जनसांख्यिकी पैनल का गठन

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[ अजय कुमार ]

  • जनगणना के बाद आबादी में हुए बदलावों का अध्ययन करेगा
  • राज्यों के लिए एक विस्तृत प्रश्नावली तैयार करेगा।

डेटा एकत्रित करेगी कमेटी
जनसांख्यिकीय बदलावों पर बनी हाई-लेवल कमेटी 2011 की जनगणना के बाद से आबादी में हुए बदलावों और बस्तियों में हुई बढ़ोतरी की जानकारी मांगेगी, साथ ही, वह चुनाव आयोग से एसआईआर (SIR) हटाने से जुड़ा डेटा भी मांगेगी।

सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली ‘जनसांख्यिकीय बदलावों पर उच्च-स्तरीय समिति’ (HLCDC) सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को प्रश्नावली भेजने की तैयारी कर रही है। इसमें 2011 की पिछली जनगणना के बाद से आबादी में हुए बदलावों और बस्तियों में हुई बढ़ोतरी की जानकारी मांगी जाएगी।

बदलाव का अध्ययन
सूत्र ने कहा, “हम बदलाव के पैमाने को समझने के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों की तुलना मौजूदा स्थिति से करेंगे और उन इलाकों का दौरा भी करेंगे। ये सवाल 2011 की जनगणना के बाद हुए बदलावों से जुड़े हैं।”

2011 के बाद होने वाली अगली जनगणना “जनगणना 2027” के अंतिम आंकड़े अभी आने बाकी हैं, यह जनगणना 16 साल के अंतराल के बाद हो रही है।

हाउस लिस्टिंग फिलहाल अधूरा
जनसंख्या जनगणना 2027 का पहला चरण, यानी हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग ऑपरेशन्स (HLO) अभी देश के कई हिस्सों में चरणों में किया जा रहा है और आखिरी चरण, यानी जनसंख्या की गिनती 1 मार्च 2027 को पूरा होगा। HLO से गिनती वाले इलाकों (एन्यूमरेशन ब्लॉक्स) में बस्तियों और अनुमानित आबादी का ठीक-ठाक अंदाज़ा मिल सकता है और यह इस साल 30 सितंबर को खत्म होगा।

पैनल एक ईमेल एड्रेस भी जारी करेगा जिस पर लोग इस प्रक्रिया के बारे में अपने सुझाव या फ़ीडबैक भेज सकेंगे।

एसआईआर में काटे गये नाम ईसीआई से
पैनल भारत के चुनाव आयोग से उन लोगों के नाम भी मांगेगा जिन्हें ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था और साथ ही उन्हें हटाने की वजहें भी पूछेगा। सूत्रों के मुताबिक, हटाए गए लोगों की जानकारी से पैनल को देश में “अवैध प्रवासियों” की संख्या का अंदाज़ा लगाने में मदद मिलेगी।

अब तक 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UT) में SIR का काम पूरा हो चुका है। वोटर लिस्ट को अपडेट करने की यह प्रक्रिया दस्तावेज़ों पर आधारित है। SIR की आलोचना इसलिए भी हुई है क्योंकि इसमें सबूत देने की ज़िम्मेदारी वोटरों पर डाली गई, इस प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग राज्यों में वोटर लिस्ट से 6.5 करोड़ नाम (लगभग 11%) हटा दिए गए, जबकि SIR शुरू होने से पहले कुल वोटरों की संख्या 58.88 करोड़ (13 राज्य और यूटी) थी।

गृहमंत्री के मार्ग निर्देशन में जनगणना
गृह मंत्रालय के 01 जुलाई के बयान के अनुसार, 25 जून को पैनल ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की और उन्हें राज्यों का दौरा करने और अलग-अलग केंद्रीय मंत्रालयों से बातचीत करने के अपने फ़ैसले के बारे में बताया। इस दौरे और बातचीत का मकसद जनसंख्या में बदलाव से जुड़े मुद्दों पर ज़मीनी स्तर की जानकारी और फ़ीडबैक हासिल करना है।

मंत्री ने पैनल की बनाई रणनीति की तारीफ़ करते हुए केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को निर्देश दिया कि वे समिति को उसके रोज़मर्रा के काम और दौरों के दौरान हर संभव मदद दें। गृहमंत्री शाह ने सुझाव दिया कि पैनल जल्द से जल्द अपनी सिफ़ारिशें दे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2025 को स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में “हाई-पावर्ड डेमोग्राफ़ी मिशन” की घोषणा की थी। 26 मई को मंत्रालय ने अवैध आप्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने और उनसे निपटने के उपाय सुझाने के लिए समिति का गठन किया।

अधिसूचना
मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि पैनल “देश में पहले से रह रहे अवैध आप्रवासियों की कानूनी, निष्पक्ष और समयबद्ध पहचान, हिरासत और निर्वासन के लिए एक सुव्यवस्थित और स्थायी संचालन प्रणाली” की भी सिफ़ारिश करेगा।

मंत्रालय ने कहा था कि मौजूदा संस्थागत ढांचा ऐसी जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) बदलावों का समन्वित, सबूत-आधारित और समयबद्ध तरीके से मूल्यांकन और प्रतिक्रिया करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है। साथ ही, यह भी कहा गया कि जनसांख्यिकीय बदलावों से कई बड़ी चुनौतियां पैदा हुई हैं, जिनमें अवैध आव्रजन (illegal immigration) के कारण उत्पन्न चुनौतियां भी शामिल हैं।

रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता में…
इस पैनल की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नवलेकर (रिटायर्ड) कर रहे हैं।

समिति के सदस्यों में जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, जो उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव रह चुके हैं; रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव, जो ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D) के महानिदेशक पद से रिटायर हुए और शमिका रवि, जो प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद का हिस्सा हैं, शामिल हैं। मंत्रालय में संयुक्त सचिव (विदेशी-I) इस समिति के सदस्य सचिव हैं।


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