
[ अजय कुमार ]
- सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल एक वर्ष के लिए और बढ़ाया गया…
- कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर सीबीआई निदेशक का कार्यकाल 24 मई, 2026 से आगे एक वर्ष के लिए बढ़ाने की मंजूरी दे दी है…
एक्टेन्शन…दूसरी बार…
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक प्रवीण सूद को बुधवार (13 मई, 2026) को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) द्वारा चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर एक वर्ष का और विस्तार दिया गया है।
एसीसी (Appointments Committee of the Cabinet) के आदेश में कहा गया है कि प्रवीण सूद का कार्यकाल 24 मई, 2026 के बाद एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है। 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी को सीबीआई प्रमुख के रूप में अपना दो वर्षीय कार्यकाल पूरा करने के बाद मई 2025 में पहले ही एक वर्ष का विस्तार दिया गया था।
मोदी की अध्यक्षता में बैठक
मंगलवार 12 मई, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति ने अगले सीबीआई निदेशक की नियुक्ति पर निर्णय लेने के लिए बैठक की। बैठक के दौरान, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने असहमति पत्र प्रस्तुत करते हुए सरकार पर राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए सीबीआई पर “संस्थागत नियंत्रण” का आरोप लगाया।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली इस समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और विपक्ष के नेता भी शामिल हैं। यह बैठक प्रधानमंत्री के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर हुई और एक घंटे से अधिक समय तक चली। वर्तमान सीबीआई निदेशक का एक वर्ष का विस्तार 24 मई, 2026 को समाप्त होने वाला था।
राहुल गांधी असहमत
राहुल गांधी ने अपने एक्स (X) हैंडल पर असहमति पत्र साझा किया। उन्होंने कहा, “आपकी सरकार ने भारत की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई का बार-बार दुरुपयोग किया है, जिसका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए किया गया है। इसी तरह के संस्थागत भ्रष्टाचार को रोकने के लिए विपक्ष के नेता को चयन समिति में शामिल किया जाता है। अफसोस की बात है कि आपने इस प्रक्रिया में मुझे कोई सार्थक भूमिका नहीं दी है।”
69 अधिकारियों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं करायी
राहुल ने कहा कि बार-बार लिखित अनुरोध करने के बावजूद, उन्हें योग्य उम्मीदवारों की स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट या 360-डिग्री रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई।
उन्होंने आगे कहा, “इसके बजाय, मुझसे समिति की बैठक के दौरान पहली बार 69 उम्मीदवारों के मूल्यांकन रिकॉर्ड की जांच करने की अपेक्षा की गई। मुझे 360-डिग्री रिपोर्ट देने से साफ इनकार कर दिया गया। प्रत्येक उम्मीदवार के इतिहास और प्रदर्शन का आकलन करने के लिए इन रिकॉर्डों की विस्तृत समीक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिना किसी कानूनी आधार के जानबूझकर जानकारी से वंचित करना चयन प्रक्रिया का मजाक उड़ाता है और यह सुनिश्चित करता है कि केवल आपके पूर्व-निर्धारित उम्मीदवार का ही चयन हो।”