर्थता जताया है। जबकि गर्मी के महीने में ही सड़कों का डामरीकरण कराने का पीक सीजन होता है। ऐसे में डामर का रेट 50 हजार से बढ़कर 84 हजार प्रति टन पहुंचने से सबसे कार्य अधिक प्रभावित हो रहा है, अभी भी गैस की किल्लत बनी हुई है, इससे टाइल्स कटिंग जैसे काम नहीं हो रहे हैं।
सरकार ने जारी होने वाले टेंडर रोके
वहीं दूसरी ओर निर्माण विभागों ने टेंडर जारी की तारीखों को भी आगे बढ़ाने का कदम उठाया है, जो इस बात का द्योतक है कि भविष्य में बाजार मूल्यों का पुनः आंकलन/पुनरीक्षण करने के बाद ही नयी दरों का निर्धारण पश्चात निविदायें जारी की जायेगी। ठेकेदार संघ की कोर कमेटी में लिए गए फैसले का बिंदुवार ज्ञापन, राज्य शासन को सौंपने का निर्णय लिया गया है। ताकि इस पर शासन विचार कर रेट रिवाइज करके निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने में ठोस कदम उठा सके।
डामरीकरण के कार्य सबसे अधिक प्रभावित
प्रदेशभर में करोड़ों का टेंडर खराब सड़कों की मरम्मत और डामरीकरण के लिए जारी किए गए हैं। ऐसे में यह काम सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है, क्योंकि डामर की किल्लत और टेंडर दरों से 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी बड़ी मुसीबत के रूप में सामने है, लोहे की कीमत बढ़ने से ओवरब्रिज और अंडरब्रिज का निर्माण पूरा कराने में दिक्कत है।
काम बंद : समस्त ठेकेदार सहमत
इन सभी स्थितियों परिस्थितियों से राज्य शासन के प्रमुख अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी, राहत नहीं मिलने पर निर्माण ठप्प करने जैसे कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस पर सभी कांट्रेक्टरों ने अपनी सहमति व्यक्त करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया।