[ अजय कुमार ]
- अमेरिकी नाकेबंदी के पहले पूरे दिन के दौरान वैश्विक राजनयिकों ने अमेरिका-ईरान के बीच और बातचीत कराने की कोशिश की
- होर्मुज पर नाकाबंदी का ईरान पर असर नहीं
- ट्रम्प के झूठ से दुनिया भर में उनकी किरकिरी
- ट्रंप ने ईरान के साथ शांति वार्ता फिर शुरू होने के संकेत दिए
- इजरायल और लेबनान तीन दशकों बाद सीधी बातचीत को तैयार
- मध्य पूर्व में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज
वाशिंगटन/तेहरान/इस्लामाबाद :
(एसोसिएटेड प्रेस)
कूटनीतिक प्रयास जारी
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बार फिर कूटनीतिक हल की उम्मीद जगी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ शांति वार्ता जल्द दोबारा शुरू हो सकती है। वहीं दूसरी ओर इजरायल और लेबनान के बीच भी सीधी बातचीत की तैयारी हो गई है। कल मंगलवार को राजनयिकों ने गुप्त रूप से काम करते हुए, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का एक नया दौर आयोजित करने की कोशिश की। यह कदम तब उठाया गया जब वॉशिंगटन ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकेबंदी लागू कर दी थी, जबकि तेहरान ने युद्ध से जूझ रहे इस पूरे क्षेत्र में लक्ष्यों पर हमला करके जवाबी कार्रवाई करने की धमकी दी थी।
ट्रम्प वार्ता के लिए तैयार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि बातचीत का दूसरा दौर “अगले दो दिनों के भीतर” हो सकता है। उन्होंने ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ को बताया कि ये बातचीत एक बार फिर इस्लामाबाद में आयोजित की जा सकती है।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इस बात से सहमति जताते हुए कहा कि बातचीत फिर से शुरू होने की “पूरी संभावना” है। उन्होंने पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार के साथ हुई अपनी एक बैठक का ज़िक्र किया।
राजदूतों के बीच हुई बातचीत
इस बीच, अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, वॉशिंगटन में अमेरिका में तैनात इज़रायल और लेबनान के राजदूतों के बीच दशकों बाद हुई पहली सीधी बातचीत का समापन काफी सकारात्मक रहा।
इजरायली राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि उग्रवादी हिजबुल्लाह समूह से “लेबनान को आज़ाद कराने” के मामले में दोनों देश “एक ही पक्ष में” हैं।
लेबनानी राजदूत नाडा हमादेह मोअवाद ने इस बैठक को “रचनात्मक” बताया, लेकिन इजरायल और ईरान-समर्थित हिजबुल्लाह उग्रवादियों के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने की अपील की। मार्च से अब तक, इस युद्ध के कारण लेबनान में 10 लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं।
इजराइल लेबनान की पुरानी दुश्मनी
तकनीकी तौर पर, इजरायल और लेबनान 1948 में इजरायल की स्थापना के समय से ही युद्ध की स्थिति में हैं, और इजरायल के साथ कूटनीतिक संबंधों को लेकर लेबनान में आज भी गहरा मतभेद बना हुआ है।
दक्षिणी लेबनान में इज़राइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह लड़ाकों के बीच लड़ाई जारी रही, जबकि इज़राइली और लेबनानी राजनयिक वॉशिंगटन में मिले। लेबनान में चल रहे युद्ध से अमेरिका-ईरान संघर्ष-विराम के कमज़ोर पड़ने का खतरा पैदा हो गया है।
इजराइल लेबनान हिजबुल्लाह के बीच सीधी बातचीत
अमेरिका ने मंगलवार को घोषणा की कि इजरायल और लेबनान इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लेबनान में चल रही लड़ाई को समाप्त करने के लिए “सीधी बातचीत शुरू करने” पर सहमत हो गए हैं, एक ऐसा संघर्ष जिसने अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम को खतरे में डाल दिया है।
असफल रही थी पाकिस्तान में वार्ता
पिछले हफ़्ते पाकिस्तान में, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे झगड़े को हमेशा के लिए खत्म करने के मकसद से हुई बातचीत का पहला दौर किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाया। व्हाइट हाउस ने कहा कि ईरान की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाएँ ही इस बातचीत में सबसे बड़ी रुकावट थीं।
युद्ध रुकनी चाहिए : ट्रम्प
फॉक्स बिज़नेस नेटवर्क के शो “माॅर्निंग विथ मारिया” के एक इंटरव्यू के अंश में, जो बुधवार सुबह प्रसारित होने वाला है, ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि वे किसी भी कीमत पर समझौता करना चाहते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि यह मामला अब लगभग सुलझने ही वाला है।”