
[ अजय कुमार ]
[ बड़ी संख्या में… सोशल मीडिया में… वायरल हो रहे… उद्बोधनों, उद्दहरणों, प्रतिक्रियाओं के गहन अध्ययन पश्चात… “सार…” आपके अपने मोबाइल में… शायद देश के लिए सकारात्मक क्रांति… ]
क्रांति शब्द का प्रयोग “कम समय में बहुत बड़ा परिवर्तन” के रूप में लिया जाता है…
“क्रांतियां” कई प्रकार की होती हैं…
जैसे –
- राजनीतिक क्रांति
- सामाजिक क्रांति
- आर्थिक क्रांति
- धार्मिक क्रांति
- वैज्ञानिक क्रांति
- मजदूर क्रांति
- औद्योगिक क्रांति
और सबसे महत्वपूर्ण…
- विचारधारात्मक क्रांति
फिलहाल भारत में संभवतः राजनीतिक और सामाजिक क्रांति की बात सामने आ रही है। क्रांति अक्सर सामाजिक चेतना और वर्तमान परिस्थितियों से प्रभावित एक बड़े और पीड़ित या प्रभावित जनसमुदाय, जो इस स्थिति को तत्काल बदलना चाहते हैं, से शुरू होती है।
वहीं राजनीतिक क्रांति के लिए पहले ये समझना होगा, क्रांति सकारत्मक होगा या फिर नकारात्मक।
सकारात्मक क्रांति…
फिलहाल देश में सकारात्मक क्रांति का अंदेशा प्रतीत हो रहा है क्योंकि जातिवाद, हिंदू-मुस्लिम टकराव, “भाई-भतीजावाद, वंशवाद, बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता, अनियमित जनसंख्या वृद्धि, भाषावाद, क्षेत्रीय सर्वोच्चता या क्षेत्रवाद जैसी परिस्थितियां उन्माद पर है, ऊपर से सरकार के ऐसे निर्णय, जो आम भारतीयों के साथ-साथ प्रबुद्ध वर्ग को कतई स्वीकार नहीं है, सरकार द्वारा जनसाधारण को चोट करने वाले कार्यों और उपायों ने, स्वतंत्र भारत की परिकल्पना को चकनाचूर के दिया है।
इंडिया विरुद्ध भारत…
भारत आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ एक देश में दो देश बन गए हैं, एक इंडिया (India) है, जो दिन रात तरक़्क़ी कर रहा है, जहाँ ऊँची-ऊँची इमारतें हैं, बड़े महलों की तरह के घर हैं, जहाँ गाड़ियों और नौकर चाकरों की भरमार है, खासकर इने-गिने उद्योगपति जिन्हें सरकारी सहयोग भरपूर मिल रहा है और दूसरी ओर वह भारत है जो हर दिन पिछड़ रहा है, जिसमें ग़रीबी है, क़र्ज़े की समस्या है, बेरोजगारी है, शिक्षा का अभाव है और जो अपने राशन के लिए भी भारत सरकार पर निर्भर है, जिनकी संख्या भारत सरकार के ही अनुसार 82.5 करोड़ है जबकि देश की जनसंख्या लगभग 147.6 करोड़ है।
युवा भारत…
भारत इस समय दुनिया का सबसे युवा देश है, भारत में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की आबादी, कुल जनसंख्या का 27.2 प्रतिशत है, इसके अतिरिक्त और बता दूं कि भारत की 65.13 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या… 35 वर्ष से कम आयु की है, जिन्हें रोजगार चाहिए। फिलहाल काकरोच जनता पार्टी के बैनर तले आंदोलन कर रहे हैं।
बागी युवा…
युवाओं में सबसे अधिक बाग़ी हमारे देश में ही है और आज वही युवा देश का सबसे बड़ा पीड़ित वर्ग बन गया है। करोड़ों पढ़े-लिखे युवा डिग्रियों के साथ नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं, न तो उन्हें नौकरी मिल रही है और यदि नौकरी के फार्म भरते भी हैं तो पेपर लीक हो जाता है। जिन हाथों में देश का भविष्य होना चाहिए, वे हाथ कभी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक से टूटते हैं, तो कभी भ्रष्ट व्यवस्था से हार जाते हैं।
युवाओं के सपनों का मज़ाक तब बनता है जब मेहनत से ज्यादा सिफारिश और पैसे की ताकत काम करने लगे। एक युवा जब बार-बार अपने साथ अन्याय होते देखता है, तब उसके अंदर व्यवस्था के विरुद्ध एक गुस्सा पैदा होता है और यही गुस्सा एक दिन परिवर्तन की आग बन जाता है, यहां क्रांति को सामाजिक और आर्थिक कहा जायेगा।
किसान परेशान…
देश का किसान, जो कृषि प्रधान देश की रीढ़ कहलाता है, आज सबसे अधिक असुरक्षित महसूस कर रहा है। खेत में मेहनत करने वाला किसान कभी मौसम से हारता है, कभी मंडियों से, तो कभी कर्ज़ से। जिन व्यक्तियों के हाथों से देश का पेट भरता है, वही व्यक्ति कई बार अपने परिवार का पेट भरने के लिए संघर्ष करता दिखाई देता है, इंडिया और भारत में यह अंतर, बड़े बदलाव की चाहत रखता है। आज 2026 में किसान सरकारी अव्यवस्था और मौसम की बेरूखी से जूझ रहा है।
व्यापारी मुश्किल में…
व्यापारी वर्ग भी आज भारी क़र्ज़े के बोझ तले दब चुका है, ख़ासकर नोटबंदी , ग़लत जीएसटी और कोरोनाकाल में लॉकडाउन के कारण जो व्यापार में बर्बादी आई, उससे वह अभी तक नहीं उबर पाया है। छोटे दुकानदार और मध्यम वर्गीय व्यापारी टैक्स, बढ़ती महंगाई और बड़ी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा में पिस रहे हैं, केन्द्र सरकार की गलत नीतियों के कारण, छोटे उद्योगों के बंद हो जाने के बाद बेरोजगारों की संख्या में जबरदस्त बढोत्तरी हुई है।
जिन लोगों ने वर्षों की मेहनत से अपने कारोबार खड़े किए, वे आज व्यवस्था की जटिलताओं, सरकार की गलत नीतियों और आर्थिक दबाव के कारण टूटते जा रहे हैं। व्यापार में ईमानदारी से टिके रहना कठिन होता जा रहा है, क्योंकि व्यवस्था धीरे-धीरे केवल बड़े और ताकतवर लोगों के पक्ष में झुकती दिखाई देती है, इसे व्यावसायिक क्रांति के रूप में देखा जाना चाहिए।
सरकारी भाई : बढ़ती खाई…
सबसे चिंताजनक बात है अमीर और गरीब के बीच बढ़ती आर्थिक खाई… एक तरफ गिनती के ऐसे सरकारी भाई लोग हैं जिनकी संपत्ति हर दिन अरबों में बढ़ रही है, दूसरी तरफ करोड़ों लोग दो वक्त की रोटी, इलाज और शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जब समाज में असमानता अत्यधिक बढ़ जाती है, तब लोगों के भीतर यह सवाल उठना शुरू हो जाता है कि क्या यह देश केवल कुछ लोगों के लिए है या सबके लिए ? क्या लोकतंत्र जिंदा है।
क्रांति के लिए सभी कारण मौजूद है
किसी भी देश में क्रांति के लिए जो अ-वैधानिक सामग्री और तत्व होने चाहिए, क्रांति शुरू होने के लिए जिन कारणों का होना जरूरी है, वे सभी कारण वर्तमान में भारत में मौजूद हैं और बहुत तेज़ी से… और बड़े हो रहे हैं। अब यह तो समय ही बताएगा कि वह क्रांति कब होगी, या फिर इसकी शुरुआत हो चुकी है कहा जाये, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। परन्तु इतना तय है कि वह समय अब आ चुका है, भारत एक क्रांति के मुहाने पर खड़ा है।