जुमला : अब डोनाल्ड ट्रम्प भी बोलने-फेंकने लगा

Spread the love


[ अजय कुमार ]

दुनिया पर अपनी चौधराहट की लालसा ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का दिमाग खराब कर रखा है, यह बात अलग है कि एक खराब दिमाग ने सारी दुनिया की सभी व्यवस्था खराब कर दिया है और यही मुख्य कारण है कि अमेरिका के मित्र देश भी अब दूरी बना लिए है। ट्रम्प का एक ही समय में अलग-अलग बयान, यह सिद्ध करता है कि उसके अस्थिर मति ( fickle minded ) ने वैश्विक अराजकतावाद को जन्म दे दिया है।
आगे पढ़ेंगे तो शीर्षक का अर्थ समझ जायेंगे…
अमेरिका दो या तीन हफ़्तों में ईरान छोड़ देगा : ट्रम्प
बीबीसी की अपडेट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका दो या तीन और हफ़्तों में ईरान को छोड़ देगा और साथ ही यह भी दावा किया कि वह देश समझौता करने के लिए गिड़गिड़ा रहा है। ओवल ऑफिस में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ कोई भी समझौता अब प्रासंगिक नहीं है और वे ईरान को तभी छोड़ेंगे, जब उन्हें यह पक्का यकीन हो जाएगा कि वहां की सरकार सालों तक कोई परमाणु हथियार नहीं बना सकती।
अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनायेगा रिवोल्यूशनरी गार्ड्स


रॉयटर्स के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने मंगलवार को कहा कि ईरान पर हुए हमलों के बदले में वे 01 अप्रैल से इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाएंगे, यह जानकारी ईरान की सरकारी मीडिया ने दी।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की धमकी वाली सूची में 18 कंपनियाँ शामिल थीं, जिनमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एपल, इंटेल, आईबीएम, टेस्ला और बोइंग प्रमुख हैं।
फ्रांस ने हवाई क्षेत्र बंद किया
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि इज़राइल के लिए सैन्य साजो-सामान ले जा रहे अमेरिकी विमानों को फ्रांसीसी हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि यूनाइटेड किंगडम सहित अन्य देशों को अपने लिए लड़ना सीखना चाहिए और अपने ईंधन की व्यवस्था खुद करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि अब अमेरिका उनकी मदद के लिए मौजूद नहीं रहेगा।
अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला
इस बीच, जैसा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध दूसरे महीने में प्रवेश कर गया, ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ द्वारा उद्धृत अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने इस्फ़हान में एक बड़े गोला-बारूद डिपो पर 2,000 पाउंड के बंकर-बस्टर बमों का उपयोग करके हमला किया, वहीं, रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, नए हमलों, टैंकरों पर हमलों और बढ़ती वैश्विक आर्थिक चिंताओं के साथ क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया।
शांति प्रस्ताव अवास्तविक
ईरान के एक प्रमुख सैन्य केंद्र, इस्फ़हान में हुए इस हमले के कारण कथित तौर पर कई और धमाके हुए, ठीक उसी समय जब तेहरान ने संकेत दिया कि वह अमेरिका के हालिया शांति प्रस्तावों को अवास्तविक मानता है। ये घटनाक्रम ईरान और इजरायल के बीच लगातार हो रही गोलीबारी और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सामने आए हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर को ध्वस्त करेगा अमेरिका
ट्रंप ने कहा कि अगर बातचीत नाकाम रहती है, तो वॉशिंगटन ईरान के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा। उन्होंने कहा, अगर वे कोई डील नहीं करते… तो हम उनकी एनर्जी साइट्स को तबाह कर देंगे और साथ ही यह भी जोड़ा कि अमेरिका पावर प्लांट्स, तेल के कुओं और संभवत पानी को मीठा बनाने वाली सुविधाओं पर हमला कर सकता है।
ट्रम्प कहता है बातचीत हुई : ईरान कहता है कोई बातचीत नहीं हुई
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि गंभीर बातचीत चल रही है और उन्होंने ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ के साथ बातचीत होने की पुष्टि भी की, जबकि ईरान ने सीधे बातचीत होने से इनकार किया था। उन्होंने किसी डील के लिए 6 अप्रैल की डेडलाइन तय की है और उन जगहों पर और हमले करने की चेतावनी दी है, जिनसे अमेरिका अब तक बचता रहा है।


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *