[ अजय कुमार ]
- बिहार में शराबबंदी के दम पर राजस्व बटोर रहे हैं यूपी, पश्चिम बंगाल और झारखंड…
- बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में शराबबंदी के खत्म होने की अफवाह को सिरे से खारिज किया है…
- पत्रकारों से साथ अनौपचारिक बातचीत में चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार के लागू किए हुए फैसलों को पटलने की किसी की हिम्मत नहीं है…
- मुख्यमंत्री के मुताबिक नीतीश कुमार के इस काम की तारीफ तो पीएम मोदी भी कर चुके हैं…
बिहार में शराबबंदी के दस साल पूरे हो चुके हैं। इस फैसले को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 10 साल पहले लागू किया था, अब जबकि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं तो कयास लगाया जा रहा है कि शायद राज्य में शराब की बिक्री रास्ता खुल जाए। इस बीच, राज्य को राजस्व के मद में काफी नुकसान हुआ है।
अप्रैल 2016 से शराब बंदी…
बिहार में शराबबंदी लागू हुए 10 साल बीत चुके हैं, बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अप्रैल 2016 में ही संपूर्ण बिहार में अल्कोहलिक बीवरेज यानी शराब की बिक्री बंद कर दी थी। जब बिहार में शराबबंदी की गई थी, उससे एक साल पहले वहां आबकारी राजस्व मद में 3,142 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी, किन्तु दस साल से बिहार सरकार की शराब से प्राप्त होने वाला राजस्व भले ही शून्य हो गई हो, लेकिन इसके पड़ोसी राज्यों की बल्ले-बल्ले है। जहां हर साल शराब से होने वाली कमाई का रिकॉर्ड बन रहा है।
राज्य के राजस्व वसूली में महत्वपूर्ण थी शराब
पीआरएस लेगिसलेटिव रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में जब शराबबंदी हुई थी, उससे एक साल पहले यानी वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान वहां एक्साइज ड्यूटी के रूप में 3,142 करोड़ रुपये मिले थे। उस सयम यह राज्य के ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट का करीब एक फीसदी था। इसी साल राज्य का जो सकल कर राजस्व था, उसमें शराब पर टैक्स लगाने से मिली राशि का हिस्सा 15 प्रतिशत से भी ज्यादा था, मतलब कि शराब से होने वाली आमदनी राज्य के टैक्स कलेक्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थी।
बिहार की शराबबंदी से पडोसी राज्यों को हुआ लाभ
देश में शराब बनाने वाली कंपनियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज के डायरेक्टर जनरल अनंत एस. अय्यर का कहना है कि बिहार सरकार को शराबबंदी से काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है। बिहार में शराब बंदी का लाभ उसके पड़ोसी राज्य उठा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश…
उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में 2015-16 में एक्साइज ड्यूटी से करीब 11,000 करोड़ रुपये मिले थे, यह साल 2024-25 में 52,573 करोड़ रुपये और साल 2025-26 में 57,722 करोड़ रुपये हो गया।
पश्चिम बंगाल-झारखंड…
पश्चिम बंगाल ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में शराब से 22,444 करोड़ रुपये कमाए थे, छोटा राज्य झारखंड ने भी साल 2025-26 में इससे 4,013.53 करोड़ रुपये कमाए जो कि अबतक का उच्च आय रहा।
हर साल बीस हजार करोड़ का नुकसान !
टाइम्स ऑफ इंडिया ने प्रशांत किशोर की पार्टी के हवाले से इस बारे में एक रिपोर्ट छापी है, जिसके मुताबिक बिहार सरकार को हर साल शराब से मिलने वाले कर के मद में करीब 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, 10 साल पहले इससे हर साल 3,142 करोड़ रुपये की आमदनी हो रही थी। उसी हिसाब से जोड़ें तो अभी तक सरकार को 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। जबकि अन्य राज्यों में हर साल शराब से होने वाली आमदनी बढ़ जाती है।
छत्तीसगढ़ से तो ज्यादा ही होती आमदनी
छत्तीसगढ़ जैसा छोटा सा राज्य साल 2024-25 में शराब से मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी से करीब 10,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू प्राप्त किया था। बिहार तो छत्तीसगढ़ से बड़ा ही है, वहां तो इस मद में छत्तीसगढ़ से ज्यादा ही आमदनी होगी। यहां तक कि ओडिशा ने भी इस वर्ष एक्साइज ड्यूटी से 8,800 करोड़ रुपये कमाए हैं।
[TOI-BBC]