
[ अजय कुमार ]
नई दिल्ली :
5 जून की सुबह ग्रेटर कैलाश-1 के डेटा सेंटर में लगी आग के कारण वहां सर्वर होस्ट करने वाली कंपनियों को उपकरणों का भारी नुकसान हुआ है और कई स्थानीय इंटरनेट ऑपरेटरों की सेवाएं भी बाधित हुई हैं।
बड़ा नुकसान हुआ
बीते शुक्रवार को दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में एक डेटा सेंटर में लगी आग से सैकड़ों करोड़ रुपये के उपकरण, डेटा और रेवेन्यू का नुकसान हो सकता है। आग से प्रभावित कंपनियों ने बताया कि इससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में गूगल (Google), नेटफ्लीक्स (Netflix) और कई लोकल इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के ट्रैफिक पर असर पड़ा है।
हालांकि किसी की जान जाने की खबर नहीं है, लेकिन लोकल प्रोवाइडर्स और बड़ी टेक कंपनियों के अहम नेटवर्क राउटर और सर्वर खराब हो गए।
डेटा सेंटर में आग कम लगती है
डेटा सेंटर्स में आग लगने की घटनाएं कम ही होती हैं, जहां कई कंपनियां “को-लोकेशन” के लिए अपने उपकरण रखती हैं, उद्योग जगत के नियमों के मुताबिक, ऐसी जगहों पर आग बुझाने के लिए इनर्ट गैस सिस्टम¹ का इस्तेमाल किया जाता है और आम तौर पर रोज़ाना के कामकाज के दौरान डेटा सेंटर्स में बहुत कम लोग मौजूद होते हैं।
(1. इनर्ट गैस सिस्टम एक आवश्यक सुरक्षा तंत्र है जिसका उपयोग मुख्य रूप से तेल टैंकरों और औद्योगिक इकाइयों में विस्फोट और आग को रोकने के लिए किया जाता है)
सुविधाएँ काफी नहीं थी
हालांकि, एसटीटी टेलीमीडिया (सिंगापुर टेक्नोलॉजीस् टेलीमीडिया) और उन्नत डेटा सेंटर (GDC) की सुविधाओं में शायद ये सुरक्षा उपाय काफी नहीं थे, यह सुविधा टाटा कम्युनिकेशंस लिमिटेड की बिल्डिंग में चल रही थी, टाटा कम्युनिकेशंस ने शुक्रवार को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि एसटीटी जीडीसी ने “यह जगह लीज़ पर ली थी।”
भीषण आग फैल गयी
अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने जिन दो लोकल नेटवर्क से बात की, उन्होंने बताया कि रात करीब 2:30 बजे उनका इंटरनेट कनेक्शन कट गया था। दिल्ली फायर सर्विस ने बताया कि उन्हें बिल्डिंग की तीसरी मंज़िल पर लगी आग के बारे में पहली कॉल रात 2:45 बजे मिली और वे 2:49 बजे मौके पर पहुँच गए। फायर सर्विसेस् के असिस्टेंट डिविज़नल ऑफिसर वाई.एस. मीणा ने बताया कि आग तीसरी मंज़िल पर बने बैटरी रूम में लगी थी और इसे “मेक 4” कैटेगरी में रखा गया, जिसका मतलब है कि आग बहुत भीषण थी।
इंटरनेट ठप्प
एक इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर ने बताया कि उनका नेटवर्क लगभग उसी समय ठप्प हो गया था, आईएसपी ने दावा किया, “आमतौर पर आग बुझाने के लिए किसी तरह की गैस का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन उनके पास जो स्टॉक था, वह काफी नहीं था।”
बिकने की प्रक्रिया में डेटा सेंटर

सिंगापुर टेक्नोलॉजीस् टेलीमीडिया जीडीसी, जिसे इन्वेस्टमेंट फर्म केकेआर और सिंगापुर की टेलीकॉम कंपनी सिंगटेल (Singtel) खरीदने की प्रक्रिया में हैं, ने एक बयान में कहा कि “हमारी शुरुआती जांच के आधार पर, इसका मुख्य असर सिर्फ़ एक डेटा हॉल के ग्राहकों तक ही सीमित है।” “घटना की अभी भी समीक्षा की जा रही है, और इस चरण में इसके कारण पर कोई भी टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।”
नुकसान तीन मंजिलों में
एक क्लाइंट द्वारा शेयर किए गए वीडियो फुटेज में सर्वर रूम के उपकरण पूरी तरह से काले और जले हुए दिखाई दिए, जबकि बिल्डिंग के बाहर तीन फायर टेंडर खड़े थे। कुल मिलाकर दस फायर टेंडर तैनात किए गए थे और आग बुझाने का काम कई घंटों तक चला, हालाँकि नुकसान अंततः तीसरी मंज़िल तक ही सीमित रहा। इस ऑपरेशन के दौरान दो फायरफाइटर घायल हो गए। एक स्थानीय पुलिसकर्मी ने कहा कि शुरुआती तौर पर ऐसा लगता है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी।
डेटा का नुकसान ज्यादा
डेटा सेंटर के अधिकारी ने बताया कि “एक फ्लोर पर सर्वर के लगभग 200 रैक हैं, इनमें से 50 रैक गूगल (Google) के थे, तीसरी मंज़िल पर बाईं ओर उनका एक अलग केज (पिंजरे जैसा घेरा) है।” (गूगल ने कोई जवाब नहीं दिया) “हम एक छोटे ऑपरेटर हैं, लेकिन हमारे 2 करोड़ रुपये के उपकरण का नुकसान हुआ है।” हालाँकि नेटफ्लीक्स (Netflix) का इंफ्रास्ट्रक्चर भी डेटा सेंटर में था, लेकिन उसके ‘ओपन कनेक्ट आर्किटेक्चर’ ने शायद उसे झटकों से बचा लिया, क्योंकि डेटा की कॉपी, सीधे कई आईएसपी के लोकल नेटवर्क में रखे जाते हैं।
डेटा रिकवरी नहीं हो सकता
मेगापोर्ट लिमिटेड (Megaport Ltd) के कंट्री हेड के मुताबिक, जो इस सुविधा में कंटेंट और सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए इंटरनेट एक्सचेंज चलाते हैं, ने कहा कि “नुकसान उस डेटा का भी हुआ है जिसे शायद दोबारा हासिल नहीं किया जा सकता।” उन्होंने बताया कि “उनके अपने अकाउंटिंग-सॉफ्टवेयर वेंडर ने अपने डेटा सर्वर तीसरी मंज़िल पर रखे थे।”
500 करोड़ का नुकसान
आगे बताया कि नुकसान कम से कम ₹500 करोड़ का हो सकता है, सुविधा के आकार को देखते हुए, अकेले उपकरणों का नुकसान ही सैकड़ों करोड़़ रुपये का हो सकता है। उन्होंने कहा, “डेटा की कीमत क्या है, यह कौन जानता है?” एसटीटी जीडीसी ने खराब हुए उपकरणों की कमर्शियल वैल्यू पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि कुछ ग्राहकों के सर्वर सुरक्षित रूप से माइग्रेट कर दिए गए थे।
मुश्किल से ट्रैफिक बहाल हुआ
एक आईएसपी ने कहा कि वह दूसरे फ्लोर पर मौजूद उपकरणों के ज़रिए ट्रैफ़िक को री-रूट करके 8 जून को कामकाज फिर से शुरू करने में कामयाब रहा। दूसरे आईएसपी ने कहा कि चूंकि उसके प्राइमरी और बैकअप उपकरण एक ही रैक में रखे थे, इसलिए उसे कम बैंडविड्थ वाली बैकअप सुविधाओं के ज़रिए डेटा को री-रूट करना पड़ा, जिससे यूज़र्स के अनुभव पर असर पड़ा।
गूगल पर असर ज्यादा
इसका असर दूसरे इंटरनेट यूज़र्स पर भी पड़ सकता है। भारतीय इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर पर ब्लॉग चलाने वाले नेटवर्किंग एक्सपर्ट अनुराग भाटिया ने कहा कि भारत में एक आम इंटरनेट यूज़र के ट्रैफ़िक का आधा हिस्सा गूगल का होता है। भाटिया ने कहा, “गूगल आउटेज का असर बहुत ज़्यादा था और यह उन नेटवर्क्स तक भी फैल गया जो उस डेटा सेंटर में भी नहीं थे।”
इंटरनेट ट्रैफिक महंगे रुट पर
उत्तर पूर्वी भारत में इंटरनेट प्रोवाइडर्स के साथ काम करने वाली कंपनी ‘हाइब्रिड इंटरनेट’ के टेक्नोलॉजी डायरेक्टर शैलेंद्र परमार ने X पर एक ग्राफ़ पोस्ट किया। इसमें दिखाया गया कि 5 जून की सुबह गूगल ट्रैफ़िक का एक बड़ा हिस्सा सस्ते प्राइवेट पीयरिंग अरेंजमेंट्स से हटकर, इंटरनेट के दूसरे हिस्सों के लिए इस्तेमाल होने वाले महंगे “ट्रांज़िट” कनेक्शन्स पर चला गया।
बिल्डिंग के भीतर जाने से रोका गया
आईएसपी का कहना है कि आग लगने की शुरुआती सूचना के बाद से उन्हें एसटीटी से बहुत कम जानकारी मिली है। एक सर्विस प्रोवाइडर ने बताया कि घटना के बारे में उन्हें ज़्यादातर जानकारी साइट पर मौजूद कर्मचारियों से मिली, क्योंकि बिल्डिंग के बाहर भी लोगों के जाने पर रोक लगा दी गई है।
एसटीटी ने कहा, “हम प्रभावित कस्टमर्स के साथ मिलकर असर का पता लगा रहे हैं और उन्हें ज़रूरी मदद दे रहे हैं, जिसमें बिज़नेस को चालू रखने की प्लानिंग और दूसरी जगह शिफ्ट करने की व्यवस्था शामिल है।” कंपनी ने “किसी खास कस्टमर के डिप्लॉयमेंट या कॉन्फ़िगरेशन” पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।