राज्यसभा चुनाव 2026: दो नये राज्यसभा सदस्य छत्तीसगढ़ से

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रायपुर/नई दिल्ली : 2026 में 245 सदस्यीय राज्यसभा में से लगभग 75 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, राज्यसभा चुनाव भारत की संसद के ऊपरी सदन के नियमित छह वर्षीय चक्र के हिस्से के रूप में आयोजित किए जाएंगे, जिसमें से राज्य अपने विधायकों के माध्यम से 233 का चुनाव करते हैं।

मोदी सरकार के छ: मंत्री

2026 में मोदी सरकार के छह मंत्रियों का भी राज्यसभा टर्म पूरा होगा। इनका टर्म ऐसे समय पूरा होगा जब मोदी सरकार में बड़े बदलाव की भी संभावना बतायी जा रही है।

10 राज्य और 37 रास सदस्य

अप्रैल 2026 में 10 राज्यों में राज्यसभा की कुल 37 सीटें रिक्त हो जाएंगी। महाराष्ट्र में सात सीटें, तमिलनाडु और बिहार में छह-छह, पश्चिम बंगाल में पांच, असम में तीन, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में दो-दो, ओडिशा में चार और हिमाचल प्रदेश में एक सीट रिक्त होगी, चुनाव आयोग ने इन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर चुनाव प्रक्रिया की देखरेख के लिए रिटर्निंग अधिकारियों की नियुक्ति हेतु प्रस्ताव मांगे हैं।

छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की 5 में से 2 सीटें 9 अप्रैल 2026 को रिक्त होने जा रही हैं। इनमें फूलो देवी नेताम और केटीएस तुलसी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

विधानसभा बजट सत्र
23 फरवरी 2026 से छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र प्रारंभ हो रहा है पूर्ण संभावना है कि मार्च 2026 में दोनों रिक्त हो रहे राज्यसभा के पदों का निर्वाचन होगा, जिसमें स्पष्ट है कि एक सीट भाजपा के झोली में आएगी और एक सीट कांग्रेस के झोली में जाएगी।

आवाज बुलंद करे बस्तरवासी
बस्तर संभाग में जनसंघ से लेकर जनता पार्टी और फिर भाजपा तक अपना तन मन धन और समर्पण के साथ पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए संघर्ष करने वाले सामान्य वर्ग के लोगों को भाजपा नेतृत्व के सामने यह आवाज उठानी ही चाहिए कि बस्तर संभाग से सामान्य वर्ग को अब राज्यसभा के लिए प्रतिनिधित्व दिया जावे, क्योंकि बस्तर संभाग के दोनों लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।

बस्तर संभाग की 12 विधानसभा क्षेत्र में से 11 विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है, एकमात्र सीट जगदलपुर की सामान्य है। पुनः होने वाले परिसीमन में कहीं जगदलपुर भी आरक्षित ना हो जावे।

बस्तर में सामान्य वर्ग उपेक्षित
संघर्षरत् सामान्य वर्ग के भाजपा कार्यकर्ताओं को अब यह आवाज बुलंद करनी चाहिए, वर्तमान भाजपा के केन्द्रीय और प्रदेश नेतृत्व के समक्ष मिलजुलकर बात रखनी होगी।

बस्तर संभाग को सौभाग्य से प्रदेश अध्यक्ष मिला हुआ है भविष्य में क्या होगा, किसी ने देखा नहीं है, बस्तर संभाग के सामान्य वर्ग का पूरा हक बनता है प्रदेश नेतृत्व के सामने ताकत से बात को रखें, क्योंकि चयन समिति में प्रदेश स्तर के नेतागण भी उपस्थित रहेंगे।

सामने आये बस्तर भाजपा संगठन
बस्तर संभाग के सभी सातों संगठन के जिला पदाधिकारियों को भी प्रदेश नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष सामान्य वर्ग के कार्यकर्ताओं की भावना से अवगत करवायें, आपस में ही चर्चा करने और मन खिन्न रखने से समय शून्य और स्थिर ही रहेगा, नहीं तो प्रदेश नेतृत्व ओबीसी, एससी या एसटी वर्ग के कार्यकर्ताओं के नाम पर ही विचार करके, अनुमोदित कर नई दिल्ली भेज देगी, चुप्पी में 6 वर्ष इंतजार करना होगा।


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