
[ अजय कुमार ]
- एस आई टी जांच की अवधि 15 जुलाई तक…
- चंपत राय पर लटकी तलवार…
- 6 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक…
- विहिप ने माना- ‘दोषी’…
पता नहीं किसने चंपत को ट्रस्ट में शामिल किया…
चंपत राय विश्व हिन्दू परिषद के उपाध्यक्ष है, विहिप के अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि चंपत लापरवाही के दोषी हो सकते हैं। उन्हें ट्रस्ट में किसने शामिल किया, विहिप को पता नहीं, अब सभी की नज़रें 6 जुलाई बैठक पर है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सामने आए चढ़ावा चोरी के बड़े मामले के बाद प्रशासनिक और कानूनी मोर्चों पर हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां पुलिस जांच में आरोपियों के चौंकाने वाले तौर-तरीकों का खुलासा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के भविष्य को लेकर 6 जुलाई को एक बेहद अहम और आपातकालीन बैठक बुलाई गई है।
6 जुलाई की बैठक में क्या होगा ?
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद आगामी 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व में हुई गड़बड़ी के कारण नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे चुके महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर अंतिम फैसला ट्रस्ट के बायलॉज या उपनियमों के अनुसार मतदान के जरिए लिया जाएगा।
वीएचपी का चंपत राय पर ताज़ा विचार
विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने आज गुरुवार 2 जुलाई को एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया है कि राम मंदिर में हुई इस चोरी के लिए वीएचपी जिम्मेदार नहीं है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर का संचालन ट्रस्ट का काम है, वीएचपी का नहीं।
लापरवाही की बात कबूली
आलोक कुमार ने स्वीकार किया कि वीएचपी के अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय इस मामले में ‘लापरवाही के दोषी’ हो सकते हैं, क्योंकि एक आरोपी टिन्नू यादव उनका ही ड्राइवर था और उसी के पास स्ट्रॉन्ग रूम की चाबियां होती थीं।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
आलोक ने कहा कि एफआईआर में स्पष्ट लिखा है कि जांच सिर्फ गिरफ्तार 8 लोगों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर उस व्यक्ति की जांच होगी, जिसका नाम सामने आ रहा है। वीएचपी चंपत राय के खिलाफ कोई भी अंतिम फैसला या उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई एसआईटी जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही करेगी।
ट्रस्ट कैसे हटायेगा चंपत राय और अनिल मिश्रा को
दोनों पदाधिकारियों का इस्तीफा स्वीकार करने के लिए ट्रस्ट में दो-तिहाई बहुमत का होना अनिवार्य है।
ट्रस्ट के बायलॉज के तहत किसी पदाधिकारी को केवल उसके पद और दायित्व से मुक्त किया जा सकता है। यदि चंपत राय को महासचिव पद से हटाया भी जाता है, तो भी वह ट्रस्ट के सदस्य बने रहेंगे। यही नियम अन्य सभी पदाधिकारियों पर भी लागू होता है।
12 ट्रस्टियों की राय वर्तमान में ट्रस्ट के कुल 14 सदस्यों में से 2 ने इस्तीफा दे दिया है (अगस्त 2025 में सदस्य बिमलेंद्र मोहन मिश्रा के निधन के बाद खाली पद के विकल्प पर भी विचार होगा), इसलिए इस बैठक में 12 ट्रस्टियों की राय ली जाएगी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भैयाजी जोशी और विश्व हिंदू परिषद के दिनेश चंद्र, पूर्व की तरह आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा विहिप के राष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा और केंद्रीय संगठन मंत्री मिलिंद परांडे को भी आमंत्रित किया जा सकता है। यदि इन्हें मतदान का अधिकार मिलता है, तो इनकी भूमिका निर्णायक होगी।
पहले भी हुआ है मतदान
इससे पहले रामलला की मूर्ति के चयन के समय भी ट्रस्ट ने मतदान कराई थी, जहां 15 में से 11 ट्रस्टियों ने मूर्तिकार अरुण योगीराज की प्रतिमा के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि, ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास का मानना है कि ट्रस्ट में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है।
चोरी का रुपया मंदिर के शौचालय में छुपाया जाता था
अयोध्या पुलिस की हिरासत में हो रहे, पूछताछ में गिरफ्तार मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला ने करीब दो घंटे की पूछताछ में चोरी के बेहद शातिराना तरीके का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने आरोपी का सामना सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयानों और बरामदगी के रिकॉर्ड से कराया, जिसके बाद उसने निम्नलिखित खुलासे किए –
रेकी और रूपरेखा आरोपियों ने पहले दान – गिनती केंद्र (donation-counting centre) के ले-आउट, सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन, आने-जाने के रास्तों और स्टाफ की आवाजाही के पैटर्न का बारीकी से अध्ययन किया था।
शौचालय का इस्तेमाल – गिनती के दौरान जो कैश गायब किया जाता था, उसे पहले मंदिर परिसर के भीतर ही बने वॉशरुम (शौचालय) में छुपा दिया जाता था। इसके बाद पकड़े जाने के डर से उसे छोटी-छोटी किश्तों में धीरे-धीरे बाहर निकाला जाता था। पुलिस अब इस संबंध में वहां तैनात सफाई और रखरखाव कर्मियों से भी पूछताछ करेगी।
मानव ढाल का प्रयोग – आरोपियों को सीसीटीवी के ‘ब्लाइंड स्पॉट्स’ (जहां कैमरा न देख पाए) की अच्छी समझ थी। जब एक आरोपी गड्डियां साफ कर रहा होता था, तब बाकी आरोपी कैमरों की नजरें रोकने के लिए उसके चारों तरफ खड़े होकर एक इंसानी दीवार बना लेते थे।
सुरक्षित कमरे की चाबी का खेल – अविनाश शुक्ला ने बताया कि बेहद सुरक्षित मानेजाने वाले काउंटिंग रूम की दो चाबियों में से एक चाबी सह-आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नु के पास रहती थी, जबकि उसका गिनती से कोई लेना-देना नहीं था। दूसरी चाबी बैंक अधिकारियों के पास रहती थी।
वित्तीय लेनदेन की गहन जांच
पुलिस इस मामले में वित्तीय लेन-देन और मनी ट्रेल की गहनता से जांच कर रही है। आशंका है कि गबन किए गए पैसों को जमीन, हॉस्टल और आवासीय संपत्तियों में निवेश किया गया है। अब तक गिरफ्तार 8 आरोपियों के पास से कुल 79.85 लाख रुपये नकद, 1,121 अमेरिकी डॉलर और सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए जा चुके हैं।
किस आरोपी से कितना बरामद हुआ

- अविनाश शुक्ला – ₹20.39 लाख, 1,121 अमेरिकी डॉलर, दो सोने की चेन, एक सोने की अंगूठी और चांदी जैसी धातु की वस्तु।
- करुणेश पांडे – ₹18.07 लाख
- अनुकल्प मिश्रा – ₹16.82 लाख
- लव कुश मिश्रा – ₹14.25 लाख
- रमाशंकर मिश्रा – ₹7.32 लाख
- मनीष यादव – ₹2 लाख
- रामशंकर यादव उर्फ टिन्नु – ₹1 लाख
- सुभाष श्रीवास्तव – इनके आवास से कोई बरामदगी नहीं हुई है।
भूंसे के ढेर में चोरी का रुपया
पुलिस ने हाल ही में आरोपी लव कुश मिश्रा के रुदौली कोतवाली अंतर्गत ठाकुरान भगौली गांव स्थित पैतृक आवास पर सघन तलाशी ली। इस दौरान घर के साथ-साथ भूसे के ढेर और उपलों (कंडों) के बीच भी कैश और सबूतों की तलाश की गई।
15 जुलाई तक जांच की अवधि बढ़ाई गयी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के अनुरोध को स्वीकार करते हुए इसकी समय-सीमा 15 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी है। इस एसआईटी का गठन 13 जून को राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर किया गया था, जिसमें लखनऊ के मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी लखनऊ रेंज किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन कुमार शामिल हैं। इसी टीम की 23 जून की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद सभी आठ आरोपियों को जेल भेजा गया।