किसानों के जीवन में गतिरोध : गुजरात में अडानी का विरोध

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[ अजय कुमार ]

  • गुजरात में अडानी पावर ट्रांसमिशन के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन…
  • टीवी पर खबर दिखी क्या आपको?…

गुजरात के मोरबी में पाटीदार किसान अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस की हाई-वोल्टेज बिजली ट्रांसमिशन लाइन के बदले उचित जमीन मुआवजे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

मीडिया में खबर गायब…
किसानों के प्रदर्शन को कई दिन हो चुके हैं। लेकिन टीवी चैनलों पर आपको यह खबर नहीं दिखी होगी। गुजरात के पाटीदार बहुल क्षेत्र मोरबी में किसानों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। कच्छ जिले के खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी जोन से बिजली लाने के लिए बिछाई जा रही हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों के खिलाफ किसान 17 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। जलते हुए 40 डिग्री तापमान के बीच जेटपर गांव में ‘उपवास छावनी’ बनाकर प्रदर्शन कर रहे इन किसानों का कहना है कि अडानी समूह की कंपनी द्वारा उनकी जमीनों पर लगाए जा रहे टावरों के बदले उन्हें नाममात्र का मुआवजा दिया जा रहा है।

इस आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विरोध प्रदर्शन करने वालों में खुद गुजरात सरकार के कैबिनेट मंत्री के दो सगे भाई शामिल हैं, और जिले के 35 से अधिक पंचायत प्रमुखों (सरपंचों) ने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है।

मोरबी के किसान आंदोलन की कुछ खास बातें

  • मुख्य रूप से पाटीदार समाज के किसान, जिनमें लगभग 100 लोग (आधी महिलाएं) जेटपर गांव के बस स्टैंड के पास शामियाने के नीचे धरने पर बैठे हैं। कब से जारी है
  • विरोध प्रदर्शन 9 जून को एक प्रतीकात्मक उपवास के रूप में शुरू हुआ था, जो स्थानीय पुलिस के साथ झड़पों के बाद 17 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में तब्दील हो गया।
  • 19 जून को करीब 15 किसानों ने अपना सिर मुंडवाकर विरोध जताया था।
  • यह विरोध ‘हलवद ट्रांसमिशन लिमिटेड’ (जो अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) की एक विशेष प्रयोजन वाहन यानी SPV कंपनी है) द्वारा कच्छ के खावड़ा से मोरबी के हलवद तक 246 किलोमीटर लंबी 756 kV DC लाइन और टावर लगाने के खिलाफ है।
  • मोरबी के भाजपा विधायक और राज्य के श्रम, कौशल विकास और रोजगार मंत्री कांतिलाल अमृतिया के दो सगे भाई 57 वर्षीय राकेशभाई शिवलाल अमृतिया और 51 वर्षीय भरतभाई अमृतिया भी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। राकेशभाई का कहना है कि उनके मंत्री भाई ने समाधान की कोशिश की थी, लेकिन सरकार के उच्च स्तर पर इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिख रही है।

मुआवजा बहुत कम है…
65 वर्षीय किसान रामजीभाई नंजीभाई भादजा ने बताया कि जेटपर गांव में राज्य राजमार्ग के पास स्थित उनकी 12 बीघा जमीन (जिसकी बाजार कीमत लगभग 40 लाख रुपये प्रति बीघा है) का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा इस टावर और केबल की चपेट में आ रहा है। हालांकि जमीन का मालिकाना हक उन्हीं के पास रहेगा, लेकिन टावर खड़े होने के बाद वहां खेती करना असंभव हो जाएगा और कोई खरीदार भी नहीं मिलेगा। इसके बदले उन्हें 8.3 बीघा के लिए महज 30 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है, जो बेहद कम है।

पुलिसिया कार्यवाही से नाराज किसान
किसानों का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों में महिलाओं और बच्चों को पुलिस द्वारा हिरासत में भी लिया गया है। वहीं मोरबी के एसपी एम. एन. पटेल का कहना है कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है, इसलिए पुलिस नरमी बरत रही है। हाईवे जाम करने की कोशिश पर कुछ गिरफ्तारियां हुई थीं, लेकिन किसी भी नाबालिग को हिरासत में नहीं लिया गया।

किसानों की 6 प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी किसानों ने सरकार के सामने छह सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें मुख्य रूप से राजस्थान सरकार की तर्ज पर मुआवजा देने की बात कही गई है –

1. बाजार दर समिति का गठन
जमीन की वास्तविक बाजार कीमत तय करने के लिए एक कमेटी बनाई जाए, न कि सरकार की जंत्री (सर्कल) दरों के आधारपर मूल्यांकन हो।

2. टावर क्षेत्र के लिए 400 प्रतिशत मुआवजा
केंद्रीय परिपत्र (सर्कुलर) के अनुसार टावर क्षेत्र के लिए बाजार मूल्य का 200 प्रतिशत तय है, लेकिन हाई-वोल्टेज लाइन होने के कारण राजस्थान की तर्ज पर 400 प्रतिशत मुआवजा दिया जाए।

3. राइट ऑफ वे कॉरिडोर के लिए मुआवजा
बिजली लाइनों के आसपास के सुरक्षित क्षेत्र (ROW) के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 230 प्रतिशत नगरपालिका क्षेत्रों में 245 प्रतिशत और नगर निगम क्षेत्रों में 260 प्रतिशत मुआवजा दिया जाए।

4. एकमुश्त अग्रिम भुगतान
पूरा मुआवजा एडवांस में और एक ही किस्त में दिया जाए।

5. कलेक्टर द्वारा कार्यवाही
ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता द्वारा आदेश जारी करने के बाद ही कलेक्टर द्वारा कानूनी कार्यवाही शुरू की जाए।

6. केंद्रीय दिशानिर्देशों का पालन
अन्य सभी मुद्दों पर गुजरात ऊर्जा विभाग केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार परिपत्र जारी करे।

सरकार और अडानी ग्रुप का पक्ष
मोरबी जिला कलेक्टर स्वप्निल खरे (जो जिला स्तरीय मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष हैं) ने कहा कि सरकार ने 28 जून को किसानों को बातचीत के लिए बुलाया था और उनकी मांगें विचाराधीन हैं, लेकिन किसानों की ओर से कोई जवाब नहीं आया। दूसरी ओर, किसानों का कहना है कि सरकार पहले लिखित में उनकी मांगें स्वीकार करे, तभी वे बातचीत करेंगे।

भूख हड़ताल के कारण बीमार हुए एक किसान नीलेशभाई एरवाड़िया को आईसीयू में भी भर्ती कराना पड़ा था, जिनका 16 किलो वजन कम हो गया था।

गुजरात सरकार के प्रवक्ता और कृषि मंत्री जीतू वाघानी ने गांधीनगर में कहा कि मुख्यमंत्री के स्तर पर लगातार चर्चा चल रही है। मुख्यमंत्री इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील हैं और जल्द ही किसानों के हित में एक “अच्छा फैसला” लिया जाएगा।

अडानी ग्रुप के प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने सरकारी दिशानिर्देशों और मौजूदा मानदंडों के अनुसार ही जमीन मालिकों को मुआवजे की पेशकश की है, लेकिन कुछ किसान तय नियमों से ज्यादा मुआवजे की मांग कर रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा सभी पक्षों की सुनवाई के बाद मुआवजा तय कर दिया गया है और काम आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी गई है। प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि “कुछ निहित स्वार्थी तत्व” किसानों को भड़का रहे हैं।

किसान जिंदाबाद
फिलहाल, बारिश से बचने के लिए किसानों ने अपनी उपवास छावनी को पास के राम वाड़ी हॉल में स्थानांतरित कर दिया है और ‘किसान जिंदाबाद’ के नारों के साथ उनका धरना प्रदर्शन लगातार जारी है।


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