
Ajay Kumar
जेन जी यह शब्द आपने शायद पहली बार नेपाल में सत्ता पलटने वाले युवाओं के संबंध में सुना है।
वर्तमान में हमारे देश में नीट पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद हर तरफ जेन जी (Gen Z) की चर्चा हो रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर जेन जी हैं कौन ? इसे जेन जी क्यों कहा जाता है ? और बेबी बूमर्स, जेन एक्स, मिलेनियल्स मतलब जेन वाय जैसी दूसरी पीढ़ियों के नाम कैसे तय होते हैं आईये, समझते हैं हर पीढ़ी की कहानी? कौन-सी जनरेशन कब की है और उसकी सबसे बड़ी पहचान क्या है?
पीढ़ियों का वर्गीकरण
अमेरिका के ऑस्टिन, टेक्सास में रहने वाले एक स्वतंत्र लेखक और वक्ता जेसन डोर्सी ने जेन (Gen) अर्थात् Generation अर्थात् पीढ़ी को परिभाषित और वर्गीकृत किया।
यह वर्गीकरण पीढ़ीगत अंतर्दृष्टि और रणनीतियाँ प्रदान करते हैं, जो आपके व्यवसाय को भविष्य के लिए तैयार करेंगी। उनकी गहन विशेषज्ञता, आकर्षक बोलने का अंदाज़ और विचारोत्तेजक अंतर्दृष्टि इस क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ हैं।
क्या वर्गीकृत या परिभाषित पीढ़ीगत नामों का कोई महत्व होता है?

सबसे पहले, यह पता लगाना जरूरी है कि क्या इन नामों का वास्तव में कोई अर्थ है भी या नहीं।
“पीढ़ीगत वर्गीकरण तब तक उपयोगी होते हैं जब तक आप उनकी सीमाओं को समझते हैं,”
पीढ़ीगत शोधकर्ता और “Zconomy : How Gen Z Will Change the Future of Business and What to Do About It” { ज़िकॉनमी : जेन जी (Gen Z) कैसे बिज़नेस के भविष्य को बदलेगी और इसके बारे में क्या किया जाए } के लेखक जेसन डोर्सी ने TODAY.com को बताया कि “हमारा मानना है कि ये वर्गीकरण एक अच्छी शुरुआत करने और एक साझा समझ विकसित करने में वास्तव में मददगार होते हैं।”
बेबी बूमर्स, जेन एक्स, मिलेनियल्स और जेन अल्फा जैसे नाम कैसे पड़े? हर पीढ़ी की पहचान जन्म वर्ष, ऐतिहासिक घटनाओं, तकनीकी बदलाव और सामाजिक माहौल से जुड़ी होती है। जानिए कौन-सी जनरेशन कब की है और उसकी सबसे बड़ी खासियत क्या है।
जेनरेशन कैसे तय होती है ?
आमतौर पर एक जनरेशन या पीढ़ी में करीब 20 साल के अंतराल में जन्मे लोगों को शामिल किया जाता है। हालांकि, यह सिर्फ जन्म के वर्ष का मामला नहीं है। किसी पीढ़ी को उसकी परवरिश, उस दौर की बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं, तकनीकी बदलावों और सामाजिक माहौल के आधार पर भी पहचाना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक ही समय में बड़े होने वाले लोग अक्सर एक जैसे अनुभव, सोच और आदतें विकसित करते हैं। यही वजह है कि अलग-अलग जनरेशन की पहचान, पसंद, काम करने का तरीका और जीवनशैली भी अलग होती है, पीढ़ियों का वर्गीकरण निम्नलिखित हैं –
1- ग्रेटेस्ट जनरेशन : जन्म वर्ष – 1901-1927
1901 से 1927 के बीच जन्मे लोगों को ‘ग्रेटेस्ट जनरेशन’ कहा जाता है। इस पीढ़ी ने 1930 के दशक की महा मंदी और प्रथम विश्व युद्ध जैसी कठिनाइयों का सामना किया। यही कारण है कि इस पीढ़ी की पहचान कड़ी मेहनत, अनुशासन, धैर्य और जिम्मेदारी से जुड़ी रही। संगीत की दुनिया में इस दौर में जैज और स्विंग म्यूजिक काफी लोकप्रिय हुआ, लेकिन इस पीढ़ी को सबसे ज्यादा उनके संघर्ष और देश के लिए योगदान के कारण याद किया जाता है।
2 – साइलेंट जनरेशन : जन्म वर्ष – 1928-1945
1928 से 1945 के बीच जन्मे लोगों को ‘साइलेंट जनरेशन’ कहा जाता है। इस पीढ़ी का बचपन और युवावस्था आर्थिक चुनौतियों, द्वितीय विश्व युद्ध और राजनीतिक तनाव के दौर में बीती। अमेरिका में इस समय कम्युनिज्म के डर और मैककार्थीवाद का माहौल था, इसलिए लोग खुलकर अपनी राय रखने से बचते थे। इसी वजह से इस पीढ़ी को ‘साइलेंट जनरेशन’ नाम दिया गया। इस पीढ़ी के लोगों को बचपन से कड़ी मेहनत, अनुशासन, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता का महत्व सिखाया गया। उनका मानना था कि मेहनत के दम पर ही जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है।
3 – बेबी बूमर जनरेशन : जन्म वर्ष – 1946-1964
1946 से 1964 के बीच जन्मे लोगों को ‘बेबी बूमर्स’ कहा जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद कई देशों में जन्म दर में अचानक तेज बढ़ोतरी हुई। इसी वजह से इस पीढ़ी कानाम बेबी बूमर्स पड़ा। युवावस्था में इस पीढ़ी ने कई बड़े सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में हिस्सा लिया। अमेरिका में वियतनाम युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन हुए और ‘समर ऑफ लव’ जैसे सांस्कृतिक आंदोलनों ने युवाओं की सोच और जीवनशैली को नई दिशा दी। परिवार के स्तर पर भी इस पीढ़ी ने बदलाव किया। बेबी बूमर्स ऐसे पहले माता-पिता माने जाते हैं, जिन्होंने बच्चों की राय और भावनाओं को महत्व देना शुरू किया। परिवार में बातचीत और फैमिली मीटिंग जैसी परंपराएं भी इसी दौर में लोकप्रिय हुई।
4 – जनरेशन एक्स : जन्म वर्ष – 1965-1980
1965 से 1980 के बीच जन्मे लोगों को ‘जनरेशन एक्स’ कहा जाता है। इस पीढ़ी ने समाज और तकनीक में तेज बदलावों का दौर देखा। इनके समय में एमटीवी संस्कृति का प्रभाव बढ़ा, एड्स महामारी ने दुनिया को प्रभावित किया और अधिकारों को लेकर जागरूकता व आंदोलन तेज हुए। पालन-पोषण के मामले में भी यह पीढ़ी अलग रही। जनरेशन एक्स के माता-पिता को ‘हेलीकॉप्टर पेरेंट्स’ कहा गया, क्योंकि वे अपने बच्चों की पढ़ाई, गतिविधियों और सामाजिक जीवन में पहले की पीढ़ियों की तुलना में कहीं अधिक सक्रिय और शामिल रहने लगे।
5 – मिलेनियल्स या जनरेशन वाय : जन्म वर्ष – 1981–1996
1981 से 1996 के बीच जन्मे लोगों को ‘मिलेनियल्स’ या ‘जनरेशन वाय’ कहा जाता है। यह ऐसी पहली पीढ़ी है, जिसने इंटरनेट के बिना बचपन और इंटरनेट के साथ युवावस्था दोनों का अनुभव किया। इस पीढ़ी ने ई-कॉमर्स की शुरुआत और डिजिटल क्रांति जैसे बड़े बदलाव देखे। तकनीक के अधिक इस्तेमाल के कारण मिलेनियल्स को अक्सर आलोचना का सामना करना पड़ा लेकिन यह पीढ़ी पर्यावरण, सामाजिक मुद्दों और सामुदायिक सहयोग को लेकर जागरूक माने जाते हैं। बच्चों की परवरिश में मिलेनियल्स पहले की पीढ़ियों की तुलना में बच्चों की पसंद, पहचान और व्यक्तित्व को अधिक महत्व देते हैं। वे बच्चों को अपनी रुचि के अनुसार सीखने और आगे बढ़ने की आजादी देने में विश्वास रखते हैं।
6 – जेन जी ( Generation Z) : जन्म वर्ष – 1997–2010
1997 से 2010 के बीच जन्मे लोगों को ‘जनरेशन Z’ या ‘जेन जी’ कहा जाता है। यह पहली ऐसी पीढ़ी है, जिसका जन्म इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के दौर में हुआ। यानी इनकी पूरी परवरिश डिजिटल दुनिया के बीच हुई और ये बचपन से ही ऑनलाइन दुनिया से जुड़े रहे। जेन जी को टेक-सेवी, सोशल मीडिया फ्रेंडली और तेजी से बदलते ट्रेंड अपनाने वाली पीढ़ी माना जाता है। यह पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण, समानता जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं। इसके साथ ही, राजनीति और सामाजिक घटनाओं में भी इसकी गहरी दिलचस्पी देखी जाती है।
7 – जनरेशन अल्फा : जन्म वर्ष – 2010–2024
2010 से 2024 के बीच जन्मे बच्चों को ‘जनरेशन अल्फा’ कहा जाता है। यह पहली ऐसी पीढ़ी है, जिसने सोशल मीडिया, स्मार्ट डिवाइस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों के साथ ही दुनिया देखी। इसलिए इन्हें अब तक की सबसे टेक-सेवी पीढ़ी माना जाता है। इस पीढ़ी के कई बच्चों का जन्म कोविड-19 महामारी के दौरान हुआ। ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल शिक्षा और वर्चुअल दुनिया इनके बचपन का हिस्सा रही। हालांकि तकनीक की बढ़ती निर्भरता के कारण स्क्रीन टाइम बढ़ने, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और आमने-सामने सामाजिक मेलजोल कम होने जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जनरेशन अल्फा आने वाले समय में शिक्षा, तकनीक और काम करने के तरीकों में बड़े बदलाव ला सकती है।
8 – जनरेशन बीटा : जन्म वर्ष – 2025 –2039
2025 से 2039 के बीच जन्म लेने वाले बच्चों को ‘जनरेशन बीटा’ कहा जायेगा या कहा जाता है। इस नई पीढ़ी को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों के बीच बड़ी होगी। जनरेशन बीटा के बच्चे ऐसी दुनिया में बड़े होंगे जहां एआई, स्मार्ट डिवाइस और डिजिटल कनेक्टिविटी रोजमर्रा की जिंदगी का सामान्य हिस्सा होंगे। माना जा रहा है कि यह पीढ़ी तकनीक में माहिर, बदलावों के अनुसार खुद को ढालने वाली, पर्यावरण के प्रति जागरूक और अपनी अलग पहचान को महत्व देने वाली हो सकती है।
9 – जनरेशन गामा : जन्म वर्ष: 2040–2054 (अनुमानित)
2040 से 2054 के बीच जन्म लेने वाले बच्चों को भविष्य में ‘जनरेशन गामा’ कहा जा सकता है। हालांकि, यह अभी केवल एक अनुमानित पीढ़ी है और इसकी कोई आधिकारिक परिभाषा नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि जनरेशन गामा ऐसी दुनिया में बड़ी होगी जहां आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI), स्मार्ट शहर और साझा अर्थव्यवस्था आम बात होगी। जलवायु परिवर्तन का असर भी उनके जीवन पर पहले से कहीं अधिक दिखाई दे सकता है। ऐसा भी माना जा रहा है कि इस पीढ़ी के लिए घर, कार या अन्य चीजों का मालिक होना उतना जरूरी नहीं होगा, क्योंकि जरूरत की अधिकांश चीजें साझा सेवाओं या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध हो सकती हैं।
पश्चिमी देशों से भारत में आया यह नाम
बेबी बूमर्स, जेन एक्स, जेन जी जैसे नाम अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों के सामाजिक और ऐतिहासिक अनुभवों के आधार पर दिए गए थे। भारत में इन्हें केवल अपनाया है। भारत में तकनीक, इंटरनेट और सामाजिक बदलाव पश्चिमी देशों की तुलना में कुछ वर्षों बाद आए, इसलिए कई मामलों में भारतीय पीढ़ियों के अनुभव इन वैश्विक परिभाषाओं से अलग हो सकते हैं।
जनरेशन या पीढ़ी के साल क्यों बदलते रहते हैं ?
पहले एक जनरेशन को करीब 20 से 30 साल का माना जाता था, क्योंकि लोगों की जीवनशैली, तकनीक और सामाजिक बदलाव बहुत धीरे-धीरे होते थे। लेकिन अब इंटरनेट, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और एआई जैसी तकनीकों ने कुछ ही वर्षों में लोगों की सोच और जीवनशैली बदल दी है। इसी वजह से अब कई रिसर्च संस्थान करीब 15 से 18 साल के अंतराल पर नई जनरेशन की पहचान करने लगे हैं। हालांकि, इसकी कोई कानूनी परिभाषा नहीं है। अलग-अलग संस्थान जन्म वर्षों में थोड़ा-बहुत अंतर भी बताते हैं।