भारतीय सेना में भी भ्रष्टाचार

[ अजय कुमार ]
नई दिल्ली/चंडीगढ़ :
भारतीय सेना में समय-समय पर रिश्वतखोरी, रक्षा खरीद (डिफेंस डील) और भर्ती से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहे हैं, केन्द्र सरकार ( रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने राज्यसभा में… ) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2010 से अब तक सेना अर्थात् सशस्त्र बलों में भ्रष्टाचार के 1080 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें सबसे अधिक 1,046 मामले थलसेना कर्मियों से जुड़े हुए थे।
भारतीय वायुसेना ने ऐसे 29 मामलों और भारतीय नौसेना ने पांच मामलों की जानकारी दी। सेना में भ्रष्टाचार के 1,046 मामले थे और यह मामले 2013 एवं 2021 के बीच प्रकाश में आए।
अबतक –
- बोफोर्स घोटाला
- अगस्टा वेस्टलैंड घोटाला
- सुखना जमीन घोटाला
- आर्मी राशन घोटाला
- आदर्श सोसाइटी घोटाला
सीबीआई द्वारा प्रस्तावित…
हालिया रिश्वत के मामले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रक्षा उत्पादों की सप्लाई और टेंडरों में गड़बड़ी के आरोप में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों पर शिकंजा कसा है।
कपूरथला नौकरी घोटाले में मेजर जनरल और अन्य के खिलाफ सेना ने कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू की।
यह मामला 2021 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा सेवा चयन बोर्डों के माध्यम से सेना भर्ती में कथित रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की जांच से जुड़ा है।
कोर्ट मार्शल शुरू
पंजाब के कपूरथला स्थित सेवा चयन केंद्र में सशस्त्र बलों के लिए अधिकारी उम्मीदवारों के चयन हेतु कथित तौर पर रिश्वत लेने के पांच साल पुराने मामले में सेना ने एक मेजर जनरल और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट-मार्शल की कार्यवाही शुरू कर दी है।
कुछ अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर अवैध रिश्वत लेने के मामले में सैन्य खुफिया विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के बाद, सेना मुख्यालय के अनुशासन और सतर्कता के अतिरिक्त महानिदेशालय ने 2021 में इस घोटाले की विस्तृत जांच के लिए सीबीआई से संपर्क किया था।
23 सैन्य अधिकारी आरोपित
उस समय, जांच एजेंसी ने कपूरथला सहित विभिन्न एसएसबी केंद्रों में कथित अनियमितताओं के संबंध में सेना के कर्मियों और नागरिकों सहित 23 कथित आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
इसके बाद दिल्ली, कपूरथला, बठिंडा, कैथल, पलवल, लखनऊ, बरेली, गोरखपुर, विशाखापत्तनम, जयपुर, गुवाहाटी और जोरहाट सहित देश भर में लगभग 30 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया और एजेंसी ने जांच के दौरान कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री बरामद की।
स्वास्थ्य परीक्षण में हेराफेरी और रिश्वत
सूत्रों ने बताया कि यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि चिकित्सा कारणों से अस्थायी रूप से अस्वीकृत किए गए उम्मीदवारों को भ्रष्टाचार के माध्यम से मंजूरी दे दी गई थी।
इस कथित घोटाले में रिव्यू मेडिकल बोर्ड के माध्यम से धोखाधड़ीपूर्ण मंजूरी प्राप्त करना शामिल था, जिसमें कथित तौर पर प्रति उम्मीदवार 50 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक की रिश्वत दी गई थी।
चिकित्सा परीक्षण में असफल उम्मीदवारों की लिस्ट बनाया
एक जवान पर चिकित्सकीय रूप से अस्वीकृत उम्मीदवारों की सूची रखने का आरोप है, जिनसे इस तरह की अवैध सहायता के लिए संपर्क किया जा सकता था।
मेजर जनरल को मुख्यालय दिल्ली क्षेत्र में तैनात किया गया, जबकि लगभग 20 अन्य अधिकारियों को, जिनमें से कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं, विभिन्न इकाइयों में तैनात किया गया है।
मेजर जनरल की धारा 123 के तहत वापस बुलाया गया
सूत्रों ने बता रहे हैं कि केंद्र के प्रमुख मेजर जनरल के खिलाफ सेना अधिनियम की धारा 123 लगाई गई, इस धारा के अंतर्गत इसलिए क्योंकि मेजर जनरल की सेवा का अंतिम दिन था, ताकि सेना उनके खिलाफ कोर्ट-मार्शल की कार्यवाही कर सके।
यह धारा सेना को सैन्य सेवा के दौरान अपराध करने के आरोपी सेवानिवृत्त या सेवामुक्त कर्मियों को वापस बुलाने का अधिकार देती है ताकि उनके खिलाफ अधिनियम के तहत कार्यवाही की जा सके।
शिकायत एक के विरुद्ध : जांच के घेरे में आये अन्य अधिकारी
सूत्रों ने बताया कि एक कदाचार में शामिल होने के आरोप में एक कदाचार अधिकारी के खिलाफ शिकायतें मिलने के बाद जांच शुरू की गई थी।
बाद में यह बात सामने आई कि कई अन्य अंदरूनी लोग और नागरिक भी इसमें शामिल हो सकते हैं, जिनमें कुछ उच्च पदस्थ अधिकारी भी शामिल हैं। सेवा चयन केंद्र (एसएससी) सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) की परीक्षाएं आयोजित करते हैं।