
[ अजय कुमार ]
- भारत की जनसंख्या बढ़ी…
- सर्वोच्च न्यायालय में मामलों की संख्या बढ़ी…
- केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ा दी है…
- केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी और राष्ट्रपति की मुहर के बाद, सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक पेश किया गया है…
- इस विधेयक के तहत जजों की अधिकतम संख्या 34 से बढ़कर 38 हो गई है…
- अब सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित जजों की कुल संख्या 38 हो गई है…
- न्यायाधीशों की संख्या में यह बढ़ोतरी अदालतों में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने और मामलों के त्वरित निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए की गई है…
नई दिल्ली :
सर्वोच्च न्यायालय में अब जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है, पीएम मोदी कैबिनेट की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसको लेकर अध्यादेश जारी कर दिया है, इसकी जानकारी एक्स (X) पर एक पोस्ट के माध्यम से कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दी।
केंद्रीय कानून मंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा, “राष्ट्रपति ने एक अध्यादेश जारी कर सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दी है, अब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है। इसके लिए 1956 के “सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम” में संशोधन किया गया है।”

नोटिफिकेशन जारी…
कानून मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से अध्यादेश जारी किया गया है, संविधान के अनुच्छेद 123(1) के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राष्ट्रपति ने यह अध्यादेश जारी किया है। इस अध्यादेश को सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 कहा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 की धारा कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 की धारा 2 में 33 से बढ़ाकर 37 कर दी जाती है।
कब-कब बढ़ाई गई जजों की संख्या…
1950 – 8 जज सीजेआई सहित
1956 – 11 सीजेआई सहित
1960 – 14 सीजेआई सहित
1978 – 18 सीजेआई सहित
1986 – 26 सीजेआई सहित
2009 – 31 सीजेआई सहित
2019 – 34 सीजेआई सहित
संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा, जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद द्वारा कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे।
7 से 10…
सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।
10 से 13…
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था।
13 से 17…
सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, भारत के सर्वोच्च न्यायालय
की कार्यकारी संख्या को मंत्रिमंडल द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित कर दिया गया था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस प्रतिबंध को हटा दिया गया था।
17 से 25…
सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी।
25 से 30…
इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।
30 से 33…
भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को इससे पहले अंतिम बार अगस्त 2019 में 30 से बढ़ाकर 33 कर दिया गया था (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर), मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से और संशोधन करके। उसके बाद अब यह संशोधन किया गया है।