तृणमूल कांग्रेस में अफरा-तफरी : भाजपा बेचैन

Spread the love

[ अजय कुमार ]

  • एक ओर ममता बैनर्जी चिंतित…
  • दूसरी ओर गृहमंत्री अमित शाह परेशान…
  • तीसरी तरफ टीएमसी सांसदों के हां-ना से बागी सांसद हलाकान…
  • टीएमसी के नवनिर्वाचित विधायकों भी असमंजस में…
  • आगे चुनाव चिन्ह का मामला सामने आयेगा…
  • संपत्तियों और परिसंपत्तियों का विवाद भी होगा…

“नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी” का राष्ट्रीय उदय
टीएमसी के बागी सांसदों के एनडीए में शामिल होने और ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी’ में जाने की संभावना है।
कोलकाता से विश्वसनीय सूत्र बता रहे हैं कि बागी तृणमूल कांग्रेस सांसद किसी एक नयी राजनीतिक दल में शामिल हो सकते हैं और फिर केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन कर सकते हैं।

टीएमसी मे असंतोष
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती असंतोष के बीच, पार्टी के बागी सांसद किसी दूसरे राजनीतिक दल में शामिल हो सकते हैं और उसके बाद केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस को समर्थन दे सकते हैं।

एनसीपी त्रिपुरा का क्षेत्रीय दल
बंगलादेश में भी…
बता दें कि नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी त्रिपुरा में एक क्षेत्रीय राजनीतिक संगठन या दल है, इसी पार्टी से प्रेरणा लेकर बांग्लादेश में भी फरवरी 2025 में बनाया गया था, यह बंगलादेश में छात्रों के नेतृत्व वाला पहला राजनीतिक दल है, जो जुलाई 2024 के बड़े छात्र आंदोलन के बाद अस्तित्व में आया।
तीन राज्यों में…
सूत्रों के मुताबिक, इस कदम से अलग संसदीय समूह बनाने से जुड़ी तकनीकी और कानूनी बाधाओं को दूर करने में मदद मिलेगी, माना जा रहा है कि इस नई संयुक्त पार्टी का नाम ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी’ होगा और इसका मुख्य राजनीतिक फोकस पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा पर रहेगा।

बागी सांसद, विलय और एनडीए के समर्थन पर विचार कर रहे हैं
हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है क्योंकि बागी गुट अपनी भविष्य की राजनीतिक ठिकाने की तलाश रहा है।

यह घटनाक्रम तब सामने आया है, जब बागी गुट रविवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर इकट्ठा हुआ और उसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास पर गया।

लोकसभा अध्यक्ष के घर जाने से पहले असंतुष्टों ने यादव से मुलाकात की
यादव के घर पर बैठक में शामिल होने वालों में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, अरूप चक्रवर्ती, सायोनी घोष, माला रॉय, बापी हलदर और प्रसून बनर्जी शामिल थे। यादव के आवास पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे भी मौजूद थे।

ममता की ममता का विरोध…
यह घटनाक्रम उस संकट को और गंभीर बनाता है जो पश्चिम बंगाल में चुनाव हारने के बाद से टीएमसी पर छाया हुआ है। हाल के दिनों में, कई सांसदों ने राज्य के राजनीतिक हालात पर चिंता जताते हुए और केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) का समर्थन करते हुए पार्टी नेतृत्व से खुलकर किनारा कर लिया है।

चिट्ठी का दावा : किन्तु अबतक सार्वजनिक नहीं
इससे पहले, बागी गुट ने काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में एक अलग संसदीय समूह के तौर पर मान्यता पाने के लिए एक पत्र सौंपा था। शुक्रवार को 19 टीएमसी सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक दस्तावेज़ सामने आया, बताया गया, किन्तु पत्र अबतक सार्वजनिक नहीं हुई है, जिससे यह अटकलें तेज़ हो गईं कि पार्टी के लोकसभा गुट में बड़ी फूट पड़ सकती है। हालांकि सांसदों का यह पत्र फर्जी बताया जा रहा है क्योंकि 5 सांसदों ने स्पष्ट कर दिया है कि पत्र में उनके हस्ताक्षर नहीं है।

इससे पहले दिन में, दस्तीदार ने दावा किया कि दो और सांसद बागी खेमे में शामिल होने वाले हैं, जिससे लोकसभा में उनकी संख्या 22 हो जाएगी और संकट और गहरा जाएगा।

दो तिहाई जरुरी की मजबूरी
नियमों के अनुसार, किसी पार्टी से अलग होकर अलग समूह बनाने के लिए कुल सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होती है। टीएमसी के मामले में यह आंकड़ा बनता है। इसलिए बागी सांसदों का दावा मजबूत माना जा रहा है।

ममता समर्थक सांसद बिड़ला से मिले
बागी सांसदों से पहले ममता के समर्थन में टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष लोकसभा स्पीकर से मिले। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि पार्टी सिर्फ 20 सांसदों या 60 विधायकों से नहीं बनी, ममता बनर्जी ने ही इस पार्टी को खड़ा किया है, इसलिए वही असली पार्टी हैं।

टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बिरला को लेटर लिखकर कहा कि सदन में टीएमसी को केवल एक पार्टी के रूप में देखा जाए। किसी दूसरे गुट को मान्यता न दी जाए। पश्चिम बंगाल में टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसद हैं। इसके अलावा राज्यसभा में 13 सांसद हैं, जिनमें 4 सांसदों ने पद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 17 सांसद बचे होने बात
टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं, ऐसा गोदी मीडिया बता रहा है, किन्तु 5 सांसदों ने कह दिया कि उन्होंने पत्र में हस्ताक्षर नहीं किये हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं, टीएमसी के 13 सांसद अंगद हैं।

जिससे, हां या ना के चक्कर में लोकसभा में बागियों की अलग होने की मंशा पर प्रश्नचिन्ह जरुर लग रहा है, अर्थात् टीएमसी से अलग होने पर सांसदी खोना निश्चित है।
विधानसभा में अलग परिस्थितियां
विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं, इसप्रकार राज्य में दो तिहाई का आंकड़ा है। आगे अब तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिन्ह और संपत्तियों पर अधिकार का मामला गरम होगा। यहां भी महाराष्ट्र की शिवसेना और एनसीपी की तरह भावी विवादों का अंत होगा।


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *