छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग में भ्रष्टाचार ही माना जाता है सदाचार

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[ अजय कुमार ]

  • सीनियर अधिकारियों का डाल दिया गया अचार
  • नियमों को ताक पर रखकर दिया जा रहा है प्रभार
  • जूनियर एएफओ को बड़े जिलों की कमान
  • और सीनियर एफओ का किया जा रहा है अपमान

छत्तीसगढ़ के खाद्य विभाग में अधिकारियों की पदस्थापना (ट्रांसफर – पोस्टिंग) में नियमों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर प्रशासनिक अनियमितता और ‘जंगलराज’ बरते जाने का गंभीर मामला सामने आया है।


खाद्य विभाग में असंतोष
विभाग के भीतर चल रहे इस खेल के कारण सक्षम और वरिष्ठ अधिकारियों में भारी असंतोष व्याप्त है,
प्राप्त दस्तावेजी साक्ष्यों के अनुसार, विभाग में ‘नियमित जिला खाद्य अधिकारी’ होना एक अभिशाप बन चुका है।
वरिष्ठ और नियमित अधिकारियों को मुख्यधारा से हटाकर संचालनालय में डंप (लूप-लाइन) कर दिया गया है, जबकि राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों की कमान बेहद जूनियर सहायक खाद्य अधिकारियों (AFO) को सौंप दी गई है।

अनियमितताओं के बड़े प्रमाण
उदाहरण 1-(क) –
विभाग ने 5 ‘नियमित’ जिला खाद्य अधिकारियों (जैसे- सीमा अग्रवाल, सचिन मरकाम, मंजूला सलाम और अमरौतिन खुटे) को संचालनालय में पदस्थ किया गया है।
उदाहरण (ख) –
नियमित जिला खाद्य अधिकारी राजीव लोचन तिवारी को प्रताड़ित करते हुए बिलासपुर जिले में उनके मूल पद से नीचे ‘सहायक खाद्य अधिकारी’ के रूप में डिमोट करके पोस्टिंग दी गई है।
उदाहरण 2 –
विभागीय नियमों या प्रोटोकॉल के विपरीत, राज्य के 7 महत्वपूर्ण जिलों में नियम विरुद्ध तरीके से सहायक खाद्य अधिकारियों (AFO) को प्रभारी बना दिया गया है।
(क) – खाद्य मंत्री के प्रभार वाले जिले सरगुजा में नियमों की धज्जियां उड़ाई गयी, इस हाई-प्रोफाइल जिले सरगुजा से नियमित खाद्य अधिकारी को हटा दिया गया है। उनकी जगह वरिष्ठता सूची में बेहद नीचे (31वें/40वें स्थान पर) मौजूद जूनियर सहायक खाद्य अधिकारी (AFO) चित्रकांत ध्रुव को जिले की कमान सौंप दी गई है।
(ख) – खाद्य मंत्री के गृह जिले (बेमेतरा) में चहेतों को उपकृत करने का खेल खेला गया, नियमों की सारी हदें पार कर दी गईं। यहाँ वरिष्ठता सूची में 54वें क्रम पर आने वाले अत्यंत जूनियर अधिकारी ओंकार सिंह (सहायक खाद्य अधिकारी) को पूरे जिले का प्रभार सौंपकर उपकृत किया गया है।
(ग) – प्रदेश के कद्दावर नेता ओपी चौधरी (वित्त मंत्री) के गृह जिले रायगढ़ में भी प्रशासनिक शुचिता की बलि चढ़ाई गई है, वरिष्ठता सूची में 50वें स्थान पर काबिज जूनियर सहायक खाद्य अधिकारी चितरंजन सिंह को तमाम कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर रायगढ़ का खाद्य अधिकारी नियुक्त किया गया है।

₹गांधीजी का खेल जारी रहे, इसलिए…
नाम उजागर ना करने की शर्त पर मंत्रालय में पदस्थ उच्च अधिकारी ने बताया कि खाद्य विभाग में, सब ₹गांधीजी का खेल चल रहा है, उन्होंने आगे बताया कि जब यह मुद्दा शासन स्तर पर उठायी जाती है तो उत्तर मिलता है कि अच्छे अधिकारी हैं उन्हें जिलों का प्रभार दिया गया है, किन्तु मामला बिलकुल इसके विपरीत है, इस “विपरीत मामले” को स्पष्ट किया जाये, तो यही कहा जा सकता है कि भ्रष्ट अधिकारियों को लेनदेन कर जिलों में पदस्थ किया गया है और साथ ही लेनदेन की प्रक्रिया, प्रति माह जारी रहे, के वादे भी लिये गये हैं।

दबाव की राजनीति और विसंगतियों का उदाहरण
जिलों की कमान सौंपने में अन्य जूनियर अधिकारियों जैसे खैरागढ़ में देवेन्द्र बग्गा (वरिष्ठता क्रम 6) और कवर्धा में चन्द्रशेखर देवांगन (वरिष्ठता क्रम 14) को भी नियमों के परे जाकर जिलों का मुख्य अधिकारी बनाया गया है। खाद्य विभाग में चल रही इस मनमानी से स्पष्ट है कि प्रशासनिक योग्यता और वरिष्ठता सूची का कोई मोल नहीं रह गया है। राजनेताओं के गृह जिलों और प्रभार व प्रभाव वाले क्षेत्रों में चहेते और जूनियर अधिकारियों को मलाईदार पोस्टिंग देने के लिए पूरी व्यवस्था को पंगु बना दिया गया है।

किसी हंस से जांच हुई तो दूध और पानी अलग हो जायेगा
सजग नागरिकों और विभागीय सूत्रों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके और वरिष्ठ अधिकारियों को सम्मान व न्याय मिल सके।


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