[ अजय कुमार ]
भरी गर्मी में सुशासन तिहार और मंत्रालय में आपसी समन्वय का अभाव
- 21वीं सदी में सबका मालिक एक नहीं बल्कि अनेक मालिक….
- सरकार का एक विभाग दूसरे विभाग को ₹360 रुपये नहीं दे सकती…
- बजट आबंटन आड़े आ गया, मंत्री का नाम लक्ष्मी, किन्तु महिलाओं के लिये लक्ष्मी नहीं…
- आईएएस की नौकरी छोड़ नेतागिरी मे उतरे वित्तमंत्री को ध्यान में रखना चाहिए…
- उच्च शिक्षित वित्तमंत्री, विभागीय समीक्षा में कमजोर…
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर 1 मई से 10 जून 2026 तक “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन किया जा रहा है।
कैसा “सुशासन” ?
सरल मुख्यमंत्री का सुशासन का उद्देश्य मैदानी इलाकों में जनसाधारण की समस्याओं का निराकरण करना है। वैसे पिछले कई सुशासन तिहारों में समस्याओं के आवेदनों का निराकरण अबतक तो हुआ नहीं है, फिर भरी गर्मी में जहां राज्य सरकार ही सूचनाएं प्रकाशित करवाती है कि लू (heatstroke) की प्राकृतिक परिस्थितियों में घर से बाहर ना निकलें और फिर हीटस्ट्रोक मे अधिकारी कर्मचारी घर से बाहर निकलेंगे, बीमार पड़ेंगे, उसे कमाल की रणनीति (masterstroke) बताया जायेगा।
लेकिन मंत्रालय में सुशासन कब आयेगा ?
समझ नहीं आ रहा है कि मंत्रालय में पदस्थ अधिकारियों में आपसी समन्वय है कि नहीं, समन्वय की बात छोड़िये, एक ही आदेश/निर्देश जारी पत्रों में ही विरोधाभासी वाक्यों का समावेश क्यों करते हैं, यहां तो किसी के शिक्षा पर सवाल उठते नहीं, किन्तु समझदारी या काॅमन सेंस पर सवाल जरुर उठ रहे हैं।
ताजा मामला राज्य महिला एवं बाल विकास का है
जहां बड़े-बड़े अधिकारी ₹500 – 6,000 तक के जिओरजिओ, बाॅस, मलकाॅन्स, हिलीयम का रुमाल (◻️), राॅयले, थियेटर, बाॅस के ₹500 – 8000 तक के मोजे (🧦), दामेन्स्क, केल्विन क्लेन, टाॅमी हिलफिगर के ₹800 – 15000 तक की चड्डी (🩲), डर्मावियर, जाॅकी, पैराॅट डबल हार्स के ₹800 – 18000 तक के बनियान (👕) पहनते हैं और आंगन बाड़ी की महिलाओं के लिए मात्र ₹500 की साड़ी प्रस्तावित करते हैं।
भूपेश ने दी थी राहत
बता दूं कि भूपेश बघेल सरकार ने आंगन बाड़ी की महिलाओं का मानदेय ₹10,000/₹7,500/₹5,000 बढाये थे और पांच वर्षों में कभी भी साड़ियों के गुणवत्ता पर शिकायतें नहीं मिली।
साड़ियों से मछली झोल रही महिला एवं बाल विकास मंत्री
वर्तमान महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रजवाड़े ने कांग्रेस शासन के वक्त वितरित की गयी साड़ियों को मछली झोलने (पकड़ने) के आते थे बतायी थी और अब वही मंत्री साड़ियों की गुणवत्ता के जांच के आदेश दी हैं।
खरीदी आदेश
महिला एवं बाल विकास विभाग ने छत्तीसगढ़ खादी ग्रामोद्योग विभाग के माध्यम से लगभग 10 करोड रुपए की साड़ी 2024-25 के लिए और लगभग 10 करोड रुपए की ही साड़ी 2025-26 के लिए खरीदी का आदेश के आदेश दिये।
साडी़ का रंग निकला : विभाग को थी सूचना

2024-25 की साड़ी जब आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ताओं को वितरित की गई तो शिकायत आई कि इसका रंग निकल रहा है और साड़ी की लंबाई कम है। सप्लायरों ने लिखित में विभाग को सूचित किया कि साड़ी का रंग निकल सकता है…
इस शिकायत के बाद महिला बाल विकास विभाग छत्तीसगढ़ शासन ने इसकी जांच करवाई और 5 से 6 जिलों में इसकी शिकायत सही पाई गई और इसे बदलकर देने के लिए और जिस सप्लायर ने अनियमितता की है उसकी जांच के लिए संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग ने 26 मार्च 2026 को प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ ग्राम उद्योग को पत्र प्रेषित कर जांच करने के साथ दोषी सप्लायर पर कार्यवाही करने का निर्देश दिया है…
आधी आबादी से भाजपा सरकार का झूठ और मजाक
देश की आधी आबादी के लिये चिंतित और झूठ की राजनीति में डुबकी लगा रही केन्द्र और राज्य सरकारें महिला कल्याण (विभाग) के लिए बजट में आवश्यक या संतोषजनक राशि का प्रावधान ही नहीं किया और
अब इसी आधी आबादी के नाम पर झूठ की राजनीति कर जनता का धन और समय बरबाद कर रही है। छग राज्य की मंत्री का नाम भले ही लक्ष्मी है, किन्तु वित्त मंत्री पर दबाव डालकर महिलाओं के लिये आवश्यक लक्ष्मी का इंतजाम नहीं कर सकी।
मुख्य सचिव नाराज हुए
महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों की इस साड़ियों की शिकायत पर मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन ने पूछताछ की और निर्देश दिया कि अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लगभग यही बात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों को और विभाग के मंत्री को बोले।
मना किया गया… फिर भी आदेश
इस बात की पुष्टि संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा छत्तीसगढ़ ग्राम उद्योग विभाग के प्रबंध संचालक को प्रेषित पत्र में भी स्पष्ट होता है…जिसमें विरोधाभासी वाक्यों को समाहित करते हुए, राज्य सरकार के ही एक अंग को राजा-फरमान जारी कर ₹500 रुपये में ही गुणवत्तायुक्त साड़ी सप्लाई का आदेश दे दिया।
क्या हो जाता, यदि हथकरघा विभाग को आदेश होता

जबकि छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विपणन सहकारी संघ ने साड़ी सप्लाई के लिए अपना मूल्य ₹860 दिया, जिसके कारण वह सप्लाई की पात्रता से अलग हट गया, क्योंकि विभाग सिर्फ ₹500 में साड़ी खरीदने का निर्णय लिया है…और तब सप्लायरों की एन्ट्री हो गयी।
संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी के द्वारा छत्तीसगढ़ ग्राम उद्योग विभाग के प्रबंध संचालक को प्रेषित पत्र से यह भी होता है।