[ अजय कुमार ]
नई दिल्ली :
भारत के पूर्व रॉ चीफ विक्रम सूद ने इजराइल/अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच भारत के लिए गंभीर आर्थिक संकट की चेतावनी दी है, तेल और खाद की कमी से देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है।
पश्चिम एशिया में छाये युद्ध के बादलों ने अब भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं, इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच पिछले एक महीने से जारी भीषण संघर्ष पर रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (राॅ) के पूर्व प्रमुख विक्रम सूद ने एक बड़ी और डरावनी चेतावनी जारी की है। सूद का कहना है कि यदि यह संघर्ष इसी तरह जारी रहा, तो भारत को न केवल ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा, बल्कि देश में महंगाई का एक नया दौर भी शुरू हो सकता है।
2-3 महीने में दिखेगा असर

एएनआई के वरिष्ठ पत्रकार से विशेष बातचीत के दौरान सूद ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए असली चुनौती आने वाले दो से तीन महीनों में सामने आएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत के पास तेल और फर्टिलाइजर का स्टॉक फिलहाल सीमित है, उन्होंने कहा कि देश का अधिकांश एलएनजी कतर से आता है और तेल का बड़ा हिस्सा अरब व पश्चिम एशिया के देशों से आता है।
यदि युद्ध के कारण यह आपूर्ति रुकती है या निरंतरता टूटती है या ऊंची दरों पर मिलती है, तो भारत में महंगाई पर काबू पाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
भारत की रणनीतिक मजबूरी
पूर्व रॉ चीफ ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज‘ के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत अपनी व्यापारिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस रास्ते पर निर्भर है, हालांकि उन्होंने इजरायल को भारत का एक गहरा और महत्वपूर्ण सुरक्षा सहयोगी बताया लेकिन ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत को ‘दुर्भाग्यपूर्ण हत्या’ करार दिया। सूद के अनुसार अमेरिका का इस संघर्ष में शामिल होना एक देश के खिलाफ ‘अघोषित युद्ध’ जैसा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों को ताक पर रखकर किया जा रहा है।
इजरायल और अमेरिका की ‘बड़ी भूल’
विक्रम सूद का कहना है कि अमेरिका-इजरायल ने शुरू से ही ईरान की ताकत और उसकी स्थिति को समझने में गलती की है, उन्होंने कहा कि ईरान इस दबाव का मजबूती से सामना कर रहा है। भू-राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि यह पूरी योजना ईरान के अस्तित्व को खत्म कर पूरे क्षेत्र की कमान इजरायल को सौंपने की हो सकती है। सूद ने कहा कि भारत का रुख इस मामले में बहुत स्पष्ट है हम होर्मुज के रास्ते पर निर्भर हैं और यह संकट हम पर बेवजह थोपा गया है।
युद्ध के मैदान से ताजा हालात
युद्ध इस चरम पर पहुंच गया है कि आज मंगलवार को अमेरिकी हमलों में ईरान के इस्फहान शहर में स्थित एक प्रमुख परमाणु ठिकाने को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में तेहरान ने दुबई तट के पास एक कुवैती तेल टैंकर पर हमला किया है। इन हमलों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता पैदा हो गई है, जिसका सीधा असर भारतीय हवाई किराए और सामान्य परिवहन लागत पर पड़ने की आशंका है। केन्द्र सरकार ने पहले ही राज्यों से इस स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने की अपील कर चुकी है।
पूर्व वित्त सचिव ने क्या ? सच कहा !
भारत के एक पूर्व वित्त सचिव, जिसने दो साल तक वित्त मंत्रालय में अपनी सेवायें दी, उसने नाम ना उजागर करने की शर्त पर बताया कि डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये की कथा तो सारी दुनिया देख समझ रही है, भारत सरकार में एक भी ऐसा राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारी है, जो भारतीय अर्थ व्यवस्था पर खुलकर बोल सके।
उन्होंने कहा कि 20 जनवरी 2025 को डोनाल्ड ट्रम्प के शपथ लेने के बाद, जनता से झूठ बोलने के मामले में भारतीय सत्तारूढ़ राजनीतिक, दूसरे नंबर पर आ गये।
भारत में 85-89 प्रतिशत ईंधन उर्जा का आयातित
भारत की ईंधन उर्जा का 85-89 प्रतिशत विदेश से आयात होता है और भारत की जनसंख्या विश्व जनसंख्या का 17 प्रतिशत है, हालांकि भारत तेल उपभोग में विश्व में भले ही चौथे स्थान पर है, सामाजिक व्यवस्था ऐसी है कि तेल सप्लाई की निरंतरता यदि टूट जाये, तो भारतीय अर्थ तंत्र कंगाली मे कगार पर जा पहुंचेगा, जिसे संभालना वर्तमान भारत सरकार के लिए असंभव हो जायेगा।
झोला में रुपया लायें : मुट्ठी में अनाज ले जायें
यह भारत के लिए विशेष संदेश और दुनिया को विशेष चेतावनी है।