मोदी सरकार के इस्तीफे का संवैधानिक संकट नहीं

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[ अजय कुमार ]

आज 17अप्रैल2026 को लोकसभा में पेश किए गए महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के हारने (दो-तिहाई बहुमत न मिलने) के बाद प्रधानमंत्री के इस्तीफे को लेकर संवैधानिक और राजनीतिक चर्चाएं गर्म हैं।

संसोधन विधेयक की हार…
लोकसभा में महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के संशोधन) और परिसीमन को जोड़ने वाले 131वें संविधान संशोधन विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि 352 मतों की आवश्यकता थी, चूँकि यह एक संवैधानिक संशोधन बिल था, इसलिए इसे पारित होने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, जो सरकार हासिल नहीं कर पाई।

परिणामस्वरूप, विपक्ष ने इसे सरकार की बड़ी हार और संवैधानिक संशोधन के रूप में देखा है।
क्या प्रधानमंत्री इस्तीफा देंगे ?
संवैधानिक मान्यताओं के अनुसार, इसका उत्तर जटिल है।

संविधान क्या कहता है ? यह एक ‘संविधान संशोधन विधेयक’ था। यदि सरकार इसे पारित कराने में विफल रहती है, तो यह सरकार की नीतिगत विफलता मानी जाती है, लेकिन यह अनिवार्य रूप से सरकार के इस्तीफे का कारण नहीं बनता है, जब तक कि वह ‘अविश्वास प्रस्ताव’ न हो।


राजनीतिक परिदृश्य के दृष्टिकोण से, यदि सरकार को यह महसूस हो कि उसने सदन का विश्वास खो दिया है या यदि यह विधेयक सरकार के एजेंडे का मुख्य हिस्सा था, तो विपक्षी दल सामूहिक जिम्मेदारी के तहत इस्तीफे की मांग कर सकते हैं।

अभी तक सरकार या प्रधानमंत्री की ओर से इस्तीफे का कोई आधिकारिक संकेत नहीं है।
दो बिल वापस लिये…
महिला आरक्षण से संबंधित संशोधन विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो पाया, जो कि सरकार के लिए एक बड़ा झटका है।

शेष दो बिल वापस लेने के पीछे कोई समवैधानिक संकट नहीं, बल्कि परिसीमन की राजनीति पर आम सहमति न बन पाने के कारण पैदा हुए, विधायी संकट था, जिसके बाद सरकार ने समझदारी-पूर्वक बिल वापस ले लिए।


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