[ अजय कुमार ]
- महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर संसद में सदस्यों का अंकगणित क्या है ?…
- लोकसभा व राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत से सरकार कितनी दूर है…
- क्या विपक्ष के बिना यह बिल पास हो पाएगा ?…
नई दिल्ली :
“संसद का विशेष सत्र” 16 अप्रैल मतलब आज से शुरू हो रहा है, जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) में संशोधन और परिसीमन से जुड़े विधेयक पेश किए जाने हैं, चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है, इसलिए इसे पारित कराने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए।
लोकसभा का गणित
लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 है, दो-तिहाई बहुमत के लिए सरकार को 360 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
एनडीए के पास अभी –
भाजपा – 240
टीडीपी – 16
जेडीयू – 12
शिवसेना – 7
अन्य सहयोगी – 18
कुल = 293 सांसद
अर्थात् सरकार 360 के आंकड़े से 67 सांसद दूर है।
राज्यसभा का गणित
राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 है, दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसद जरूरी हैं।
एनडीए के पास –
भाजपा – 106
जेडीयू – 4
टीडीपी – 2
शिवसेना – 2
अन्य सहयोगी – 20
कुल = 134 सांसद
अर्थात् सरकार 29 सांसदों की कमी में है।
विपक्ष का समर्थन क्यों महत्वपूर्ण है…
संसद में विपक्षी दल महिला आरक्षण के समर्थन की बात तो कर रहे हैं, लेकिन उसको परिसीमन से जोड़ने का विरोध कर रहे हैं, ऐसे में अगर विपक्ष साथ नहीं आयेगा, तो सरकार के लिए विधेयक पारित कराना आसान नहीं होगा।
महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए सरकार के पास फिलहाल दोनों सदनों में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं है, ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर तेज सियासी मोलभाव और विरोध और समर्थन का दौर देखने को मिल सकता है।
प्रधानमंत्री…एक्स पर…

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के विशेष सत्र की बैठक की शुरुआत से पहले महिला सशक्तीकरण को लेकर बड़ा संकेत दिया है, सोशल मीडिया एक्स पर अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि इस विशेष सत्र में देश नारी सशक्तीकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है, उन्होंने जोर देते हुए कहा कि माताओं और बहनों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है और इसी भावना के साथ सरकार इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रही है, अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत के एक श्लोक का भी उल्लेख किया, जो नारी शक्ति के तेज और उसकी महत्ता को दर्शाता है।